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संसाधनों को बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं
Updated Fri, 27 Apr 2018 01:32 AM IST
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संसाधनों को बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
जल, जंगल, जमीन और हवा जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार और सरकारी विभागों की नहीं है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को सामूहिक भागेदारी निभानी होगी। शुक्लापुर में हेस्को और बीआरएनएस की ओर से आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने यह विचार व्यक्त किए।
‘कंट्रोल फारेस्ट फायर : एन एक्सक्लूसिव एंड इंटीग्रेटेड स्टेप’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि जंगलों की आग स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना नहीं बुझाई जा सकती। आग को लगने से रोकने या कम करने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे।
मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक जयराज ने कहा कि वनाग्नि की ज्यादातर घटनाएं मानव जनित होती हैं। उन्होंने कहा कि विभाग लिटर का उपयोग रोजगार के रूप में करने वाले उद्यमियों को प्रोत्साहन करेगा।
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बार्क के पूर्व एसोसिएट निदेशक डॉ. बीएस तोमर ने कहा कि किसी अन्य व्यक्ति के बजाय यदि स्थानीय लोगों को जंगलों की सुरक्षा और आग बचाने की जिम्मेदारी दी जाए तो ज्यादा बेहतर रहेगा।
ईश्वर जोशी ने कहा कि सेंक्चुरी क्षेत्र में ग्रामीणों को सूख कर गिरे पेड़ों को उठाने के लिए भी सुविधा शुल्क देना पड़ता है। लोगों को जंगलों से जोड़ा जाए तो कई समस्याओं का आसानी से निस्तारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों के जंगलों से दूर होने के कारण पशुपालन में खासी कमी आई है।
कार्यशाला में एफआरआई के वैज्ञानिक डा. ओमवीर सिंह, यूसर्क के निदेशक डा. दुर्गेश पंत, डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट के फॉरेस्ट्री के विभागाध्यक्ष प्रो. सैस विश्वास, जीईएचयू के डा. कमलकांत जोशी, वाडिया संस्थान के डा. संतोष के राय ने भी विचार व्यक्त किए। आयोजन में डॉ. राकेश कुमार, डॉ. सुभाष नौटियाल, डॉ. हिमानी पुरोहित, डॉ. दीप्ति पांडे. विनोद खाती, डॉ. लता सती, पंकज कुमार और प्रशांत शर्मा समेत अन्य विशेषज्ञ, शोधार्थी व छात्र मौजूद रहे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
जल, जंगल, जमीन और हवा जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार और सरकारी विभागों की नहीं है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को सामूहिक भागेदारी निभानी होगी। शुक्लापुर में हेस्को और बीआरएनएस की ओर से आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने यह विचार व्यक्त किए।
‘कंट्रोल फारेस्ट फायर : एन एक्सक्लूसिव एंड इंटीग्रेटेड स्टेप’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि जंगलों की आग स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना नहीं बुझाई जा सकती। आग को लगने से रोकने या कम करने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे।
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मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक जयराज ने कहा कि वनाग्नि की ज्यादातर घटनाएं मानव जनित होती हैं। उन्होंने कहा कि विभाग लिटर का उपयोग रोजगार के रूप में करने वाले उद्यमियों को प्रोत्साहन करेगा।
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बार्क के पूर्व एसोसिएट निदेशक डॉ. बीएस तोमर ने कहा कि किसी अन्य व्यक्ति के बजाय यदि स्थानीय लोगों को जंगलों की सुरक्षा और आग बचाने की जिम्मेदारी दी जाए तो ज्यादा बेहतर रहेगा।
ईश्वर जोशी ने कहा कि सेंक्चुरी क्षेत्र में ग्रामीणों को सूख कर गिरे पेड़ों को उठाने के लिए भी सुविधा शुल्क देना पड़ता है। लोगों को जंगलों से जोड़ा जाए तो कई समस्याओं का आसानी से निस्तारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों के जंगलों से दूर होने के कारण पशुपालन में खासी कमी आई है।
कार्यशाला में एफआरआई के वैज्ञानिक डा. ओमवीर सिंह, यूसर्क के निदेशक डा. दुर्गेश पंत, डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट के फॉरेस्ट्री के विभागाध्यक्ष प्रो. सैस विश्वास, जीईएचयू के डा. कमलकांत जोशी, वाडिया संस्थान के डा. संतोष के राय ने भी विचार व्यक्त किए। आयोजन में डॉ. राकेश कुमार, डॉ. सुभाष नौटियाल, डॉ. हिमानी पुरोहित, डॉ. दीप्ति पांडे. विनोद खाती, डॉ. लता सती, पंकज कुमार और प्रशांत शर्मा समेत अन्य विशेषज्ञ, शोधार्थी व छात्र मौजूद रहे।