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पुलिस की भूमिका पर बिफरी बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
टिहरी के नैनबाग इलाके में नौ साल की मासूम के साथ दुष्कर्म मामले में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा मासूम को लेबर रूम में रखने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रकरण में पुलिस की भूमिका की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखने की बात कही है। इसके अलावा प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए जिलाधिकारी टिहरी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की जाएगी।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी रविवार को दून अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल में मासूम को लेबर रूम में रखने पर कड़ी नाराजगी जताई और वार्ड में शिफ्ट कराया। उन्होंने अपनी मौजूदगी में मासूम की कई जांचें भी करवाईं।
इस दौरान पीड़िता के परिजनों ने आयोग अध्यक्ष को बताया कि उनकी मर्जी के बिना पुलिस मासूम को अदालत में 164 के बयान दर्ज कराने की बात कहकर साथ ले गई। पुलिस एक ही वाहन में मासूम और उसके परिजनों के साथ आरोपी को भी बिठाकर ले गई। ऐसे में आरोपी को देखकर मासूम डर गई और उसने 164 का बयान दर्ज कराने से इनकार कर दिया। इसके अलावा पुलिसकर्मी सादे कपड़ों की बजाय वर्दी में थे।
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आयोग अध्यक्ष ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पुलिस की भूमिका की जांच कराने की बात कही है। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा जाएगा। प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए जिलाधिकारी टिहरी की अध्यक्षता में समिति गठित कर जांच करायी जाएगी। इसके अलावा आयोग अध्यक्ष ने दून महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी को मासूम के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।
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टिहरी के नैनबाग इलाके में नौ साल की मासूम के साथ दुष्कर्म मामले में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा मासूम को लेबर रूम में रखने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रकरण में पुलिस की भूमिका की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखने की बात कही है। इसके अलावा प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए जिलाधिकारी टिहरी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की जाएगी।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी रविवार को दून अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल में मासूम को लेबर रूम में रखने पर कड़ी नाराजगी जताई और वार्ड में शिफ्ट कराया। उन्होंने अपनी मौजूदगी में मासूम की कई जांचें भी करवाईं।
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इस दौरान पीड़िता के परिजनों ने आयोग अध्यक्ष को बताया कि उनकी मर्जी के बिना पुलिस मासूम को अदालत में 164 के बयान दर्ज कराने की बात कहकर साथ ले गई। पुलिस एक ही वाहन में मासूम और उसके परिजनों के साथ आरोपी को भी बिठाकर ले गई। ऐसे में आरोपी को देखकर मासूम डर गई और उसने 164 का बयान दर्ज कराने से इनकार कर दिया। इसके अलावा पुलिसकर्मी सादे कपड़ों की बजाय वर्दी में थे।
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आयोग अध्यक्ष ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पुलिस की भूमिका की जांच कराने की बात कही है। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा जाएगा। प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए जिलाधिकारी टिहरी की अध्यक्षता में समिति गठित कर जांच करायी जाएगी। इसके अलावा आयोग अध्यक्ष ने दून महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी को मासूम के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।