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बजट मिलने के बावजूद समतल नहीं हुआ रेलवे ट्रैक
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:48 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राजाजी टाइगर रिजर्व में ट्रेनों से हाथी समेत अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की ओर से बजट जारी होने के बावजूद रेलवे ट्रैक को समतल नहीं किया जा सका है। वन्यजीवों की सुरक्षा संबंधी प्रोजेक्ट के लिए केंद्र ने ढाई करोड़ मंजूर किए हैं, लेकिन इसकी फाइल शासन में अटकने से सुरक्षा के कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के उद्देश्य से केंद्र के इस प्रोजेक्ट पर काम होता तो शायद शनिवार को एक हाथी के बच्चे को बचाया जा सकता।
राजाजी टाइगर रिजर्व में रेलवे ट्रैक पर अब तक कई हाथियों की ट्रेन से कटकर मौत हो चुकी है। हादसे रोकने के लिए वन विभाग की ओर से रेलवे को हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ट्रेन धीमी गति से चलाने, हार्न बजाने, रेलवे का कचरा जंगल में न डालने सहित कई सुझाव दिए गए, लेकिन ट्रेन की धीमी गति के सवाल पर रेलवे की ओर से यह कहा जाता है कि हरिद्वार से दून आने पर कुछ स्थानों पर चढ़ाई के चलते ट्रेन की गति एक निश्चित सीमा से कम करना संभव नहीं है।
इसे देखते हुए वन विभाग की ओर से करीब दस स्थानों पर रेलवे ट्रैक को समतल करने, छह स्थानों पर वाच टावर लगाने, रेलवे ट्रैक के आसपास की झाड़ियों के कटान, नेटवर्क कनेक्टिविटी समेत कुछ बाइकर्स की तैनाती आदि कार्यों के लिए केंद्र सरकार को प्रोजेक्ट तैयार कर भेजा गया था। इसे केंद्र सरकार की मंजूरी भी मिल चुकी है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने ढाई करोड़ रुपये जारी किए हैं, लेकिन मामला उत्तराखंड शासन में लटका हुआ है।
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केंद्र से हाल ही में यह बजट रिलीज हुआ है। इस धनराशि को विभाग को रिलीज करने के लिए वित्त की सहमति लेनी होती है। इसे वित्त को भेजा गया है। वहीं, इससे पूर्व विभाग के प्रस्ताव में जो कमियां थी उसे विभाग को भेजकर दूर किया गया।
-अरविंद सिंह ह्यांकी, प्रभारी सचिव वन विभाग
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राजाजी टाइगर रिजर्व में ट्रेनों से हाथी समेत अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की ओर से बजट जारी होने के बावजूद रेलवे ट्रैक को समतल नहीं किया जा सका है। वन्यजीवों की सुरक्षा संबंधी प्रोजेक्ट के लिए केंद्र ने ढाई करोड़ मंजूर किए हैं, लेकिन इसकी फाइल शासन में अटकने से सुरक्षा के कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के उद्देश्य से केंद्र के इस प्रोजेक्ट पर काम होता तो शायद शनिवार को एक हाथी के बच्चे को बचाया जा सकता।
राजाजी टाइगर रिजर्व में रेलवे ट्रैक पर अब तक कई हाथियों की ट्रेन से कटकर मौत हो चुकी है। हादसे रोकने के लिए वन विभाग की ओर से रेलवे को हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ट्रेन धीमी गति से चलाने, हार्न बजाने, रेलवे का कचरा जंगल में न डालने सहित कई सुझाव दिए गए, लेकिन ट्रेन की धीमी गति के सवाल पर रेलवे की ओर से यह कहा जाता है कि हरिद्वार से दून आने पर कुछ स्थानों पर चढ़ाई के चलते ट्रेन की गति एक निश्चित सीमा से कम करना संभव नहीं है।
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इसे देखते हुए वन विभाग की ओर से करीब दस स्थानों पर रेलवे ट्रैक को समतल करने, छह स्थानों पर वाच टावर लगाने, रेलवे ट्रैक के आसपास की झाड़ियों के कटान, नेटवर्क कनेक्टिविटी समेत कुछ बाइकर्स की तैनाती आदि कार्यों के लिए केंद्र सरकार को प्रोजेक्ट तैयार कर भेजा गया था। इसे केंद्र सरकार की मंजूरी भी मिल चुकी है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने ढाई करोड़ रुपये जारी किए हैं, लेकिन मामला उत्तराखंड शासन में लटका हुआ है।
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केंद्र से हाल ही में यह बजट रिलीज हुआ है। इस धनराशि को विभाग को रिलीज करने के लिए वित्त की सहमति लेनी होती है। इसे वित्त को भेजा गया है। वहीं, इससे पूर्व विभाग के प्रस्ताव में जो कमियां थी उसे विभाग को भेजकर दूर किया गया।
-अरविंद सिंह ह्यांकी, प्रभारी सचिव वन विभाग