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कुटीर उद्योग बन सकते हैं पलायन रोकने का जरिया
Updated Fri, 10 Aug 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राजभवन में चल रहे टॉपर्स कॉन्क्लेव के चौथे दिन श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत ने कहा कि पहाड़ से पलायन रोकने और युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में कुटीर उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अगर युवाओं को कुटीर उद्योग के लिए आसानी से ऋण उपलब्ध कराए तो निश्चित तौर पर इसके नतीजे अच्छे होंगे।
राजभवन में टॉपर्स के बीच डॉ. उदय सिंह रावत ‘उत्तराखंड में स्वरोजगार : अवसर एवं चुनौतियां’ विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से स्वरोजगार, पलायन को रोकने का भी मजबूत विकल्प है। युवाओं के लिए पर्यटन, कृषि और हॉर्टिकल्चर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट, औषधीय खेती, पशुपालन एवं फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में स्वरोजगार के अच्छे विकल्प हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ में मछली पालन, मौन पालन, बकरी पालन जैसे तमाम व्यवसायों में अगर सरकार मदद करे तो निश्चित तौर पर अच्छे परिणाम आ सकते हैं। युवाओं के लिए ऋण की उपलब्धता आसान होनी चाहिए। इस दौरान टॉपर्स ने उनसे कई सवाल भी पूछे। इसके पहले सत्र में हिमालयी पर्यावरणीय अध्ययन एवं संरक्षण संगठन (हेस्को) के संस्थापक पद्मश्री अनिल जोशी ने ‘इकोलॉजी इन्क्लूसिव इकोनॉमी’ विषय पर कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यदि इन संसाधनों को बचाना है तो प्रकृति को नष्ट करना बंद करना होगा।
उन्होंने लगातार समाप्त होते वनों और अन्य संसाधनों के विषय में बताते हुए कहा कि हमारे प्रत्येक प्राकृतिक संसाधन का अपना अलग महत्व है। इसमें वन हों या वन्य पशु, हमें इनके संरक्षण के विषय में नीतियां बनानी होंगी। उत्तराखंड के 625 मंदिरों में स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद स्थानीय लोगों से तैयार करा उपलब्ध कराया जा रहा है। हमें स्थानीय उत्पादों को ब्रांडिंग कर एक पहचान देने की आवश्यकता है। दूसरे सत्र में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट, कल्चर एंड हेरिटेज के लोकेश ओहरी ने कहा कि भारतीयता ही हमारी पहचान है। हमारी संस्कृति ही सांस्कृतिक विरासत है। हमें इसे संजोए रखने की आवश्यकता है। दून विवि की अदिति बिष्ट ने पर्यावरण और संस्कृति को बचाए रखने के लिए सभी छात्र-छात्राओं से अनुरोध किया। जीबी पंत विवि के सुदर्शन मिश्रा ने पहाड़ की संस्कृति को और बढ़ावा देने की बात कही। संस्कृत विवि के नितिन आर्य एवं अभिषेक आर्य ने संस्कृत में अपने विचार व्यक्त किए।
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राजभवन में चल रहे टॉपर्स कॉन्क्लेव के चौथे दिन श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत ने कहा कि पहाड़ से पलायन रोकने और युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में कुटीर उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अगर युवाओं को कुटीर उद्योग के लिए आसानी से ऋण उपलब्ध कराए तो निश्चित तौर पर इसके नतीजे अच्छे होंगे।
राजभवन में टॉपर्स के बीच डॉ. उदय सिंह रावत ‘उत्तराखंड में स्वरोजगार : अवसर एवं चुनौतियां’ विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से स्वरोजगार, पलायन को रोकने का भी मजबूत विकल्प है। युवाओं के लिए पर्यटन, कृषि और हॉर्टिकल्चर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट, औषधीय खेती, पशुपालन एवं फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में स्वरोजगार के अच्छे विकल्प हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ में मछली पालन, मौन पालन, बकरी पालन जैसे तमाम व्यवसायों में अगर सरकार मदद करे तो निश्चित तौर पर अच्छे परिणाम आ सकते हैं। युवाओं के लिए ऋण की उपलब्धता आसान होनी चाहिए। इस दौरान टॉपर्स ने उनसे कई सवाल भी पूछे। इसके पहले सत्र में हिमालयी पर्यावरणीय अध्ययन एवं संरक्षण संगठन (हेस्को) के संस्थापक पद्मश्री अनिल जोशी ने ‘इकोलॉजी इन्क्लूसिव इकोनॉमी’ विषय पर कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यदि इन संसाधनों को बचाना है तो प्रकृति को नष्ट करना बंद करना होगा।
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उन्होंने लगातार समाप्त होते वनों और अन्य संसाधनों के विषय में बताते हुए कहा कि हमारे प्रत्येक प्राकृतिक संसाधन का अपना अलग महत्व है। इसमें वन हों या वन्य पशु, हमें इनके संरक्षण के विषय में नीतियां बनानी होंगी। उत्तराखंड के 625 मंदिरों में स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद स्थानीय लोगों से तैयार करा उपलब्ध कराया जा रहा है। हमें स्थानीय उत्पादों को ब्रांडिंग कर एक पहचान देने की आवश्यकता है। दूसरे सत्र में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट, कल्चर एंड हेरिटेज के लोकेश ओहरी ने कहा कि भारतीयता ही हमारी पहचान है। हमारी संस्कृति ही सांस्कृतिक विरासत है। हमें इसे संजोए रखने की आवश्यकता है। दून विवि की अदिति बिष्ट ने पर्यावरण और संस्कृति को बचाए रखने के लिए सभी छात्र-छात्राओं से अनुरोध किया। जीबी पंत विवि के सुदर्शन मिश्रा ने पहाड़ की संस्कृति को और बढ़ावा देने की बात कही। संस्कृत विवि के नितिन आर्य एवं अभिषेक आर्य ने संस्कृत में अपने विचार व्यक्त किए।
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