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सरकार की उपेक्षा पर दिव्यांगों ने जताई नाराजगी
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उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
आकाश दिव्यांग सेवा समिति की ओर से आयोजित संगोष्ठी में दिव्यांगजनों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते नाराजगी जताई। सहसपुर में आयोजित संगोष्ठी में दिव्यांगजनों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने और 11 अप्रैल को मतदान करने का संकल्प लिया।
संगोष्ठी में पांच जरूरतमंद दिव्यांगों को समिति की ओर से सिलाई मशीन भी वितरित की गई। समिति के अध्यक्ष सुंदर थापा ने कहा कि दिव्यांगों को सरकारी नौकरी में चार प्रतिशत आरक्षण कागजों तक ही सीमित है। दिव्यांगों को सुविधा दिए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन आलम यह है कि सरकार ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग नौनिहालों के लिए रिसोर्स शिक्षक की भर्ती पर पिछले पांच साल से रोक लगा रखी है। कहा कि सेलाकुई लांघा रोड पर 300 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं, लेकिन किसी भी औद्योगिक इकाई में दिव्यांगजनों को रोजगार मुहैया नहीं कराया जा रहा है। बताया कि 64 प्रतिशत दिव्यांग बेरोजगार हैं। समिति के उपाध्यक्ष संकटेश्वर प्रसाद ने कहा कि दिव्यांगजनों से संबंधित योजनाएं धरातल पर आकार नहीं ले रही हैं। संगोष्ठी में रामपुर, सहसपुर, राजावाला, छरबा, बरोटीवाला, लक्खनवाला, जस्सोवाला, जीवनगढ़, अंबाड़ी, मेहूवाला के दिव्यांगजनों ने भाग लिया।
बैठक में दिव्यांगजनों के प्रति सरकार की उपेक्षा पर नाराजगी प्रकट करते हुए दिव्यांगों के लिए समुचित सुविधा व रोजगार के साधन मुहैया कराने, मासिक आर्थिक सहायता राशि पांच हजार करने, निजी सेक्टर में चार प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू करने, रोजगार के लिए आसान ऋण मुहैया कराने और दिव्यांग प्रमाण पत्र सभी सरकारी अस्पतालों में मुहैया कराने की मांग की गई। इस दौरान समिति के महासचिव अमित नेगी, अकरम सलमानी, निशारत अली, कमल राठौर, देवेंद्र रावत, मीर हसन, ओमप्रकाश, शोभा देवी, इमराना, सुरेश, इसरत आदि मौजूद रहे।
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आकाश दिव्यांग सेवा समिति की ओर से आयोजित संगोष्ठी में दिव्यांगजनों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते नाराजगी जताई। सहसपुर में आयोजित संगोष्ठी में दिव्यांगजनों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने और 11 अप्रैल को मतदान करने का संकल्प लिया।
संगोष्ठी में पांच जरूरतमंद दिव्यांगों को समिति की ओर से सिलाई मशीन भी वितरित की गई। समिति के अध्यक्ष सुंदर थापा ने कहा कि दिव्यांगों को सरकारी नौकरी में चार प्रतिशत आरक्षण कागजों तक ही सीमित है। दिव्यांगों को सुविधा दिए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन आलम यह है कि सरकार ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग नौनिहालों के लिए रिसोर्स शिक्षक की भर्ती पर पिछले पांच साल से रोक लगा रखी है। कहा कि सेलाकुई लांघा रोड पर 300 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं, लेकिन किसी भी औद्योगिक इकाई में दिव्यांगजनों को रोजगार मुहैया नहीं कराया जा रहा है। बताया कि 64 प्रतिशत दिव्यांग बेरोजगार हैं। समिति के उपाध्यक्ष संकटेश्वर प्रसाद ने कहा कि दिव्यांगजनों से संबंधित योजनाएं धरातल पर आकार नहीं ले रही हैं। संगोष्ठी में रामपुर, सहसपुर, राजावाला, छरबा, बरोटीवाला, लक्खनवाला, जस्सोवाला, जीवनगढ़, अंबाड़ी, मेहूवाला के दिव्यांगजनों ने भाग लिया।
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बैठक में दिव्यांगजनों के प्रति सरकार की उपेक्षा पर नाराजगी प्रकट करते हुए दिव्यांगों के लिए समुचित सुविधा व रोजगार के साधन मुहैया कराने, मासिक आर्थिक सहायता राशि पांच हजार करने, निजी सेक्टर में चार प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू करने, रोजगार के लिए आसान ऋण मुहैया कराने और दिव्यांग प्रमाण पत्र सभी सरकारी अस्पतालों में मुहैया कराने की मांग की गई। इस दौरान समिति के महासचिव अमित नेगी, अकरम सलमानी, निशारत अली, कमल राठौर, देवेंद्र रावत, मीर हसन, ओमप्रकाश, शोभा देवी, इमराना, सुरेश, इसरत आदि मौजूद रहे।
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