{"_id":"5bf441b1bdec22342b7fab0c","slug":"15427343069-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्णप्रयाग में पहली बार खिला कमल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्णप्रयाग में पहली बार खिला कमल
Updated Tue, 20 Nov 2018 10:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कर्णप्रयाग। निकाय चुनावों में कर्णप्रयाग में चार दशक में पहली बार कमल खिला है। अब तक हुए चार निर्वाचनों में भाजपा को करारी हार झेलनी पड़ी थी, लेकिन इस बार भाजपा को जीत मिली है। वहीं कांग्रेस का गढ़ रहे गौचर में भी कमल को जीत मिली है। भले ही यहां भाजपा अल्प मार्जिन से जीती है। गौचर में कांग्रेस का महज एक सभासद जीता है।
विधानसभा और लोक सभा चुनाव में कर्णप्रयाग को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन निकाय चुनावों में यहां के मतदाताओं का रुझान निर्दलीयों की ओर अक्सर रहा है। इसका नतीजा यह था कि यहां भाजपा अब तक नहीं जीत पाई थी। वर्ष 1976 में नगर पंचायत गठित होने के बाद यहां स्व. डीके नैनवाल वर्ष 1979 में पहले मनोनीत अध्यक्ष बने। करीब 18 साल तक स्व. नैनवाल और प्रशासक रहने के बाद वर्ष 1997 में यहां पहला निर्वाचन हुआ, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार प्रकाश नवानी ने जीत दर्ज की। पांच साल के बाद कुछ समय के लिए यहां प्रशासक का कार्यकाल रहा। इसके बाद वर्ष 2003 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने बाजी मारी। इसके बाद लगातार 10 साल तक निर्दलीय ने राज किया। इस वर्ष यहां भाजपा ने महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष दमयंती रतूड़ी को तीसरी बार मैदान में उतारा और यहां कमल खिला। जबकि गौचर में लगातार डेढ़ दशक से कांग्रेस का गढ़ ध्वस्त करने में इस बार भाजपा ने सफलता हासिल की। हालांकि यहां कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी, लेकिन सभासद पदों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। सात सभासदों में एक मात्र प्रत्याशी अजय किशोर भंडारी कांग्रेस से जीते हैं।
कर्णप्रयाग नगर पालिका
वर्ष जीते दल
1997 श्रीप्रकाश नवानी निर्दलीय
2003 ललित नैनवाल कांग्रेस
2008 मनोरमा डिमरी निर्दलीय
2013 सुभाष गैरोला निर्दलीय
गौचर नगर पालिका
वर्ष जीते दल
1997 धूमी लाल भाजपा
2003 शिवदेई देवी कांग्रेस
2008 मुकेश नेगी कांग्रेस
2013 मुकेश नेगी कांग्रेस
विधानसभा और लोक सभा चुनाव में कर्णप्रयाग को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन निकाय चुनावों में यहां के मतदाताओं का रुझान निर्दलीयों की ओर अक्सर रहा है। इसका नतीजा यह था कि यहां भाजपा अब तक नहीं जीत पाई थी। वर्ष 1976 में नगर पंचायत गठित होने के बाद यहां स्व. डीके नैनवाल वर्ष 1979 में पहले मनोनीत अध्यक्ष बने। करीब 18 साल तक स्व. नैनवाल और प्रशासक रहने के बाद वर्ष 1997 में यहां पहला निर्वाचन हुआ, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार प्रकाश नवानी ने जीत दर्ज की। पांच साल के बाद कुछ समय के लिए यहां प्रशासक का कार्यकाल रहा। इसके बाद वर्ष 2003 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने बाजी मारी। इसके बाद लगातार 10 साल तक निर्दलीय ने राज किया। इस वर्ष यहां भाजपा ने महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष दमयंती रतूड़ी को तीसरी बार मैदान में उतारा और यहां कमल खिला। जबकि गौचर में लगातार डेढ़ दशक से कांग्रेस का गढ़ ध्वस्त करने में इस बार भाजपा ने सफलता हासिल की। हालांकि यहां कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी, लेकिन सभासद पदों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। सात सभासदों में एक मात्र प्रत्याशी अजय किशोर भंडारी कांग्रेस से जीते हैं।
विज्ञापन
कर्णप्रयाग नगर पालिका
वर्ष जीते दल
1997 श्रीप्रकाश नवानी निर्दलीय
2003 ललित नैनवाल कांग्रेस
2008 मनोरमा डिमरी निर्दलीय
2013 सुभाष गैरोला निर्दलीय
गौचर नगर पालिका
वर्ष जीते दल
1997 धूमी लाल भाजपा
2003 शिवदेई देवी कांग्रेस
2008 मुकेश नेगी कांग्रेस
2013 मुकेश नेगी कांग्रेस