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रेंज अधिकारी के साथ भेदभाव का आरोप, चार्ज देने का आदेश
Updated Sat, 20 Jan 2018 01:56 AM IST
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ब्यूरो /अमर उजाला/देहरादून।
उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग में पेश होना जहां एक वन रेंज अधिकारी को भारी पड़ा, वहीं दूसरे को आयोग से न्याय मिला है। अनुसूचित जाति आयोग ने रेंज का चार्ज न देकर भेदभाव का आरोप लगाने वाले रेंज अधिकारी को सात दिन के भीतर रेंज का चार्ज देने की संस्तुति की है।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति का अधिकार सुरक्षित रखते हुए शासकीय सेवा में उनको समुचित प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराया जाए। आयोग ने रेंज अधिकारी के साथ भेदभाव की बात मानी है।
टिहरी वन प्रभाग के वन क्षेत्राधिकारी ओम प्रकाश ने 24 जुलाई 2017 को उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि 21 दिसंबर 2016 को जारी शासन ने आदेश जारी कर उनकी नरेंद्रनगर वन प्रभाग मुनिकीरेती में वन क्षेत्राधिकारी के पद पर तैनाती की थी, लेकिन यह कहते हुए कि यहां पहले से किसी अन्य को तैनाती दी गई है उन्हें चार्ज नहीं दिया गया। जबकि इसी शासनादेश पर नौ अन्य सामान्य जाति के कार्मिकों को वन क्षेत्राधिकारी के पद पर कार्यभार दिया गया। इनमें से पांच वन क्षेत्राधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस तरह अनुसूचित जाति के वन क्षेत्राधिकारी से भेदभाव किया गया। वन संरक्षक भागीरथी वृत्त मुनिकीरेती के आदेश के बावजूद उन्हें प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी वन प्रभाग की ओर से किसी भी क्षेत्रीय रेंज का प्रभार नहीं दिया गया। आयोग के अध्यक्ष हरपाल सिंह साथी ने कहा कि ओम प्रकाश को रेंज का चार्ज देते हुए देते हुए आदेश का पालन कर इससे उन्हें अवगत कराया जाए।
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उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग में पेश होना जहां एक वन रेंज अधिकारी को भारी पड़ा, वहीं दूसरे को आयोग से न्याय मिला है। अनुसूचित जाति आयोग ने रेंज का चार्ज न देकर भेदभाव का आरोप लगाने वाले रेंज अधिकारी को सात दिन के भीतर रेंज का चार्ज देने की संस्तुति की है।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति का अधिकार सुरक्षित रखते हुए शासकीय सेवा में उनको समुचित प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराया जाए। आयोग ने रेंज अधिकारी के साथ भेदभाव की बात मानी है।
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टिहरी वन प्रभाग के वन क्षेत्राधिकारी ओम प्रकाश ने 24 जुलाई 2017 को उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि 21 दिसंबर 2016 को जारी शासन ने आदेश जारी कर उनकी नरेंद्रनगर वन प्रभाग मुनिकीरेती में वन क्षेत्राधिकारी के पद पर तैनाती की थी, लेकिन यह कहते हुए कि यहां पहले से किसी अन्य को तैनाती दी गई है उन्हें चार्ज नहीं दिया गया। जबकि इसी शासनादेश पर नौ अन्य सामान्य जाति के कार्मिकों को वन क्षेत्राधिकारी के पद पर कार्यभार दिया गया। इनमें से पांच वन क्षेत्राधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस तरह अनुसूचित जाति के वन क्षेत्राधिकारी से भेदभाव किया गया। वन संरक्षक भागीरथी वृत्त मुनिकीरेती के आदेश के बावजूद उन्हें प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी वन प्रभाग की ओर से किसी भी क्षेत्रीय रेंज का प्रभार नहीं दिया गया। आयोग के अध्यक्ष हरपाल सिंह साथी ने कहा कि ओम प्रकाश को रेंज का चार्ज देते हुए देते हुए आदेश का पालन कर इससे उन्हें अवगत कराया जाए।
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