{"_id":"5b7b2a8142c792464b1c4ae7","slug":"161534798465-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मामले को खत्म करने का बनाया जा रहा दबाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मामले को खत्म करने का बनाया जा रहा दबाव
Updated Tue, 21 Aug 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मामले को खत्म करने का बनाया जा रहा दबाव
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। मॉडल स्कूल फॉर विजुअली हैंडीकैप्ड (एमएसवीएच) में केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि कैंटीन में काम करने वाले कर्मचारी भी छात्राओं पर तरह तरह की टिप्पणी करते थे। उनके कपड़ों को लेकर कमेेंट किए जाते और पहनाने को लेकर चरित्र पर सवाल उठाए जाते थे। छात्राओं का आरोप है कि अब मीडिया में मामला उजागर हुआ तो उन पर मामले को खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा है।
यह आरोप सोमवार को संस्थान परिसर में प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने लगाए हैं। छात्राओं ने कहा कि संस्थान में किसी लड़की के कपड़ों से ही उसके चरित्र का आंकलन किया जाता था। कैंटीन में मौजूद लोग देशभर में हुए रेप कांडों का भी उन्हें उदाहरण देते थे और उनके पहनावे पर कमेंट करते थे। छात्राओं ने कहा कि इतना बड़ा संस्थान होने के बावजूद भी हम यहां पर महफूज नहीं हैं। यहां कपड़ों से हमारे चरित्र का आंकलन किया जाता है। इसकी शिकायत चार सालों से डायरेक्टर मेम से की जा रही है, लेकिन मदद करने की बजाय हमारे अंदर खोट निकाला जाता है। बोला जाता है कि तुम ही छोटे कपड़े पहन कर लड़कों के सामने जाती हो। बिना चुननी के रूम से बाहर नहीं आना चाहिए। छात्राओं ने सवाल उठाया कि कोई लड़की चुननी पहन कर कैसे खेल सकेगी? उन्होंने कहा कि अब मामले को खत्म करने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन जब तक शिक्षक सुचित नारंग को जेल नहीं भेजा जाता और डायरेक्टर को पद से बर्खास्त नहीं किया जाता तब तक छात्रों की लड़ाई जारी रहेगी।
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। मॉडल स्कूल फॉर विजुअली हैंडीकैप्ड (एमएसवीएच) में केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि कैंटीन में काम करने वाले कर्मचारी भी छात्राओं पर तरह तरह की टिप्पणी करते थे। उनके कपड़ों को लेकर कमेेंट किए जाते और पहनाने को लेकर चरित्र पर सवाल उठाए जाते थे। छात्राओं का आरोप है कि अब मीडिया में मामला उजागर हुआ तो उन पर मामले को खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा है।
यह आरोप सोमवार को संस्थान परिसर में प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने लगाए हैं। छात्राओं ने कहा कि संस्थान में किसी लड़की के कपड़ों से ही उसके चरित्र का आंकलन किया जाता था। कैंटीन में मौजूद लोग देशभर में हुए रेप कांडों का भी उन्हें उदाहरण देते थे और उनके पहनावे पर कमेंट करते थे। छात्राओं ने कहा कि इतना बड़ा संस्थान होने के बावजूद भी हम यहां पर महफूज नहीं हैं। यहां कपड़ों से हमारे चरित्र का आंकलन किया जाता है। इसकी शिकायत चार सालों से डायरेक्टर मेम से की जा रही है, लेकिन मदद करने की बजाय हमारे अंदर खोट निकाला जाता है। बोला जाता है कि तुम ही छोटे कपड़े पहन कर लड़कों के सामने जाती हो। बिना चुननी के रूम से बाहर नहीं आना चाहिए। छात्राओं ने सवाल उठाया कि कोई लड़की चुननी पहन कर कैसे खेल सकेगी? उन्होंने कहा कि अब मामले को खत्म करने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन जब तक शिक्षक सुचित नारंग को जेल नहीं भेजा जाता और डायरेक्टर को पद से बर्खास्त नहीं किया जाता तब तक छात्रों की लड़ाई जारी रहेगी।
विज्ञापन