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भद्रकाली और आकाश भैरव के दर्शनों के लिए दूर दूर से पहुंच रहे हैं श्रद्घालु
Updated Sun, 23 Sep 2018 09:24 PM IST
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कर्णप्रयाग। जगत कल्याण के लिए टिहरी के प्रतापनगर क्षेत्र की मिश्रवाण गांव की श्रीभद्रकाली भ्रमण पर निकली हैं। उनके दर्शनों के लिए यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस दौरान श्रद्धालु भद्रकाली और भैरव देवता की पूजा अर्चना करने के लिए दूर दूर से पहुंच रह हैं।
रविवार सुबह को यहां पूजा के लिए रिठोली, बधाणी, शक्तिनगर, सेमीग्वाड़, गोपेश्वर, लंगासू, सिमली, सेम आदि गांवों से श्रद्धालु पहुंचे। इसके बाद यहां लोगों ने श्री भद्रकाली, आकाश भैरव और अन्य देवताओं की पूजा अर्चना की। देवी ने और आकाश भैरव की डोलियों ने नृत्य कर लोगों को आशीष दिया। इस दौरान देव डोलियों द्वारा समस्याग्रस्त श्रद्धालुओं का चयन करना और फिर उनकी समस्या का निवारण करना लोगों में कौतूहल बना है। काली के पुजारी रैपाल मिश्रवाण ने बताया कि देवी की डोली लिखकर लोगों को समाधान बताती है। दोपहर तक पूजा अर्चना के बाद यहां श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। इसमें वेदव्यास कथा वाचक आचार्य बिहारी लाल सेमवाल ने कहा कि सदाचरण ही ईश्वरीय भक्ति का गुण है। इससे समस्त विश्व का कल्याण और शांति हो सकती है। कथा के बाद देवडोलियों ने नृत्य किया। कार्यक्रम में आचार्य रविंद्र चमोली, डा. एमएम नवानी, डा. विजया नवानी, रुचि डिमरी, अंकित पैन्यूली, महावीर मिश्रवाण, भगवान मिश्रवाण, बीरेंद्र मिगंवाल, दमयंती रतूड़ी, किशोरी रतूड़ी, ओपी नैनवाल, बीएन सेमवाल सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण और देव नृत्य देख कर पुण्य अर्जित किया।
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रविवार सुबह को यहां पूजा के लिए रिठोली, बधाणी, शक्तिनगर, सेमीग्वाड़, गोपेश्वर, लंगासू, सिमली, सेम आदि गांवों से श्रद्धालु पहुंचे। इसके बाद यहां लोगों ने श्री भद्रकाली, आकाश भैरव और अन्य देवताओं की पूजा अर्चना की। देवी ने और आकाश भैरव की डोलियों ने नृत्य कर लोगों को आशीष दिया। इस दौरान देव डोलियों द्वारा समस्याग्रस्त श्रद्धालुओं का चयन करना और फिर उनकी समस्या का निवारण करना लोगों में कौतूहल बना है। काली के पुजारी रैपाल मिश्रवाण ने बताया कि देवी की डोली लिखकर लोगों को समाधान बताती है। दोपहर तक पूजा अर्चना के बाद यहां श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। इसमें वेदव्यास कथा वाचक आचार्य बिहारी लाल सेमवाल ने कहा कि सदाचरण ही ईश्वरीय भक्ति का गुण है। इससे समस्त विश्व का कल्याण और शांति हो सकती है। कथा के बाद देवडोलियों ने नृत्य किया। कार्यक्रम में आचार्य रविंद्र चमोली, डा. एमएम नवानी, डा. विजया नवानी, रुचि डिमरी, अंकित पैन्यूली, महावीर मिश्रवाण, भगवान मिश्रवाण, बीरेंद्र मिगंवाल, दमयंती रतूड़ी, किशोरी रतूड़ी, ओपी नैनवाल, बीएन सेमवाल सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण और देव नृत्य देख कर पुण्य अर्जित किया।
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