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अनियमितताओं में घिरा डीएवी, यूजीसी ने बैठाई विजलेंस जांच
Updated Sat, 10 Feb 2018 01:57 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
छात्र संख्या के लिहाज से सूबे का सबसे बड़ा डीएवी पीजी कॉलेज प्रशासन जांच से चौतरफा घिर गया है। एक ओर उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कॉलेज की विजिलेंस जांच बैठा दी है तो दूसरी ओर कॉलेज में तीन साल पहले हुई समूह ‘ग’ की भर्तियों की प्रदेश सरकार ने भी जांच शुरू कर दी है। इन सबके बीच यूजीसी ने कॉलेज को मिलने वाली करोड़ों की ग्रांट और विभिन्न शोध के लिए मिलने वाले फंड पर भी रोक लगा दी है।
डीएवी पीजी कॉलेज में वर्ष 2015 में हुए दाखिलों पर हंगामे के बाद कॉलेज प्रबंधन ने पूर्व जिला जज जस्टिस इंद्रजीत मल्होत्रा की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया था। इस उच्च स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई थीं। इसमें कॉलेज में मेरिट के बावजूद गड़बड़ी कर कम अंकों वाले छात्रों को दाखिले देने से लेकर तमाम वित्तीय अनियमितताएं भी शामिल थीं। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी थी। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई थी कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से कॉलेज का संचालन गलत किया जा रहा है। छात्र संख्या के लिहाज से डीएवी पीजी कॉलेज को 98 नए कमरे और 1400 शिक्षकों की सख्त जरूरत है। यह रिपोर्ट प्रबंधन के अलावा यूजीसी के पास भी भेजी गई थी।
यूजीसी ने हाल ही में रिपोर्ट का संज्ञान लिया और इसे गंभीर मानते हुए मामले में विजिलेंस जांच बैठा दी है। साथ ही कॉलेज को मिलने वाली यूजीसी की पूरी ग्रांट रोक दी है। जिन शिक्षकों के रिसर्च प्रोजेक्ट की फंडिंग यूजीसी से चल रही थी, वह भी रोक दी गई है। विजिलेंस जांच के संबंध में कॉलेज में यूजीसी का पत्र पहुंचा तो हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रबंधन ने अपने हाथ में ले लिया है। वहीं, डीएवी में करीब तीन वर्ष पहले समूह ‘ग’ के पदों पर भर्ती हुई थी। इसमें भी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच बैठा दी है। दो-दो जांच से आजकल कॉलेज परिसर में माहौल गर्म है।
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ऐसे-ऐसे आरोप
1. डीएवी कॉलेज में मेरिट से दाखिलों का नियम बनने के बावजूद मेरिट में बड़े खेल सामने आए हैं। पहले स्थान पर आने वाले छात्रों को कंप्यूटर से गड़बड़ी कर दूसरे विषयों में एंट्री दे दी गई। नीचे से नए छात्र उस मेरिट में घुसा दिए गए। दूसरे विषयों की मेरिट में जाने वाले छात्र मायूस होकर लौट गए। इस सेटिंग-गेटिंग में कॉलेज के कई कर्मियों की मिलीभगत की ओर भी इशारा किया गया है।
2. डीएवी में छात्रवृत्ति बांटने के नाम पर खेल आम है। यहां के कई कर्मचारी लाखों रुपये छात्रवृत्ति के डकार चुके हैं। छात्रवृत्ति घोटाले के ऐसे मामलों में पुलिस की जांच भी चल रही है।
3. कॉलेज में न तो छात्रों के बैठने की व्यवस्था है और न ही इन्फ्रास्ट्रक्चर। 36 हजार से ज्यादा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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यूजीसी का पत्र मिला था। पत्र और पूरी जानकारी कॉलेज प्रबंधन को भेज दी गई है। कई साल पहले हुई जांच पर प्रबंधन पहले ही कार्रवाई कर रहा है। लिहाजा, अब यूजीसी को पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन ही जवाब भेजने की तैयारी कर रहा है। उत्तराखंड सरकार की जांच में कॉलेज प्रशासन अपना पक्ष तथ्यों के साथ पेश कर चुका है।
