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उच्च प्राथमिक विद्यालयों में होगा एक ही प्रधानाचार्य
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
सचिव शिक्षा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों को अलग से संचालित किए जाने संबंधी शासनादेश (वर्ष 2016) को निरस्त कर दिया है। ऐसे में राज्य के 1100 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अब एक ही प्रधानाचार्य की तैनाती होगी। इसके अलावा उच्चीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक संवर्ग के शिक्षकों द्वारा ही संचालित करने को कहा गया है। दूसरी ओर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने शासनादेश को शिक्षक विरोधी बताते हुए विरोध किया है।
जनवरी 2019 में सचिव विद्यालयी शिक्षा के अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्य शिक्षाधिकारियों ने मुद्दा उठाया था कि उच्चीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालयों में माध्यमिक शिक्षकों के साथ ही उच्च प्राथमिक शिक्षकों की तैनाती की गई है। इसके चलते शैक्षणिक गतिविधियों को संचालित करने में दिक्कतें आ रही हैं। एक ही विद्यालय में दो दो प्रधानाचार्य होने से भी समस्याएं आ रही हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शासन ने वर्ष 2016 में उच्चीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालयों को अलग से संचालित करने संबंधी आदेश निरस्त कर दिया है। शिक्षा सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की ओर से जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि उच्चीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन एक ही प्रधानाचार्य के अधीन होगा। प्रार्थना सभा व समय सारणी एक ही होगी। साथ ही उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन माध्यमिक संवर्ग के शिक्षकों द्वारा किया जाएगा।
वहीं शिक्षा सचिव की ओर से जारी आदेश कार प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने विरोध किया है। शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा व प्रदेश महामंत्री राजेंद्र बहुगुणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा सचिव की ओर से जारी किया गया आदेश सरासर गलत है। इस शासनादेश से जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों के पदोन्नति के अवसर समाप्त हो जाएंगे। इसके अलावा प्राथमिक से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी पदोन्नति प्रभावित होगी। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि चार जून को पदाधिकारियों की बैठक बुलायी गई है। इसमें प्रदेशभर के अध्यक्ष व महामंत्री भाग लेंगे।
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सचिव शिक्षा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों को अलग से संचालित किए जाने संबंधी शासनादेश (वर्ष 2016) को निरस्त कर दिया है। ऐसे में राज्य के 1100 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अब एक ही प्रधानाचार्य की तैनाती होगी। इसके अलावा उच्चीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक संवर्ग के शिक्षकों द्वारा ही संचालित करने को कहा गया है। दूसरी ओर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने शासनादेश को शिक्षक विरोधी बताते हुए विरोध किया है।
जनवरी 2019 में सचिव विद्यालयी शिक्षा के अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्य शिक्षाधिकारियों ने मुद्दा उठाया था कि उच्चीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालयों में माध्यमिक शिक्षकों के साथ ही उच्च प्राथमिक शिक्षकों की तैनाती की गई है। इसके चलते शैक्षणिक गतिविधियों को संचालित करने में दिक्कतें आ रही हैं। एक ही विद्यालय में दो दो प्रधानाचार्य होने से भी समस्याएं आ रही हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शासन ने वर्ष 2016 में उच्चीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालयों को अलग से संचालित करने संबंधी आदेश निरस्त कर दिया है। शिक्षा सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की ओर से जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि उच्चीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन एक ही प्रधानाचार्य के अधीन होगा। प्रार्थना सभा व समय सारणी एक ही होगी। साथ ही उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन माध्यमिक संवर्ग के शिक्षकों द्वारा किया जाएगा।
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वहीं शिक्षा सचिव की ओर से जारी आदेश कार प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने विरोध किया है। शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा व प्रदेश महामंत्री राजेंद्र बहुगुणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा सचिव की ओर से जारी किया गया आदेश सरासर गलत है। इस शासनादेश से जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों के पदोन्नति के अवसर समाप्त हो जाएंगे। इसके अलावा प्राथमिक से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी पदोन्नति प्रभावित होगी। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि चार जून को पदाधिकारियों की बैठक बुलायी गई है। इसमें प्रदेशभर के अध्यक्ष व महामंत्री भाग लेंगे।
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