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नए वर्ष पर सुंदरकांड पाठ का किया गया आयोजन
Updated Tue, 02 Jan 2018 02:09 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
डाकरा स्थित प्राचीन श्री नागेश्वर महादेव मंदिर में चल रही रामकथा नववर्ष के शुभ अवसर पर संपन्न हो गई। कथा वाचक बेणी माधव ने सोमवार को अंतिम दिन श्रीराम कथा के मध्यम से भगवान श्रीराम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। रामकथा के मध्यम से उन्होंने भक्तों में गो सेवा और मानव सेवा के प्रति जागृति लाने का भी प्रयास किया।
सुंदर कांड के साथ ही कथा वाचक ने भगवान श्रीराम के हाथों रावण वध और प्रभु श्रीराम के अयोध्या के राज सिंहासन पर आरूढ़ होने का सुंदर वर्णन किया। इस दौरान महंत विश्वनाथ योगी ने कहा कि सुंदर कांड रामचरित मानस का सुंदर भाग है। आज समाज में सुंदर कांड के पाठ का प्रचलन है। लिहाजा किसी ग्रंथ के विशेष भाग के पठन को परंपरा बनाने का मतलब है कि हम उस भाग को बार-बार पढ़ें और अपने आचरण में उतार लें। ग्रंथों का पूरा लाभ लेने के लिए उन्हें जीवन में उतारना आवश्यक है। कथा में वर्णित रामराज्य के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि रामराज्य एक आदर्श राज्य है। रामराज्य में कहीं चोरी, भ्रष्टाचार, झूठ और घृणा नहीं, बल्कि चारों तरफ प्रेम भाईचारा, सौहार्द और सद्भावना नजर आती है। पाठ के अंत में भंडारे का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर अनिल, आचार्य विनय नाथ, संगीता, सीता देवी, पूनम, उमा थापा, कल्याणी उपाध्याय, शास्त्री शांति प्रसाद, विवेक अग्रवाल, श्याम, पूजा, पूनम, देवेंद्र, नागेश, निर्मला आदि उपस्थित रहे।
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डाकरा स्थित प्राचीन श्री नागेश्वर महादेव मंदिर में चल रही रामकथा नववर्ष के शुभ अवसर पर संपन्न हो गई। कथा वाचक बेणी माधव ने सोमवार को अंतिम दिन श्रीराम कथा के मध्यम से भगवान श्रीराम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। रामकथा के मध्यम से उन्होंने भक्तों में गो सेवा और मानव सेवा के प्रति जागृति लाने का भी प्रयास किया।
सुंदर कांड के साथ ही कथा वाचक ने भगवान श्रीराम के हाथों रावण वध और प्रभु श्रीराम के अयोध्या के राज सिंहासन पर आरूढ़ होने का सुंदर वर्णन किया। इस दौरान महंत विश्वनाथ योगी ने कहा कि सुंदर कांड रामचरित मानस का सुंदर भाग है। आज समाज में सुंदर कांड के पाठ का प्रचलन है। लिहाजा किसी ग्रंथ के विशेष भाग के पठन को परंपरा बनाने का मतलब है कि हम उस भाग को बार-बार पढ़ें और अपने आचरण में उतार लें। ग्रंथों का पूरा लाभ लेने के लिए उन्हें जीवन में उतारना आवश्यक है। कथा में वर्णित रामराज्य के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि रामराज्य एक आदर्श राज्य है। रामराज्य में कहीं चोरी, भ्रष्टाचार, झूठ और घृणा नहीं, बल्कि चारों तरफ प्रेम भाईचारा, सौहार्द और सद्भावना नजर आती है। पाठ के अंत में भंडारे का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर अनिल, आचार्य विनय नाथ, संगीता, सीता देवी, पूनम, उमा थापा, कल्याणी उपाध्याय, शास्त्री शांति प्रसाद, विवेक अग्रवाल, श्याम, पूजा, पूनम, देवेंद्र, नागेश, निर्मला आदि उपस्थित रहे।
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