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वर्षा की एक एक बूंद बचा कर स्रोतों को करें पुर्नजीवित
Updated Wed, 28 Nov 2018 10:32 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के सीनेट हॉल में जल संसाधन प्रबंधन विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय गोष्ठी का शुभारंभ किया गया, जिसमें वर्षा की एक एक बूंद बचा कर स्रोतों को पुनर्जीवित करने की बात कही गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि उत्तराखंड में सिक्किम की तर्ज पर स्रोत विकास कार्यक्रम संचालित किया जाना आवश्यक है।
बुधवार को बिड़ला परिसर स्थित सीनेट सभागार में विश्व युवक केंद्र पर्वतीय विकास शोध केंद्र व डालियों का दगड्या की ओर से आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि पाणी राखों आंदोलन के प्रणेता सचिदानंद भारती ने कहा कि उत्तराखंड में सिक्किम की तर्ज पर धारा विकास कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पिछले 35 साल में करीब 40 फीसदी स्रोत सूख चुके हैं। भारती ने कहा कि वर्षा की एक एक बूंद को बचाकर स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. लक्ष्मी नारायण ने गांवों में तालाबों को पुनर्जीवित करने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान उन्होंने इब्राहिमपुर में तालाबों को पुनर्जीवित करने के अभियान के बारे में भी बताया। विश्व युवक केंद्र के राजीव निर्मल ने कहा कि जल जंगल जमीन के कार्यों पर जिस प्रकार सिक्किम एक ऑर्गेनिक स्टेट बन गया है। उसी प्रकार उत्तराखंड को भी आर्गेनिक स्टेट बनाना संस्था का उद्देश्य है। कार्यक्रम में गढ़वाल विवि के डीएसडब्ल्यू प्रो. पीएस राणा, पर्वतीय विकास शोध केंद्र के डा. अरविंद दरमोड़ा आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में प्रेमबल्लभ नैथानी, जनार्दन खुगशाल, मेहरबान सिंह, डा. अजय पाल नेगी आदि मौजूद थे।
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बुधवार को बिड़ला परिसर स्थित सीनेट सभागार में विश्व युवक केंद्र पर्वतीय विकास शोध केंद्र व डालियों का दगड्या की ओर से आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि पाणी राखों आंदोलन के प्रणेता सचिदानंद भारती ने कहा कि उत्तराखंड में सिक्किम की तर्ज पर धारा विकास कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पिछले 35 साल में करीब 40 फीसदी स्रोत सूख चुके हैं। भारती ने कहा कि वर्षा की एक एक बूंद को बचाकर स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. लक्ष्मी नारायण ने गांवों में तालाबों को पुनर्जीवित करने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान उन्होंने इब्राहिमपुर में तालाबों को पुनर्जीवित करने के अभियान के बारे में भी बताया। विश्व युवक केंद्र के राजीव निर्मल ने कहा कि जल जंगल जमीन के कार्यों पर जिस प्रकार सिक्किम एक ऑर्गेनिक स्टेट बन गया है। उसी प्रकार उत्तराखंड को भी आर्गेनिक स्टेट बनाना संस्था का उद्देश्य है। कार्यक्रम में गढ़वाल विवि के डीएसडब्ल्यू प्रो. पीएस राणा, पर्वतीय विकास शोध केंद्र के डा. अरविंद दरमोड़ा आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में प्रेमबल्लभ नैथानी, जनार्दन खुगशाल, मेहरबान सिंह, डा. अजय पाल नेगी आदि मौजूद थे।
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