-डॉ.देवेंद्र भसीन, प्राचार्य, डीएवी पीजी कॉलेज
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छात्र संख्या के लिहाज से सूबे का सबसे बड़ा डीएवी पीजी कॉलेज प्रशासन जांच से चौतरफा घिर गया है। एक ओर उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कॉलेज की विजिलेंस जांच बैठा दी है तो दूसरी ओर कॉलेज में तीन साल पहले हुई समूह ‘ग’ की भर्तियों की प्रदेश सरकार ने भी जांच शुरू कर दी है। इन सबके बीच यूजीसी ने कॉलेज को मिलने वाली करोड़ों की ग्रांट और विभिन्न शोध के लिए मिलने वाले फंड पर भी रोक लगा दी है।
डीएवी पीजी कॉलेज में वर्ष 2015 में हुए दाखिलों पर हंगामे के बाद कॉलेज प्रबंधन ने पूर्व जिला जज जस्टिस इंद्रजीत मल्होत्रा की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया था। इस उच्च स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई थीं। इसमें कॉलेज में मेरिट के बावजूद गड़बड़ी कर कम अंकों वाले छात्रों को दाखिले देने से लेकर तमाम वित्तीय अनियमितताएं भी शामिल थीं। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी थी। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई थी कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से कॉलेज का संचालन गलत किया जा रहा है। छात्र संख्या के लिहाज से डीएवी पीजी कॉलेज को 98 नए कमरे और 1400 शिक्षकों की सख्त जरूरत है। यह रिपोर्ट प्रबंधन के अलावा यूजीसी के पास भी भेजी गई थी।
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यूजीसी ने हाल ही में रिपोर्ट का संज्ञान लिया और इसे गंभीर मानते हुए मामले में विजिलेंस जांच बैठा दी है। साथ ही कॉलेज को मिलने वाली यूजीसी की पूरी ग्रांट रोक दी है। जिन शिक्षकों के रिसर्च प्रोजेक्ट की फंडिंग यूजीसी से चल रही थी, वह भी रोक दी गई है। विजिलेंस जांच के संबंध में कॉलेज में यूजीसी का पत्र पहुंचा तो हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रबंधन ने अपने हाथ में ले लिया है। वहीं, डीएवी में करीब तीन वर्ष पहले समूह ‘ग’ के पदों पर भर्ती हुई थी। इसमें भी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच बैठा दी है। दो-दो जांच से आजकल कॉलेज परिसर में माहौल गर्म है।
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ऐसे-ऐसे आरोप
1. डीएवी कॉलेज में मेरिट से दाखिलों का नियम बनने के बावजूद मेरिट में बड़े खेल सामने आए हैं। पहले स्थान पर आने वाले छात्रों को कंप्यूटर से गड़बड़ी कर दूसरे विषयों में एंट्री दे दी गई। नीचे से नए छात्र उस मेरिट में घुसा दिए गए। दूसरे विषयों की मेरिट में जाने वाले छात्र मायूस होकर लौट गए। इस सेटिंग-गेटिंग में कॉलेज के कई कर्मियों की मिलीभगत की ओर भी इशारा किया गया है।
2. डीएवी में छात्रवृत्ति बांटने के नाम पर खेल आम है। यहां के कई कर्मचारी लाखों रुपये छात्रवृत्ति के डकार चुके हैं। छात्रवृत्ति घोटाले के ऐसे मामलों में पुलिस की जांच भी चल रही है।
3. कॉलेज में न तो छात्रों के बैठने की व्यवस्था है और न ही इन्फ्रास्ट्रक्चर। 36 हजार से ज्यादा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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यूजीसी का पत्र मिला था। पत्र और पूरी जानकारी कॉलेज प्रबंधन को भेज दी गई है। कई साल पहले हुई जांच पर प्रबंधन पहले ही कार्रवाई कर रहा है। लिहाजा, अब यूजीसी को पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन ही जवाब भेजने की तैयारी कर रहा है। उत्तराखंड सरकार की जांच में कॉलेज प्रशासन अपना पक्ष तथ्यों के साथ पेश कर चुका है।
-डॉ.देवेंद्र भसीन, प्राचार्य, डीएवी पीजी कॉलेज