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मानव को मोक्ष का मार्ग बताते हैं वेद : हरपाल
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
आर्य समाज मंदिर डाकपत्थर में रविवार को साप्ताहिक हवन और प्रवचन का आयोजन किया गया। सहारनपुर से आए आचार्य हरपाल देव आर्य ने श्रद्धालुओं को बताया कि वेदों की वाणी ही ईश्वर की वाणी है, जो बिना भेदभाव के प्राणी मात्र के कल्याण का मार्ग बताती है।
उन्होंने कहा कि वेद मानव को मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं। वेदों में बताए गए मार्ग पर अग्रसर होने से मानव जीवन सरल एवं खुशहाल हो जाता है और जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश फैल जाता है। कहा कि वेद हमारी संस्कृति का मुख्य आधार हैं। इनमें ईश्वरीय वाणी को संकलित किया गया है। वेद मनुष्य को ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताते हैं। उन्होंने कहा कि अन्य सभी धार्मिक पुस्तकें मानव रचित हैं, जिससे इनमें स्वार्थ, भेदभाव एवं क्षेत्रवाद की संकीर्ण विचारधारा का प्रसार हो सकता है। इसके विपरीत वेद संपूर्ण मानव कल्याण का मार्ग बताते हैं। वेदों में समस्त समस्याओं के निवारण का एक मात्र साधन है।
उन्होंने कहा कि मानव कल्याण के लिए वैदिक ज्ञान का अधिक प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए और खुशहाल जीवन जीने के लिए प्रत्येक प्राणी मात्र से प्रेम करना चाहिए। उन्होंने दयानंद सरस्वती के विचारों को अपने जीवन में उतारने की सलाह श्रद्धालुओं को दी। इस दौरान पल्लवी आर्य, सतपाल सिंह, चंद्रप्रकाश, एपी सक्सेना, अनीता जुगरान, अरविंद शर्मा, पूजा, विजय कुमार, राखी, नितिन वर्मा, ऊषा चौहान आदि मौजूद रहे।
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आर्य समाज मंदिर डाकपत्थर में रविवार को साप्ताहिक हवन और प्रवचन का आयोजन किया गया। सहारनपुर से आए आचार्य हरपाल देव आर्य ने श्रद्धालुओं को बताया कि वेदों की वाणी ही ईश्वर की वाणी है, जो बिना भेदभाव के प्राणी मात्र के कल्याण का मार्ग बताती है।
उन्होंने कहा कि वेद मानव को मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं। वेदों में बताए गए मार्ग पर अग्रसर होने से मानव जीवन सरल एवं खुशहाल हो जाता है और जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश फैल जाता है। कहा कि वेद हमारी संस्कृति का मुख्य आधार हैं। इनमें ईश्वरीय वाणी को संकलित किया गया है। वेद मनुष्य को ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताते हैं। उन्होंने कहा कि अन्य सभी धार्मिक पुस्तकें मानव रचित हैं, जिससे इनमें स्वार्थ, भेदभाव एवं क्षेत्रवाद की संकीर्ण विचारधारा का प्रसार हो सकता है। इसके विपरीत वेद संपूर्ण मानव कल्याण का मार्ग बताते हैं। वेदों में समस्त समस्याओं के निवारण का एक मात्र साधन है।
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उन्होंने कहा कि मानव कल्याण के लिए वैदिक ज्ञान का अधिक प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए और खुशहाल जीवन जीने के लिए प्रत्येक प्राणी मात्र से प्रेम करना चाहिए। उन्होंने दयानंद सरस्वती के विचारों को अपने जीवन में उतारने की सलाह श्रद्धालुओं को दी। इस दौरान पल्लवी आर्य, सतपाल सिंह, चंद्रप्रकाश, एपी सक्सेना, अनीता जुगरान, अरविंद शर्मा, पूजा, विजय कुमार, राखी, नितिन वर्मा, ऊषा चौहान आदि मौजूद रहे।
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