फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   विलुप्त होने की कगार पर पहंची 1000 से अधिक नदियां, यूजेवीएनएल में पर्यावरण दिवस पर वैज्ञानक सेमिनार

विलुप्त होने की कगार पर पहंची 1000 से अधिक नदियां, यूजेवीएनएल में पर्यावरण दिवस पर वैज्ञानक सेमिनार

Tue, 04 Jun 2019 02:00 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jun 2019 02:00 AM IST
विज्ञापन
विलुप्त होने की कगार पर पहंची 1000 से अधिक नदियां, यूजेवीएनएल में पर्यावरण दिवस पर वैज्ञानक सेमिनार
विलुप्त होने के कगार पर 1000 से अधिक नदियां
विज्ञापन

ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। देश में यदि नदियों के जल का अंधाधुंध दोहन होता रहा तो 2030 तक पेयजल संकट और गंभीर हो जाएगा। आलम यह है कि देश में 1000 से अधिक नदियां विलुप्त होने के कगार पर हैं, लेकिन इनके पुनर्जीवीकरण को लेकर केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से ठोस पहल नहीं की जा रही है। यह बातें प्रख्यात पर्यावरणविद एवं पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कही। डॉ. जोशी उत्तराखंड जलविद्युत निगम लिमिटेड की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित वैज्ञानिक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. जोशी ने कहा कि प्रदूषण के चलते नदियों का पानी पीने के लायक नहीं रह गया है। पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता जताते हुए देश में हर व्यक्ति एक साल में 45 किग्रा प्लास्टिक कचरा पैदा कर रहा है।
विज्ञापन

सेमिनार में ‘पाणी राखो आंदोलन’ के प्रणेता सच्चिदानंद भारती ने कहा कि जिस तरह आंदोलन की शुरुआत में उन्होंने वर्ष 1987 में गांव-गांव जाकर लोगोें को जागरूक किया। ऐसे ही आंदोलन पूरे देश में चलाए जाने की जरूरत है। कहा कि वर्ष 1987 में पौड़ी जिले की उफरैखाल से सटी पहाड़ी में गंभीर जल संकट हो गया था। तब के हालातों को देखते हुए उन्होंने पाणी राखो आंदोलन की शुरुआत की। कहा कि वर्ष 1962 में सूखे पड़े गदेेरे को अपने अथक प्रयासों से वर्ष 1999 में पानी से लबालब कर दिया था। जिसे आज गॉडगंगा के नाम से जाना जाता है। कहा कि वर्तमान में जल संकट से निपटने के लिए संस्था की ओर से 30 हजार खाल बनाए गए हैं, जिन्हें जलतलैया नाम दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सेमिनार में मैती आंदोलन के संस्थापक कल्याण सिंह रावत ने कहा कि 1995 में उन्होंने मैती आंदोलन की शुरुआत की थी। जिसके तहत प्रत्येक विवाहित जोड़ा एक पौधा लगाता है और वधू ससुराल में धार पूजा के समय एक पौधा लगाती है। इस पुनीत आंदोलन के तहत अब तक पांच लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। इस आंदोलन से प्रभावित होकर कनाडा और इंडोनेशिया में इसकी शुरुआत की गई है।
सेमिनार में यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा ने कहा कि यूजेवीएनएल की परियोजनाओं के निर्माण व संचालन में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कहा कि यूजेवीएनएल की ओर से रिस्पना व बिंदाल नदी को पुनर्जीवित करने में भी हरसंभव मदद की जा रही है। समारोह के दौरान प्रबंध निदेशक ने मुख्य अतिथियों को शाल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। संचालन रेखा डंगवाल ने किया। सेमिनार के समापन पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया।

इस मौके पर पिटकुल प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल, निदेशक अविनाश चंद्र जोशी, निदेशक परिचालन पुरुषोत्तम सिंह महाप्रबंधक हरप्रसाद, महाप्रबंधक राजेंद्र सिंह, महाप्रबंधक मेग बहादुर थापा, राकेश चौहान, शैलेंद्र सिंह बिष्ट समेत बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed