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ग्रामीणों ने बना दी सड़क, तब आई विभाग को सुध
Updated Thu, 23 Aug 2018 12:45 AM IST
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ग्रामीणों ने बना दी सड़क, तब आई विभाग को सुध
ऋषिकेश। हेमवती नंदन भट्ट
योजनाओं को लटकाने और सरकारी बजट को ठिकाने लगाने में लोक निर्माण विभाग का कोई जोड़ नहीं है। पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लॉक स्थित ग्रामसभा हरषु मुणगांव के ग्रामीण कई वर्षों से गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए मांग उठा रहे थे, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने श्रमदान कर जनशक्ति मोटर मार्ग (सड़क) बना ली। वहीं अब लोक निर्माण विभाग ने करीब ढाई करोड़ की लागत से तीन किलोमीटर मार्ग के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है।
पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लॉक स्थित ग्रामसभा हरषु मुणगांव के ग्रामीण कई वर्षों से गांव को सड़क संपर्क मार्ग से जोड़ने के लिए मांग उठाते रहे हैं। सड़क बनाने के बाबत ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, शासन और जनप्रतिनिधियों और सूबे के मुखिया से भी गुहार लगाई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद बीते साल जून-2017 में ग्रामीणों ने श्रमदान से ग्रामसभा हरषु मुणगांव के अंतर्गत सकनियुल गांव से मुणगांव तक लगभग पांच किलोमीटर जनशक्ति मार्ग तैयार कर लिया। इस मार्ग निर्माण में कई किसानों ने अपनी कृषि भूमि भी दान कर दी। मार्ग का निर्माण सितंबर 2017 में पूरा हो जा चुका है और वर्तमान में आवागमन योग्य है। श्रमदान से बने इस मार्ग का उद्घाटन 15 जनवरी-2018 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व यमकेश्वर विधायक ऋतु खंडूड़ी की मौजूदगी में किया गया। इस मौके पर सूबे के मुखिया ने उक्त मार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को देने की घोषणा भी की, लेकिन यह घोषणा हवाई साबित हुई।
आलम यह है कि अब लोक निर्माण विभाग ने गांव के मोटर मार्ग से जुड़ जाने और लोगों का आवागमन की सुविधा मिलने के सालभर बाद अतिरिक्त मोटर मार्ग से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत शासन से करीब ढाई दशक से प्रस्तावित मोटर मार्ग निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव सड़क संपर्क से जुड़ चुका है तो करीब ढाई करोड़ की फिजूलखर्ची की जरूरत क्यों है।
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मुसीबत के समय अनदेखी करता रहा विभाग
स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो वे लोक निर्माण विभाग से कई वर्षों से गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की गुहार लगा रहे थे। सड़क नहीं होने से करीब छह किमी. की दूरी तय करना मुसीबत से कम नहीं था। रास्ते पर वाहनों का आवागमन न होने से अक्सर गंभीर मरीज रास्ते में दम तोड़ देते थे। इसके अलावा शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी कोई पहल नहीं कर रहे थे।
समाजसेविका ने की थी पहल
गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए हर चौखट पर गुहार लगाने, मन्नतें करने के बाद भी जब दशकों तक कोई सुनवाई नहीं हुई तो इसके लिए स्थानीय ग्रामीणों ने समाजसेवी आरती गौड़ से अनुरोध किया। आरती ने इसके लिए गांव के लोगों की सामूहिक बैठक बुलाई और सभी से आवागमन की समस्या के स्थाई निजात के लिए आगे आने का आग्रह किया। इसके ग्रामीण एकजुट हुए और सड़क बन गई।
लोनिवि की सड़क से ये होंगे साइड इफेक्ट
लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्तावित हरषु- मुणगांव मोटर मार्ग जिस स्थान पर बनाने की महकमा तैयारी कर रहा है, उसके ठीक नीचे गांवों का पेयजल स्रोत है। इस जल स्रोत से क्षेत्र के करीब 30 गांवों की जलापूर्ति होती है। ग्रामीणों की आशंका है कि यदि विभाग ने यहां सड़क निर्माण शुरू किया तो उसके मलबे से पेयजल स्रोत बाधित हो जाएगा।
ये भी हैं अहम सवाल
- हरषु से मुणगांव जाने वाले मार्ग का लाभ महज मुणगांव के लोगों को मिलना है। जबकि मुणगांव तक जनशक्ति मोटर मार्ग पहले ही बन चुका है और हरषु गांव पहले ही रोड हेड पर हैं। ऐसे में सड़क बनाने का लाभ किसे होगा।
-ढाई करोड़ का बजट हरषु- मुणगांव मार्ग की कटिंग पर खर्च किया जाएगा। मुख्यमंत्री ग्रामीणों द्वारा तैयार की गई सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी पहले ही महकमे को दे चुके हैं। विभाग उक्त मार्ग के विस्तारीकरण व सुदृढ़ीकरण की बजाय नई सड़क बनाने की कवायद कर रहा है, जिसकी फिलवक्त कोई जरूरत नहीं है।
-ग्रामीण बीते अप्रैल माह में उक्त मामला विधायक ऋतु खंडूड़ी के समक्ष उठा चुके हैं। विधायक ने स्वीकृत नई सड़क का बजट ग्रामीणों द्वारा तैयार किए गए मार्ग के सुदृढ़ीकरण पर लगाने का उन्हें भरोसा भी दिया, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
-समाजसेवी आरती गौड़ की मानें तो वह विभाग के समक्ष सारी तस्वीर रख चुके हैं, फिर भी विभाग तैयार मार्ग के विस्तारीकरण की बजाय नए मार्ग के निर्माण में दिलचस्पी दिखा रहा है।
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तीन किलोमीटर हरषु-मुणगांव मोटर मार्ग को शासन से मंजूरी मिल चुकी है। मार्ग की कटिंग के लिए करीब ढाई करोड़ की वित्तीय मंजूरी भी मिल चुकी है। मार्ग निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, दुगड्डा डिवीजन
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ऋषिकेश। हेमवती नंदन भट्ट
योजनाओं को लटकाने और सरकारी बजट को ठिकाने लगाने में लोक निर्माण विभाग का कोई जोड़ नहीं है। पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लॉक स्थित ग्रामसभा हरषु मुणगांव के ग्रामीण कई वर्षों से गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए मांग उठा रहे थे, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने श्रमदान कर जनशक्ति मोटर मार्ग (सड़क) बना ली। वहीं अब लोक निर्माण विभाग ने करीब ढाई करोड़ की लागत से तीन किलोमीटर मार्ग के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है।
पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लॉक स्थित ग्रामसभा हरषु मुणगांव के ग्रामीण कई वर्षों से गांव को सड़क संपर्क मार्ग से जोड़ने के लिए मांग उठाते रहे हैं। सड़क बनाने के बाबत ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, शासन और जनप्रतिनिधियों और सूबे के मुखिया से भी गुहार लगाई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद बीते साल जून-2017 में ग्रामीणों ने श्रमदान से ग्रामसभा हरषु मुणगांव के अंतर्गत सकनियुल गांव से मुणगांव तक लगभग पांच किलोमीटर जनशक्ति मार्ग तैयार कर लिया। इस मार्ग निर्माण में कई किसानों ने अपनी कृषि भूमि भी दान कर दी। मार्ग का निर्माण सितंबर 2017 में पूरा हो जा चुका है और वर्तमान में आवागमन योग्य है। श्रमदान से बने इस मार्ग का उद्घाटन 15 जनवरी-2018 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व यमकेश्वर विधायक ऋतु खंडूड़ी की मौजूदगी में किया गया। इस मौके पर सूबे के मुखिया ने उक्त मार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को देने की घोषणा भी की, लेकिन यह घोषणा हवाई साबित हुई।
