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ढोल सागर में पारंगत होंगे टिहरी जनपद के बच्चे
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:32 PM IST
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श्रीनगर। टिहरी जनपद के बच्चे अब ढोल सागर में पारंगत होंगे। इस विधा में बच्चों को पारंगत बनाए जाने के लिए संस्कृति विभाग की ओर से प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है। शुरुआती तौर पर अनुसूचित जाति के 10 बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षक ओमकार दास ने बताया कि अगर अन्य जाति के बच्चे भी इस विधा को सीखना चाहे तो उन्हें भी निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संस्कृति विभाग के माध्यम से संचालित प्रदेश सरकार की गुरू शिष्य परंपरा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत ग्राम पंचायत जाखी में 10 बच्चों को ढोल सागर व पौराणिक विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ढोल सागर व इससे संबंधित अन्य विधाओं में निपूर्ण 77 वर्षीय ओमकार दास ने बताया कि उन्होंने यह विधा 12 वर्ष की आयु में अपने पिता बाग दास से सीखी थी। बताया कि ढोल सागर व पौराणिक विधाओं के संरक्षण के लिए पहली अगस्त से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुका है। जोकि 31 जनवरी 2019 तक चलेगा। बताया कि इसके लिए टिहरी जनपद से उनका चयन किया गया है। उन्होंने कहा कि भले ही योजना अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए शुरू की गई है लेकिन अन्य जाति के बच्चें भी इस विधा को सीख सकते है। प्रशिक्षक ओमकार दास ने प्रशिक्षण कार्यक्रम पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि विलुप्त हो रही विधा को संरक्षित करने का बड़ा प्रयास है। बताया कि सरकार की इस योजना से पूर्व भी वह कई लोगों को ढोल सागर व पौराणिक विधाओं का निशुल्क प्रशिक्षण दे चुके है, जिसके लिए उन्हें कई मंचों व संगठनों की ओर से सम्मानित किया जा चुका है।
नौकरी छोड़ चुना पारंपरिक व्यवसाय
श्रीनगर। ओमकार दास 1959 में कक्षा आठ पास कर जिला विकास कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्त हुए थे, लेकिन 1977 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने परंपरागत व्यवसाय में जुट गए। ओमकार ने ढोलसागर पर पुस्तक भी लिखी है। जिसका वर्ष 2016 में प्रकाशन हो चुका है।
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संस्कृति विभाग के माध्यम से संचालित प्रदेश सरकार की गुरू शिष्य परंपरा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत ग्राम पंचायत जाखी में 10 बच्चों को ढोल सागर व पौराणिक विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ढोल सागर व इससे संबंधित अन्य विधाओं में निपूर्ण 77 वर्षीय ओमकार दास ने बताया कि उन्होंने यह विधा 12 वर्ष की आयु में अपने पिता बाग दास से सीखी थी। बताया कि ढोल सागर व पौराणिक विधाओं के संरक्षण के लिए पहली अगस्त से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुका है। जोकि 31 जनवरी 2019 तक चलेगा। बताया कि इसके लिए टिहरी जनपद से उनका चयन किया गया है। उन्होंने कहा कि भले ही योजना अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए शुरू की गई है लेकिन अन्य जाति के बच्चें भी इस विधा को सीख सकते है। प्रशिक्षक ओमकार दास ने प्रशिक्षण कार्यक्रम पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि विलुप्त हो रही विधा को संरक्षित करने का बड़ा प्रयास है। बताया कि सरकार की इस योजना से पूर्व भी वह कई लोगों को ढोल सागर व पौराणिक विधाओं का निशुल्क प्रशिक्षण दे चुके है, जिसके लिए उन्हें कई मंचों व संगठनों की ओर से सम्मानित किया जा चुका है।
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नौकरी छोड़ चुना पारंपरिक व्यवसाय
श्रीनगर। ओमकार दास 1959 में कक्षा आठ पास कर जिला विकास कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्त हुए थे, लेकिन 1977 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने परंपरागत व्यवसाय में जुट गए। ओमकार ने ढोलसागर पर पुस्तक भी लिखी है। जिसका वर्ष 2016 में प्रकाशन हो चुका है।
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