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आखिरी घाट पर पस्त हुई करोड़ों की परियोजना

Sat, 06 Oct 2018 01:28 AM IST
Updated Sat, 06 Oct 2018 01:28 AM IST
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आखिरी घाट पर पस्त हुई करोड़ों की परियोजना
नमामि गंगे :: आखिरी घाट पर पस्त हुई करोड़ों की परियोजना
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
ऋषिकेश। परियोजना और बजट के बावजूद गंगा स्वच्छता का अभियान लचर कार्यप्रणाली के चलते लटक गया है। वर्ल्ड बैंक ने एसटीपी परियोजना के लिए कुल 139 करोड़ जारी किए थे। इसके तहत चोरपानी में 38 करोड़ और ढालवाला में 72 करोड़ से एसटीपी बनने हैं। इनमें से पांच एमएलडी क्षमता वाला एक प्लांट लगभग पूरा हो गया है जबकि साढ़े सात एमएलडी शोधन क्षमता वाली यूनिट पर्याप्त भूमि नहीं होने से पचड़े में फंस गई है।
ढालवाला में प्लांट के लिए करीब दो हजार वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है, लेकिन अफसरों ने महज एक हजार वर्गमीटर भूमि चिह्नित कर परियोजना का टेंडर आवंटित कर दिया। तकनीकी जांच के लिए फाइल आईआईटी में गई तो आपत्ति दर्ज हो गई। ऐसे में अब परियोजना न तो निरस्त हो रही है न ही जमीन पर उतर पा रही है। वहीं कोर्ट के आदेशों के बाद नमामि गंगे मुहिम को सफल बनाने में जुटे अफसर उलझन में हैं। दरअसल चोरपानी और ढालवाला में दो एसटीपी और पंप स्थापित होने हैं। इसके लिए वर्ल्ड बैंक से करीब 139 करोड़ रुपए का बजट जारी किया गया है। इसमें से करीब 38 करोड़ के बजट से चोरपानी का प्लांट लगभग तैयार हो गया है, लेकिन ढालवाला एसटीपी अफसरों की लापरवाही का शिकार हो गया है। साढ़े सात एमएलडी शोधन क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट पर करीब 72 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। मानकों के अनुरूप कम से कम दो हजार वर्ग मीटर भूमि जरूरी है, लेकिन अफसरों ने महज एक हजार वर्ग मीटर भूमि चिह्नित कर टेंडर कर दिया। यही वजह है कि तकनीकी जांच कर रहे आईआईटी रुड़की के प्रो. ए. काजमी ने पेयजल विभाग को भेजी गई फाइल पर तकनीकी रूप से भूमि अपर्याप्त होने की टिप्पणी दर्ज कर दी।
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डबल स्टोरी एसटीपी बनाने के अनुभवी नहीं
यदि उक्त भूमि पर ही परियोजना लगानी है तो दो या तीन तल का निर्माण करना होगा। नाजुक पहलू यह है कि ठेकेदार संस्था आरके इंजीनियर्स को दो या तीन तल वाले एसटीपी बनाने का अनुभव ही नहीं है। प्रो. ए काजमी का कहना है कि हमारे देश में डबल स्टोरी एसटीपी बनाने वाली कंपनियों का अभाव है। उधर, ठेकेदार संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर सुमित अग्रवाल का कहना है कि स्वीकृति मिलने के बाद हम निर्माण शुरू कर देंगे। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई के अभियंता अरविंद चतुर्वेदी के मुताबिक हम तो अपनी ओर से सारी प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। प्रोजेक्ट पूरा करने की मियाद डेढ़ साल है। हम कोशिश कर रहे हैं कि ठेकेदार संस्था जल्दी काम शुरू कर दे।
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नालों की होगी ट्रैपिंग
गंगा निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई अब गंगा में गिर रहे नालों की ट्रैपिंग करेगा। अभियंता अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि मुनिकीरेती में ढालवाला, चंद्रेश्वर नगर, श्मसान घाट , गंगा रिसॉर्ट, रंभा नदी, सर्वहारा नगर, ऋषिकेश शहर के शिवाजी नगर, सर्वहारा नगर, बापूग्राम में नाले ट्रैप किए जाएंगे। इन नालों को ट्रैप करने के बाद लाइनिंग से जोड़कर गंदे पानी को एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। इससे गंदा पानी गंगा में सीधे नहीं गिरेगा।
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