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बाबा बमराड़ा में झलकता था पहाड़ का दर्द
Updated Thu, 22 Feb 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
गैरसैंण राजधानी अभियान की ओर से प्रेस क्लब में उत्तराखंड राज्य आंदोलन की नींव रखने वालों में शामिल बाबा बमराड़ा को श्रद्धांजलि दी गई। अभियान के वरिष्ठ सदस्य रघुवीर सिंह बिष्ट ने बाबा के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनमें पहाड़ का दर्द झलकता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन राज्य आंदोलन और गैरसैंण स्थायी राजधानी के लिए संघर्ष करते हुए समर्पित कर दिया।
उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी की अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे अधिक दुर्भाग्य की बात क्या होगी कि सूचना से जुड़े एक बड़े सरकारी विभाग की ओर से बाबा के निधन के 20 घंटे बाद आंदोलनकारियों को फोन कर पूछा जाता है कि क्या वाकई बाबा का निधन हो चुका है। राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने कहा कि बाबा के नाम पर किसी सड़क या भवन का नामकरण किया जाए। पौड़ी से आए पूर्व पुलिस क्षेत्राधिकारी डीजी थपलियाल ने कहा कि वे बाबा बमराड़ा से जब भी मिले उनमें पहाड़ की विभिन्न समस्याओं को लेकर चिंता झलकी। वे सबसे अधिक चिंतित रोजगार की तलाश में पहाड़ से हो रहे पलायन को लेकर थे। बैंक कर्मचारी नेता जगमोहन मेहंदीरत्ता ने कहा कि बमराड़ा के बताए मार्ग पर चलना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्रद्धांजलि देने वालों में लक्ष्मी प्रसाद थपलियाल, मोहन भुलानी, हेमा देवराड़ी, राम लाल खंडूरी, वीएस रावत, प्रकाश थपलियाल, हरी किशन किमोठी, भगवती प्रसाद मैंदोली, पुष्कर नेगी, मदन भंडारी, गोपाल गुसांई, देवेंद्र नेगी, सूरज भट्ट आदि मौजूद रहे।
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श्रद्धांजलि सभा पर उठाए सवाल
प्रेस क्लब में बाबा बमराड़ा को श्रद्धांजलि दिए जाने के दौरान वक्ताओं में शामिल स्वामी दर्शन भारती ने कहा कि बाबा के रूप में पहाड़ वादी व्यक्ति एवं पहाड़ की आवाज को खो दिया गया है। अंतिम समय में जिस तरह से किसी ने उनकी सुध नहीं ली इससे इस तरह की श्रद्धांजलि सभा का कोई औचित्य नहीं है।
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गैरसैंण राजधानी अभियान की ओर से प्रेस क्लब में उत्तराखंड राज्य आंदोलन की नींव रखने वालों में शामिल बाबा बमराड़ा को श्रद्धांजलि दी गई। अभियान के वरिष्ठ सदस्य रघुवीर सिंह बिष्ट ने बाबा के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनमें पहाड़ का दर्द झलकता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन राज्य आंदोलन और गैरसैंण स्थायी राजधानी के लिए संघर्ष करते हुए समर्पित कर दिया।
उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी की अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे अधिक दुर्भाग्य की बात क्या होगी कि सूचना से जुड़े एक बड़े सरकारी विभाग की ओर से बाबा के निधन के 20 घंटे बाद आंदोलनकारियों को फोन कर पूछा जाता है कि क्या वाकई बाबा का निधन हो चुका है। राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने कहा कि बाबा के नाम पर किसी सड़क या भवन का नामकरण किया जाए। पौड़ी से आए पूर्व पुलिस क्षेत्राधिकारी डीजी थपलियाल ने कहा कि वे बाबा बमराड़ा से जब भी मिले उनमें पहाड़ की विभिन्न समस्याओं को लेकर चिंता झलकी। वे सबसे अधिक चिंतित रोजगार की तलाश में पहाड़ से हो रहे पलायन को लेकर थे। बैंक कर्मचारी नेता जगमोहन मेहंदीरत्ता ने कहा कि बमराड़ा के बताए मार्ग पर चलना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्रद्धांजलि देने वालों में लक्ष्मी प्रसाद थपलियाल, मोहन भुलानी, हेमा देवराड़ी, राम लाल खंडूरी, वीएस रावत, प्रकाश थपलियाल, हरी किशन किमोठी, भगवती प्रसाद मैंदोली, पुष्कर नेगी, मदन भंडारी, गोपाल गुसांई, देवेंद्र नेगी, सूरज भट्ट आदि मौजूद रहे।
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श्रद्धांजलि सभा पर उठाए सवाल
प्रेस क्लब में बाबा बमराड़ा को श्रद्धांजलि दिए जाने के दौरान वक्ताओं में शामिल स्वामी दर्शन भारती ने कहा कि बाबा के रूप में पहाड़ वादी व्यक्ति एवं पहाड़ की आवाज को खो दिया गया है। अंतिम समय में जिस तरह से किसी ने उनकी सुध नहीं ली इससे इस तरह की श्रद्धांजलि सभा का कोई औचित्य नहीं है।
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