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संस्कृत भाषा में बसती है भारतीय संस्कृति
Updated Sat, 01 Sep 2018 10:32 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के संस्कृत विभाग में अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि केंद्र संचालन का उद्देश्य संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाना है।
शनिवार को बिड़ला परिसर में अनौपचारिक संस्कृत केंद्र के उद्घाटन अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. प्रेमचंद शास्त्री ने कहा कि संस्कृत भाषा में ही भारतीय संस्कृति बसती है। संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. कमला चौहान ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। अनौपचारिक शिक्षण केंद्र के शिक्षक राधाकांत ने बताया कि यह पाठ्यक्रम 11 माह तक चलेगा। इस दौरान प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. डीआर पुरोहित, प्रो. शकुंतला कुंवर, विनीत घिल्डियाल, डा. जेपी भट्ट, डा. शुशांत मिश्र, डा. नवीन शर्मा, विवेक आदि मौजूद थे। संचालन डा. आशुतोष गुप्ता ने किया।
शनिवार को बिड़ला परिसर में अनौपचारिक संस्कृत केंद्र के उद्घाटन अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. प्रेमचंद शास्त्री ने कहा कि संस्कृत भाषा में ही भारतीय संस्कृति बसती है। संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. कमला चौहान ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। अनौपचारिक शिक्षण केंद्र के शिक्षक राधाकांत ने बताया कि यह पाठ्यक्रम 11 माह तक चलेगा। इस दौरान प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. डीआर पुरोहित, प्रो. शकुंतला कुंवर, विनीत घिल्डियाल, डा. जेपी भट्ट, डा. शुशांत मिश्र, डा. नवीन शर्मा, विवेक आदि मौजूद थे। संचालन डा. आशुतोष गुप्ता ने किया।
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