{"_id":"5be5ed98bdec2265a10623f9","slug":"1541795178118-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"18 साल बाद भी चिन्हित होने का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
18 साल बाद भी चिन्हित होने का इंतजार
Updated Sat, 10 Nov 2018 01:57 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला
रायवाला। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस को लेकर उत्साह के साथ बधाइयों के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। वहीं दूसरी और सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई आंदोलनकारी 18 साल बाद भी चिन्हित होने और प्रमाणपत्र पाने के इंतजार में हैं।
शुक्रवार को ग्रामीण क्षेत्र रायवाला, हरिपूरकलां, छिददरवाला के चिन्हिकरण की सूची से वंचित सैकड़ों ग्रामीणों ने राज्य आंदोलन को याद कर राज्य स्थापना दिवस मनाया। अलग-अलग जगहों पर आयोजित कार्यक्रम में बैठक कर चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारियों, शहीदों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रतीतनगर के सुरेंद्र बुटोला, चक्रधर कुकरेती, संतोष चमोली, राकेश तिवाड़ी, दीवान सिंह चौहान, राजेश जुगलान हरिपुरकलां के नारायण दत्त गौड़, ऋषिराज कुकरेती आदि ने राज्य स्थापना दिवस पर शहीदों को याद किया। ये उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बावजूद आंदोलनकारी की प्रमाणपत्र को मोहताज हैं। इसके लिए कई बार जरूरी दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।
विज्ञापन
रायवाला। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस को लेकर उत्साह के साथ बधाइयों के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। वहीं दूसरी और सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई आंदोलनकारी 18 साल बाद भी चिन्हित होने और प्रमाणपत्र पाने के इंतजार में हैं।
शुक्रवार को ग्रामीण क्षेत्र रायवाला, हरिपूरकलां, छिददरवाला के चिन्हिकरण की सूची से वंचित सैकड़ों ग्रामीणों ने राज्य आंदोलन को याद कर राज्य स्थापना दिवस मनाया। अलग-अलग जगहों पर आयोजित कार्यक्रम में बैठक कर चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारियों, शहीदों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रतीतनगर के सुरेंद्र बुटोला, चक्रधर कुकरेती, संतोष चमोली, राकेश तिवाड़ी, दीवान सिंह चौहान, राजेश जुगलान हरिपुरकलां के नारायण दत्त गौड़, ऋषिराज कुकरेती आदि ने राज्य स्थापना दिवस पर शहीदों को याद किया। ये उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बावजूद आंदोलनकारी की प्रमाणपत्र को मोहताज हैं। इसके लिए कई बार जरूरी दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।
विज्ञापन