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बाजार मूल्य से 20 हजार रुपये अधिक ले रही कंपनी
Updated Thu, 19 Jul 2018 02:08 AM IST
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बाजार मूल्य से 20 हजार रुपये अधिक ले रही कंपनी
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राशन डीलरों ने सीएससी उपकरण उपलब्ध कराने वाली कंपनी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया है कि सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के लिए जो उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं कंपनी उनकी कीमत बाजार मूल्य से 20 हजार रुपये अधिक बता रही है। उन्होंने इस संबंध में जिला आपूर्ति अधिकारी से कार्रवाई की मांग की है।
बुधवार को उत्तराखंड सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में राशन डीलर जिला आपूर्ति कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जिला आपूर्ति अधिकारी विपिन कुमार से मिलकर सीएससी ई-गवर्मेंट सर्विस इंडिया लि. कंपनी प्रबंधन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिन मशीनों का मूल्य बाजार में 40 हजार रुपये है, उनको कंपनी प्रबंधन 60 हजार की बता रहा है। साथ ही एग्रीमेंट पत्र में चोरी व डैमेज होने की दशा में विक्रेता ही उपकरण की बाजारी मूल्य अदा करेगा। वहीं कंपनी की ओर से जिस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं वह अंग्रेजी में है। अधिकतर राशन डीलर अंग्रेजी नहीं जानते हैं, जिस कारण वे यह नहीं जान पा रहे हैं कि उस अनुबंध पत्र में क्या लिया है। इससे राशन डीलरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जो डीलर उपकरणों को चलाना नहीं जानते उन्हें इसका प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही उन्होंने 14 सूत्री मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राशन डीलरों ने सीएससी उपकरण उपलब्ध कराने वाली कंपनी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया है कि सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के लिए जो उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं कंपनी उनकी कीमत बाजार मूल्य से 20 हजार रुपये अधिक बता रही है। उन्होंने इस संबंध में जिला आपूर्ति अधिकारी से कार्रवाई की मांग की है।
बुधवार को उत्तराखंड सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में राशन डीलर जिला आपूर्ति कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जिला आपूर्ति अधिकारी विपिन कुमार से मिलकर सीएससी ई-गवर्मेंट सर्विस इंडिया लि. कंपनी प्रबंधन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिन मशीनों का मूल्य बाजार में 40 हजार रुपये है, उनको कंपनी प्रबंधन 60 हजार की बता रहा है। साथ ही एग्रीमेंट पत्र में चोरी व डैमेज होने की दशा में विक्रेता ही उपकरण की बाजारी मूल्य अदा करेगा। वहीं कंपनी की ओर से जिस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं वह अंग्रेजी में है। अधिकतर राशन डीलर अंग्रेजी नहीं जानते हैं, जिस कारण वे यह नहीं जान पा रहे हैं कि उस अनुबंध पत्र में क्या लिया है। इससे राशन डीलरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जो डीलर उपकरणों को चलाना नहीं जानते उन्हें इसका प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही उन्होंने 14 सूत्री मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
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