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भक्ति संगीत से डॉ.वीरेंद्र को किया याद
Updated Tue, 27 Feb 2018 02:00 AM IST
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अमर/ब्यूरो उजाला, देहरादून
डीएवी पीजी कॉलेेज में सोमवार को स्व.डॉ. वीरेंद्र स्वरूप की पावन स्मृति पर स्वरांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। भक्ति संगीत और तबले की धुन पर छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मन मोह लिया।
सांस्कृतिक समिति की ओर से डीएवी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में स्व.डॉ. वीरेंद्र स्वरूप को याद करते हुए स्वरांजलि कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ.देवेंद्र भसीन ने किया। इसके बाद छात्रों ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। कॉलेज के संगीत विभाग के छात्र सौरव आहूजा ने तबलों से रेला ध्वनि निकालकर लोगों का मन मोह लिया। उन्होंने ट्रेन के चलने से लेकर उसके प्लेटफॉर्म पहुंचने तक की ध्वनि को तबले के जरिये निकाला। उन्होंने ग्रुप के साथ बिगड़ी मेरी बना दो, शेरोंवाली मैया भक्ति संगीत और पंकज पपनोई ने दिल की तपश के राग, अंकिता के ग्रुप ने कुमाऊंनी लोकगीत प्रस्तुत किए।
इस असर पर मुख्य अतिथि सांस्कृतिक समिति के प्रबंधक डॉ.बीबी रायजादा ने कहा कि संगीत ही एकमात्र सहारा है, जो लोगों में समानता ला सकता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को शास्त्रीय संगीतों की भूमिका बताते हुए समाज कल्याण के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। इस अवसर पर अंकिता, पंकज, राहुल, कंचन, हरप्रीत सिंह, सौरव अहूजा, प्रिया, मूर्ति, साक्षी, पूजा, अभिषेक, सार्थक, गुरविंदर को उनकी सुंदर प्रस्तुतियों के लिए पुरस्कृत किया गया।
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डीएवी पीजी कॉलेेज में सोमवार को स्व.डॉ. वीरेंद्र स्वरूप की पावन स्मृति पर स्वरांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। भक्ति संगीत और तबले की धुन पर छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मन मोह लिया।
सांस्कृतिक समिति की ओर से डीएवी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में स्व.डॉ. वीरेंद्र स्वरूप को याद करते हुए स्वरांजलि कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ.देवेंद्र भसीन ने किया। इसके बाद छात्रों ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। कॉलेज के संगीत विभाग के छात्र सौरव आहूजा ने तबलों से रेला ध्वनि निकालकर लोगों का मन मोह लिया। उन्होंने ट्रेन के चलने से लेकर उसके प्लेटफॉर्म पहुंचने तक की ध्वनि को तबले के जरिये निकाला। उन्होंने ग्रुप के साथ बिगड़ी मेरी बना दो, शेरोंवाली मैया भक्ति संगीत और पंकज पपनोई ने दिल की तपश के राग, अंकिता के ग्रुप ने कुमाऊंनी लोकगीत प्रस्तुत किए।
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इस असर पर मुख्य अतिथि सांस्कृतिक समिति के प्रबंधक डॉ.बीबी रायजादा ने कहा कि संगीत ही एकमात्र सहारा है, जो लोगों में समानता ला सकता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को शास्त्रीय संगीतों की भूमिका बताते हुए समाज कल्याण के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। इस अवसर पर अंकिता, पंकज, राहुल, कंचन, हरप्रीत सिंह, सौरव अहूजा, प्रिया, मूर्ति, साक्षी, पूजा, अभिषेक, सार्थक, गुरविंदर को उनकी सुंदर प्रस्तुतियों के लिए पुरस्कृत किया गया।
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