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'आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण जरूरी'
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
ओकिनावा गोजु रियू कराटे डू इंडिया ने शनिवार को अनुनाद पब्लिक स्कूल चांदपुर में कराटे प्रतियोगिता का आयोजन किया। प्रतियोगिता में 50 छात्रों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के तहत मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया गया।
संस्थान के प्रशिक्षक विराफ वाचा ने कहा कि आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण जरूरी है। कहा कि आज के समय में बगैर हथियार के अपनी सुरक्षा करना मार्शल आर्ट है। स्कूली शिक्षा के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को शारीरिक शिक्षा का ज्ञान होना भी बहुत जरूरी है। प्रतियोगिता के तहत अवंतिका सकलानी, अंशिका आर्य, तनुजा ठाकुर ब्राउन बेल्ट में विजयी रहे। मुख्य प्रशिक्षक ने कहा कि कराटे सहित मार्शल आर्ट की अन्य विधाएं हमें सिर्फ शारीरिक रूप से ही मजबूत नहीं बनातीं बल्कि इससे व्यक्ति मानसिक रूप से भी परिपक्व होता है। कहा कि आज की जीवनशैली से बच्चों का संपूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है। ऐसे में कराटे जैसी पुरानी खेल पद्धति आत्मरक्षा के लिए तो काम आती ही है, इसके अलावा शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास में भी अहम भूमिका निभाती है। कराटे में आक्रामक और रक्षात्मक दोनों प्रकार की तकनीक सिखाई जाती है। इसमें पैर की ताकत, हाथों की जोरदार चाल के अभ्यास के साथ ही हृदय स्वस्थ और ऊपरी शरीर की शक्ति में वृद्धि होती है। इस दौरान विद्यालय की प्रधानाचार्या सुनीता रावत, प्रबंधक पवन डोगरा, राजेश गुलेरिया आदि मौजूद रहे।
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ओकिनावा गोजु रियू कराटे डू इंडिया ने शनिवार को अनुनाद पब्लिक स्कूल चांदपुर में कराटे प्रतियोगिता का आयोजन किया। प्रतियोगिता में 50 छात्रों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के तहत मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया गया।
संस्थान के प्रशिक्षक विराफ वाचा ने कहा कि आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण जरूरी है। कहा कि आज के समय में बगैर हथियार के अपनी सुरक्षा करना मार्शल आर्ट है। स्कूली शिक्षा के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को शारीरिक शिक्षा का ज्ञान होना भी बहुत जरूरी है। प्रतियोगिता के तहत अवंतिका सकलानी, अंशिका आर्य, तनुजा ठाकुर ब्राउन बेल्ट में विजयी रहे। मुख्य प्रशिक्षक ने कहा कि कराटे सहित मार्शल आर्ट की अन्य विधाएं हमें सिर्फ शारीरिक रूप से ही मजबूत नहीं बनातीं बल्कि इससे व्यक्ति मानसिक रूप से भी परिपक्व होता है। कहा कि आज की जीवनशैली से बच्चों का संपूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है। ऐसे में कराटे जैसी पुरानी खेल पद्धति आत्मरक्षा के लिए तो काम आती ही है, इसके अलावा शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास में भी अहम भूमिका निभाती है। कराटे में आक्रामक और रक्षात्मक दोनों प्रकार की तकनीक सिखाई जाती है। इसमें पैर की ताकत, हाथों की जोरदार चाल के अभ्यास के साथ ही हृदय स्वस्थ और ऊपरी शरीर की शक्ति में वृद्धि होती है। इस दौरान विद्यालय की प्रधानाचार्या सुनीता रावत, प्रबंधक पवन डोगरा, राजेश गुलेरिया आदि मौजूद रहे।
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