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छात्रों को दी विज्ञान के रहस्यों की जानकारी
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
वीर शहीद केसरी चंद्र राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में कम लागत पर कंप्यूटर आधारित वैज्ञानिक प्रयोग एवं प्लाज्मा के मूल सिद्धांतों, विशेषताओं एवं उसके प्रयोग पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन शनिवार को हुआ। कार्यशाला में छात्रों को विज्ञान के रहस्यों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला के अंतिम दिन बतौर मुख्य वक्ता शिरकत कर रहे उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के निदेशक प्रो. एमपीएस बिष्ट ने विज्ञान एवं वैज्ञानिक तकनीकों का अंतरिक्ष अनुसंधान से मिलने वाले लाभों को समझाया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में इंडियन प्लाजमा रिसर्च सेंटर अहमदाबाद के वैैज्ञानिक डॉ. एन सुब्रमण्यम ने प्लाज्मा की उत्पत्ति, खोज एवं भविष्य में उसकी संभावनाओं पर विस्तार से व्याख्यान प्रस्तुत किया। डॉ. रवि कुमार ने प्लाज्मा की उपयोगिता और जनसाधारण में उसकी उपादेयता को विस्तार से प्रस्तुत किया। एमएस कॉलेज सहारनपुर के प्रो. एके डिमरी ने भौतिक एवं अणु विज्ञान और उसके दर्शन पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित छात्रों से प्रश्न उत्तर कर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। डीएवी कॉलेज देहरादून प्रो. गुंजन पुरोहित ने भौतिक विज्ञान का जनमानस के सामान्य कार्य व्यवहार एवं सिद्धांतों के साथ विज्ञान को प्रस्तुत करते हुए सरल नियम प्रस्तुत किए।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. केएल बिष्ट ने कार्यशाला के समापन पर कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं महाविद्यालय में समय-समय पर आयोजित होनी चाहिए, जिससे कि शिक्षण गुणवत्ता एवं छात्र उद्देश्य परक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम हो सकें। कार्यशाला का संचालन भौतिक विज्ञान विभाग के डॉ. विनोद रावत ने किया। इस दौरान प्रो. आरआर असवाल, डॉ. वीरेंद्र जोशी, प्रो. आरपी बडोनी, डॉ. राखी डिमरी, डॉ. राजकुमारी, डॉ. दीप्ति बगवाड़ी, डॉ. आराधना भंडारी, डॉ. रुचि बहुखंडी, डॉ. विधि ढौंढियाल, डॉ. योगेश भट्ट, डॉ. पूजा, डॉ. सत्येंद्र, डॉ. अमित कुमार आदि मौजूद रहे।
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वीर शहीद केसरी चंद्र राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में कम लागत पर कंप्यूटर आधारित वैज्ञानिक प्रयोग एवं प्लाज्मा के मूल सिद्धांतों, विशेषताओं एवं उसके प्रयोग पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन शनिवार को हुआ। कार्यशाला में छात्रों को विज्ञान के रहस्यों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला के अंतिम दिन बतौर मुख्य वक्ता शिरकत कर रहे उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के निदेशक प्रो. एमपीएस बिष्ट ने विज्ञान एवं वैज्ञानिक तकनीकों का अंतरिक्ष अनुसंधान से मिलने वाले लाभों को समझाया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में इंडियन प्लाजमा रिसर्च सेंटर अहमदाबाद के वैैज्ञानिक डॉ. एन सुब्रमण्यम ने प्लाज्मा की उत्पत्ति, खोज एवं भविष्य में उसकी संभावनाओं पर विस्तार से व्याख्यान प्रस्तुत किया। डॉ. रवि कुमार ने प्लाज्मा की उपयोगिता और जनसाधारण में उसकी उपादेयता को विस्तार से प्रस्तुत किया। एमएस कॉलेज सहारनपुर के प्रो. एके डिमरी ने भौतिक एवं अणु विज्ञान और उसके दर्शन पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित छात्रों से प्रश्न उत्तर कर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। डीएवी कॉलेज देहरादून प्रो. गुंजन पुरोहित ने भौतिक विज्ञान का जनमानस के सामान्य कार्य व्यवहार एवं सिद्धांतों के साथ विज्ञान को प्रस्तुत करते हुए सरल नियम प्रस्तुत किए।
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महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. केएल बिष्ट ने कार्यशाला के समापन पर कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं महाविद्यालय में समय-समय पर आयोजित होनी चाहिए, जिससे कि शिक्षण गुणवत्ता एवं छात्र उद्देश्य परक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम हो सकें। कार्यशाला का संचालन भौतिक विज्ञान विभाग के डॉ. विनोद रावत ने किया। इस दौरान प्रो. आरआर असवाल, डॉ. वीरेंद्र जोशी, प्रो. आरपी बडोनी, डॉ. राखी डिमरी, डॉ. राजकुमारी, डॉ. दीप्ति बगवाड़ी, डॉ. आराधना भंडारी, डॉ. रुचि बहुखंडी, डॉ. विधि ढौंढियाल, डॉ. योगेश भट्ट, डॉ. पूजा, डॉ. सत्येंद्र, डॉ. अमित कुमार आदि मौजूद रहे।
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