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खट्टे मीठे अनुभवों का संकलन है ‘अफ्रीका हाउस’ : डबराल
Updated Mon, 24 Sep 2018 02:08 AM IST
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खट्टे मीठे अनुभवों का संकलन है ‘अफ्रीका हाउस’ : डबराल
कवयित्री डॉली डबराल की लिखी पुस्तक ‘अफ्रीका हाउस’ का लोकार्पण
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। यमुना कॉलोनी स्थित ऑफिसर्स क्लब में रविवार को कवयित्री डॉली डबराल की लिखी संस्मरणात्मक पुस्तक ‘अफ्रीका हाउस’ का लोकार्पण मुख्य अतिथि कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बीके जोशी ने किया। इस अवसर उन्होंने पुस्तक की प्रासंगिकता पर चर्चा की और पुस्तक को प्रेरणापरक बताया। इस दौरान पुस्तक की लेखिका कवयित्री डॉली डबराल ने कुछ संस्मरण भी साझा किए।
कवयित्री डबराल ने कहा कि पुस्तक की अधिकतर कहानियां उनके निवास ‘अफ्रीका हाउस’ में घटित हुई हैं। इस पुस्तक के जरिए अपने जीवन के खट्टे मीठे अनुभवों को पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश है। कहानीकार सुभाष पंत ने कहा कि कहानी झूठ बोलकर सच कहने की कला है। जबकि संस्मरण सच बोलकर सच कहने की कला है। साहित्यकार गुरुदीप खुराना ने कहा कि संस्मरण को सही अभिव्यक्ति देकर ईमानदारी से प्रस्तुत करना साहस का काम है। इस अवसर पर डॉ. रविंद्र मिश्र, जितेंद्र सिन्हा, संध्या जोशी, पूनम जोशी को सम्मानित किया गया। इस मौके पर विनोद कुमार डबराल, एसएस कोठियाल, सावित्री काला, भगवती गुप्ता, सविता कपूर, कमला पंत, प्रेरणा गोयल, रुचि करोरिया, प्रीति सक्सेना, बेनू पांडे, ऊषा थपलियाल, असीम शुक्ल, जितेंद्र ठाकुर, रामविनय सिंह, बसंती मठपाल, डॉ. विद्या सिंह आदि मौजूद रहे।
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कवयित्री डॉली डबराल की लिखी पुस्तक ‘अफ्रीका हाउस’ का लोकार्पण
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। यमुना कॉलोनी स्थित ऑफिसर्स क्लब में रविवार को कवयित्री डॉली डबराल की लिखी संस्मरणात्मक पुस्तक ‘अफ्रीका हाउस’ का लोकार्पण मुख्य अतिथि कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बीके जोशी ने किया। इस अवसर उन्होंने पुस्तक की प्रासंगिकता पर चर्चा की और पुस्तक को प्रेरणापरक बताया। इस दौरान पुस्तक की लेखिका कवयित्री डॉली डबराल ने कुछ संस्मरण भी साझा किए।
कवयित्री डबराल ने कहा कि पुस्तक की अधिकतर कहानियां उनके निवास ‘अफ्रीका हाउस’ में घटित हुई हैं। इस पुस्तक के जरिए अपने जीवन के खट्टे मीठे अनुभवों को पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश है। कहानीकार सुभाष पंत ने कहा कि कहानी झूठ बोलकर सच कहने की कला है। जबकि संस्मरण सच बोलकर सच कहने की कला है। साहित्यकार गुरुदीप खुराना ने कहा कि संस्मरण को सही अभिव्यक्ति देकर ईमानदारी से प्रस्तुत करना साहस का काम है। इस अवसर पर डॉ. रविंद्र मिश्र, जितेंद्र सिन्हा, संध्या जोशी, पूनम जोशी को सम्मानित किया गया। इस मौके पर विनोद कुमार डबराल, एसएस कोठियाल, सावित्री काला, भगवती गुप्ता, सविता कपूर, कमला पंत, प्रेरणा गोयल, रुचि करोरिया, प्रीति सक्सेना, बेनू पांडे, ऊषा थपलियाल, असीम शुक्ल, जितेंद्र ठाकुर, रामविनय सिंह, बसंती मठपाल, डॉ. विद्या सिंह आदि मौजूद रहे।
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