{"_id":"5bc647a5bdec2269830265e5","slug":"171539721125-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वन विभाग ने मांगे 460 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वन विभाग ने मांगे 460 करोड़
Updated Wed, 17 Oct 2018 01:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वन विभाग ने मांगे 460 करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के लिए 63.422 हेक्टेयर जमीन देने की एवज में वन विभाग ने निर्माणदायी कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड से 460.44 करोड़ रुपये की मांग रख दी है। इस पर रेल विकास निगम ने मांगी गई रकम को काफी बताते हुए सरकार व वन विभाग के अफसरोें से इस पर नए सिरे से विचार करने का अनुरोध किया है।
उल्लेखनीय है कि रेलवे की ओर से ऋषिकेश से लेकर कर्णप्रयाग के बीच 125 किमी रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। इस रेलवे लाइन के पूरा होने से चारधाम यात्रा के तीर्थयात्रियों को श्री बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम जाने में सहूलियतें होगी। इसके अलावा इस रेल परियोजना का सामरिक महत्व भी है। परियोजना पूरी होने के बाद सेना व रसद को कम समय में चीन की सीमा पर पहुंचाया जा सकेगा। इस परियोजना को साल 2024 तक पूरा किया जाना है।
परियोजना को पूरा करने के लिए जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। जिसके तहत वन विभाग की ओर से भी 63.422 हेक्टेयर जमीन मुहैया कराई जानी है, लेकिन वन विभाग के अफसरोें ने रेल विकास निगम से जमीन मुहैया कराने के एवज में 460.44 करोड़ रुपये की मांग कर मुसीबत खड़ी कर दी है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के दौरान रेल विकास निगम के परियोजना निदेशक ने मुख्यमंत्री एवं वन विभाग के अफसरों से गुजारिश किया कि जमीन मुहैया कराने के एवज में जो धनराशि मांगी जा रही है, वह बहुत ज्यादा है। ऐसे में वन विभाग इस पर नए सिरे से विचार करे। दूसरी ओर प्रमुख वन संरक्षक जयराज का कहना है कि तमाम पहलुओें पर विचार करने और आंकलन करने के बाद यह धनराशि मांगी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के लिए 63.422 हेक्टेयर जमीन देने की एवज में वन विभाग ने निर्माणदायी कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड से 460.44 करोड़ रुपये की मांग रख दी है। इस पर रेल विकास निगम ने मांगी गई रकम को काफी बताते हुए सरकार व वन विभाग के अफसरोें से इस पर नए सिरे से विचार करने का अनुरोध किया है।
उल्लेखनीय है कि रेलवे की ओर से ऋषिकेश से लेकर कर्णप्रयाग के बीच 125 किमी रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। इस रेलवे लाइन के पूरा होने से चारधाम यात्रा के तीर्थयात्रियों को श्री बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम जाने में सहूलियतें होगी। इसके अलावा इस रेल परियोजना का सामरिक महत्व भी है। परियोजना पूरी होने के बाद सेना व रसद को कम समय में चीन की सीमा पर पहुंचाया जा सकेगा। इस परियोजना को साल 2024 तक पूरा किया जाना है।
विज्ञापन
परियोजना को पूरा करने के लिए जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। जिसके तहत वन विभाग की ओर से भी 63.422 हेक्टेयर जमीन मुहैया कराई जानी है, लेकिन वन विभाग के अफसरोें ने रेल विकास निगम से जमीन मुहैया कराने के एवज में 460.44 करोड़ रुपये की मांग कर मुसीबत खड़ी कर दी है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के दौरान रेल विकास निगम के परियोजना निदेशक ने मुख्यमंत्री एवं वन विभाग के अफसरों से गुजारिश किया कि जमीन मुहैया कराने के एवज में जो धनराशि मांगी जा रही है, वह बहुत ज्यादा है। ऐसे में वन विभाग इस पर नए सिरे से विचार करे। दूसरी ओर प्रमुख वन संरक्षक जयराज का कहना है कि तमाम पहलुओें पर विचार करने और आंकलन करने के बाद यह धनराशि मांगी गई है।
विज्ञापन