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महंत योगेंद्र पुरी को चिकित्सा और साहित्य में थी महारत हासिल
Updated Sun, 28 Oct 2018 10:20 PM IST
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श्रीनगर। हिमालय साहित्य एवं कला परिषद की ओर से नौर स्थित किलकिलेश्वर महादेव परिसर में मंदिर के पूर्व महंत योगेंद्र पुरी की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने योगेंद्र पुरी की रचनाओं पर व्याख्यान देकर उनकी साहित्यिक व सामाजिक संकल्पना को याद किया।
रविवार को मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ कमलेश्वर महादेव मंदिर के महंत आशुतोष पुरी, किलकिलेश्वर महादेव के महंत सुखदेव पुरी और घस्यिमहादेव मंदिर के महंत महेश गिरि ने संयुक्त रुप से किया। इस अवसर पर आयोजित व्याख्यान माला में कहा गया कि श्री 108 महंत योगेंद्र पुरी का लालन पालन नौटियाल परिवार में हुआ था। लाहौर से बीए करने के बाद वह किलकिलेश्वर मंदिर के महंत (लगभग 100 साल पूर्व) नियुक्त हुए। योगेंद्र पुरी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने विशारद व शास्त्री परीक्षाओं को प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के साथ ही वैद्य विधा में कविराज की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने शंकर शतक, चंडी चरित्र, ब्रहमोपनिषद, बह्र बिंदु उपनिषद कैवल्य उपनिषद और धमोर्पदेश आदि पुस्तिकाएं लिखी। शंकर शतक पुस्तक से विद्वानों ने मुग्ध होकर उनको वेदांत भूषण की उपाधि से सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन भवान सिंह रावत, डा. प्रकाश चमोली व नीरज नैथानी ने संयुक्त रुप से किया। इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णा नंद मैठाणी, नीरज नैथानी, जयकृष्ण पैन्यूली, विमल बहुगुणा, देवेंद्र उनियाल, हेमचंद्र ममगांई, विष्णुदत्त कुकरेती, बिहारी लाल जोशी, डा. राजेंद्र प्रसाद गैरोला एवं मीनाक्षी चमोली आदि उपस्थित थे।
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रविवार को मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ कमलेश्वर महादेव मंदिर के महंत आशुतोष पुरी, किलकिलेश्वर महादेव के महंत सुखदेव पुरी और घस्यिमहादेव मंदिर के महंत महेश गिरि ने संयुक्त रुप से किया। इस अवसर पर आयोजित व्याख्यान माला में कहा गया कि श्री 108 महंत योगेंद्र पुरी का लालन पालन नौटियाल परिवार में हुआ था। लाहौर से बीए करने के बाद वह किलकिलेश्वर मंदिर के महंत (लगभग 100 साल पूर्व) नियुक्त हुए। योगेंद्र पुरी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने विशारद व शास्त्री परीक्षाओं को प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के साथ ही वैद्य विधा में कविराज की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने शंकर शतक, चंडी चरित्र, ब्रहमोपनिषद, बह्र बिंदु उपनिषद कैवल्य उपनिषद और धमोर्पदेश आदि पुस्तिकाएं लिखी। शंकर शतक पुस्तक से विद्वानों ने मुग्ध होकर उनको वेदांत भूषण की उपाधि से सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन भवान सिंह रावत, डा. प्रकाश चमोली व नीरज नैथानी ने संयुक्त रुप से किया। इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णा नंद मैठाणी, नीरज नैथानी, जयकृष्ण पैन्यूली, विमल बहुगुणा, देवेंद्र उनियाल, हेमचंद्र ममगांई, विष्णुदत्त कुकरेती, बिहारी लाल जोशी, डा. राजेंद्र प्रसाद गैरोला एवं मीनाक्षी चमोली आदि उपस्थित थे।
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