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आलम यह है कि अब लोक निर्माण विभाग ने गांव के मोटर मार्ग से जुड़ जाने और लोगों का आवागमन की सुविधा मिलने के सालभर बाद अतिरिक्त मोटर मार्ग से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत शासन से करीब ढाई दशक से प्रस्तावित मोटर मार्ग निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव सड़क संपर्क से जुड़ चुका है तो करीब ढाई करोड़ की फिजूलखर्ची की जरूरत क्यों है।
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मुसीबत के समय अनदेखी करता रहा विभाग
स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो वे लोक निर्माण विभाग से कई वर्षों से गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की गुहार लगा रहे थे। सड़क नहीं होने से करीब छह किमी. की दूरी तय करना मुसीबत से कम नहीं था। रास्ते पर वाहनों का आवागमन न होने से अक्सर गंभीर मरीज रास्ते में दम तोड़ देते थे। इसके अलावा शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी कोई पहल नहीं कर रहे थे।
समाजसेविका ने की थी पहल
गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए हर चौखट पर गुहार लगाने, मन्नतें करने के बाद भी जब दशकों तक कोई सुनवाई नहीं हुई तो इसके लिए स्थानीय ग्रामीणों ने समाजसेवी आरती गौड़ से अनुरोध किया। आरती ने इसके लिए गांव के लोगों की सामूहिक बैठक बुलाई और सभी से आवागमन की समस्या के स्थाई निजात के लिए आगे आने का आग्रह किया। इसके ग्रामीण एकजुट हुए और सड़क बन गई।
लोनिवि की सड़क से ये होंगे साइड इफेक्ट
लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्तावित हरषु- मुणगांव मोटर मार्ग जिस स्थान पर बनाने की महकमा तैयारी कर रहा है, उसके ठीक नीचे गांवों का पेयजल स्रोत है। इस जल स्रोत से क्षेत्र के करीब 30 गांवों की जलापूर्ति होती है। ग्रामीणों की आशंका है कि यदि विभाग ने यहां सड़क निर्माण शुरू किया तो उसके मलबे से पेयजल स्रोत बाधित हो जाएगा।
ये भी हैं अहम सवाल
- हरषु से मुणगांव जाने वाले मार्ग का लाभ महज मुणगांव के लोगों को मिलना है। जबकि मुणगांव तक जनशक्ति मोटर मार्ग पहले ही बन चुका है और हरषु गांव पहले ही रोड हेड पर हैं। ऐसे में सड़क बनाने का लाभ किसे होगा।
-ढाई करोड़ का बजट हरषु- मुणगांव मार्ग की कटिंग पर खर्च किया जाएगा। मुख्यमंत्री ग्रामीणों द्वारा तैयार की गई सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी पहले ही महकमे को दे चुके हैं। विभाग उक्त मार्ग के विस्तारीकरण व सुदृढ़ीकरण की बजाय नई सड़क बनाने की कवायद कर रहा है, जिसकी फिलवक्त कोई जरूरत नहीं है।
-ग्रामीण बीते अप्रैल माह में उक्त मामला विधायक ऋतु खंडूड़ी के समक्ष उठा चुके हैं। विधायक ने स्वीकृत नई सड़क का बजट ग्रामीणों द्वारा तैयार किए गए मार्ग के सुदृढ़ीकरण पर लगाने का उन्हें भरोसा भी दिया, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
-समाजसेवी आरती गौड़ की मानें तो वह विभाग के समक्ष सारी तस्वीर रख चुके हैं, फिर भी विभाग तैयार मार्ग के विस्तारीकरण की बजाय नए मार्ग के निर्माण में दिलचस्पी दिखा रहा है।
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तीन किलोमीटर हरषु-मुणगांव मोटर मार्ग को शासन से मंजूरी मिल चुकी है। मार्ग की कटिंग के लिए करीब ढाई करोड़ की वित्तीय मंजूरी भी मिल चुकी है। मार्ग निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, दुगड्डा डिवीजन