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लेफ्टिनेंट जनरल की समाधि सील की
Updated Sun, 12 Aug 2018 02:32 AM IST
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लेफ्टिनेंट जनरल की समाधि सील की
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। नगर निगम ने बिना नोटिस दिए अचानक पुलिस बल की मौजूदगी में लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह राठौड़ की समाधि स्थल को सील कर दिया। उनका सामान अंदर बंद करके और उनके शिष्य एवं वारिस नरेंद्र करण सिंह को पुलिस ने जबरन बाहर निकाल दिया। जिससे वह जरूरी कागजात भी बाहर नहीं निकल पाए। बताया गया है यह कार्रवाई नगर आयुक्त के आदेश पर की गई है।
यहां मसूरी डायवर्जन के पास शिव बाला योगी आश्रम है। जिसके पास ही उनकी समाधि है। इस समाधि स्थल की देख रेख करने वाले निपेंद्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार को अचानक भारी पुलिस बल के साथ नगर निगम की टीम पहुंची। पुलिस ने तुरंत उनके परिवार को जबरन बाहर निकाला और समाधि स्थल सील कर दिया। सील करने के बाद तहसील से एक लेटर जारी किया गया है कि इसकी देखरेख रुद्रा योगी करेंगे। सवाल उठाया है कि किस आधार पर यह अधिकार रुद्रा योगी को दिया गया?
बताया कि समाधि स्थल के बाहर उनका सेवक और उसके बच्चे वहां रुके तो शनिवार को बलपूर्वक उनको भी निकलवा दिया गया। उनकी गायों को चारा भी नहीं देने दिया गया। सोमवार को बच्चों का की परीक्षा है। उनका स्कूल का बैग सहित सभी सामान अंदर बंद कर दिया गया है।
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निपेंद्र सिंह ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद वे शिव बाला योगी जी महाराज के शिष्य हो गए थे। शिव बाला योगी जी महाराज को रानी पटना ने अपनी भूमि दान में दी थी। जो बाला योगी ने हनूत जी को दे दी थी, जिस पर भव्य भवन बनाया था। जब उन्हें पता चला यह जमीन नगर निगम में आती है तो उन्होंने तत्कालीन मेयर विनोद चमोली से मिलकर अपने नाम पर कराने की अपील की थी। उस बीच हनूत जी का निधन हो गया था। कुछ समय बाद शिव बाला योगी जी ने समाधि ले ली।
कौन थे लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह राठौड़
हनूत सिंह राठौड़ भारतीय सेना के भूतपूर्व लेफ्टिनेंट जनरल थे। 1971 के बंगलादेश मुक्ति संग्राम में उनकी भूमिका के लिए उन्हें महावीर चक्र प्रदान किया गया था।
उनका का जन्म 6 जुलाई 1933 को ले. कर्नल अर्जुन सिंह के घर हुआ था। वह देश के पूर्व विदेश एवं रक्षामंत्री जसवंत सिंह के चचेरे भाई थे। देहरादून के कर्नन ब्राउन स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 1949 में एनडीए में दाखिल हुए। यहां वह सैकेंड लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्त हुए। हनूत सिंह की अगुवाई में पूना हॉर्स रेजीमेंट ने वर्ष 1965 तथा 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान के 48 टैंक नष्ट कर दिए थे, जिसके बाद पाक सेना को हार स्वीकार करना पड़ी थी। स्वतंत्र भारत के 12 प्रमुख जनरलों में शामिल और भारतीय फौज में जनरल हनूत के नाम से विख्यात जनरल सिंह अंतिम समय में देहरादून में रह रहे थे। वे यहां ज्यादातर समय आध्यात्मिक साधना में लीन रहे। यहां 11 अप्रैल 2015 को उनका निधन हो गया था। वे आजीवन ब्रह्मचारी रहे थे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। नगर निगम ने बिना नोटिस दिए अचानक पुलिस बल की मौजूदगी में लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह राठौड़ की समाधि स्थल को सील कर दिया। उनका सामान अंदर बंद करके और उनके शिष्य एवं वारिस नरेंद्र करण सिंह को पुलिस ने जबरन बाहर निकाल दिया। जिससे वह जरूरी कागजात भी बाहर नहीं निकल पाए। बताया गया है यह कार्रवाई नगर आयुक्त के आदेश पर की गई है।
यहां मसूरी डायवर्जन के पास शिव बाला योगी आश्रम है। जिसके पास ही उनकी समाधि है। इस समाधि स्थल की देख रेख करने वाले निपेंद्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार को अचानक भारी पुलिस बल के साथ नगर निगम की टीम पहुंची। पुलिस ने तुरंत उनके परिवार को जबरन बाहर निकाला और समाधि स्थल सील कर दिया। सील करने के बाद तहसील से एक लेटर जारी किया गया है कि इसकी देखरेख रुद्रा योगी करेंगे। सवाल उठाया है कि किस आधार पर यह अधिकार रुद्रा योगी को दिया गया?
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बताया कि समाधि स्थल के बाहर उनका सेवक और उसके बच्चे वहां रुके तो शनिवार को बलपूर्वक उनको भी निकलवा दिया गया। उनकी गायों को चारा भी नहीं देने दिया गया। सोमवार को बच्चों का की परीक्षा है। उनका स्कूल का बैग सहित सभी सामान अंदर बंद कर दिया गया है।
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निपेंद्र सिंह ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद वे शिव बाला योगी जी महाराज के शिष्य हो गए थे। शिव बाला योगी जी महाराज को रानी पटना ने अपनी भूमि दान में दी थी। जो बाला योगी ने हनूत जी को दे दी थी, जिस पर भव्य भवन बनाया था। जब उन्हें पता चला यह जमीन नगर निगम में आती है तो उन्होंने तत्कालीन मेयर विनोद चमोली से मिलकर अपने नाम पर कराने की अपील की थी। उस बीच हनूत जी का निधन हो गया था। कुछ समय बाद शिव बाला योगी जी ने समाधि ले ली।
कौन थे लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह राठौड़
हनूत सिंह राठौड़ भारतीय सेना के भूतपूर्व लेफ्टिनेंट जनरल थे। 1971 के बंगलादेश मुक्ति संग्राम में उनकी भूमिका के लिए उन्हें महावीर चक्र प्रदान किया गया था।
उनका का जन्म 6 जुलाई 1933 को ले. कर्नल अर्जुन सिंह के घर हुआ था। वह देश के पूर्व विदेश एवं रक्षामंत्री जसवंत सिंह के चचेरे भाई थे। देहरादून के कर्नन ब्राउन स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 1949 में एनडीए में दाखिल हुए। यहां वह सैकेंड लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्त हुए। हनूत सिंह की अगुवाई में पूना हॉर्स रेजीमेंट ने वर्ष 1965 तथा 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान के 48 टैंक नष्ट कर दिए थे, जिसके बाद पाक सेना को हार स्वीकार करना पड़ी थी। स्वतंत्र भारत के 12 प्रमुख जनरलों में शामिल और भारतीय फौज में जनरल हनूत के नाम से विख्यात जनरल सिंह अंतिम समय में देहरादून में रह रहे थे। वे यहां ज्यादातर समय आध्यात्मिक साधना में लीन रहे। यहां 11 अप्रैल 2015 को उनका निधन हो गया था। वे आजीवन ब्रह्मचारी रहे थे।