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जड़ी-बूटी कृषिकरण के लिए उर्गम घाटी की जलवायु मुफीद
Updated Sat, 04 Aug 2018 10:36 PM IST
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जोशीमठ। हैप्रेक (उच्च शिखरीय पादप शोध केंद्र) और एचआरडीए (जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान) की ओर से जीआईसी उर्गम में जड़ी-बूटी कृषिकरण पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जड़ी-बृषि के कृषिकरण पर जोर दिया गया। इस दौरान काश्तकारों को औषधीय कुटकी के 300 पौधे बांटे गए।
गढ़वाल केंद्रीय विवि के वैज्ञानिक डा. बीके पुरोहित ने कहा कि उर्गम घाटी की जलवायु जड़ी-बूटी कृषिकरण के लिए मुफीद है। यहां के काश्तकारों को जड़ी-बूटी कृषिकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा। डा. राकेश भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र जैव-विविधता से भरे हैं। यहां जड़ी-बूटी पर शोध की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि काश्तकारों को तकनीकी मदद मिले तो वह जड़ी-बूटी उत्पादन से अच्छी आर्थिकी अर्जित कर सकते हैं। प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नेगी ने कहा कि उर्गम घाटी की मिट्टी सब्जी और पारंपरिक उत्पादों के लिए बेहतर है। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान को काश्तकारों को जड़ी-बूटी के उत्पादन के लिए प्रेरित करना चाहिए। इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख प्रकाश रावत, ग्राम प्रधान हरीश परमार, भगवती प्रसाद मिंगवाल, विशेश्वर नेगी, संजय गुनियाल, धीरज बिष्ट, रघुवीर नेगी और पूर्णी देवी आदि मौजूद थे।
गढ़वाल केंद्रीय विवि के वैज्ञानिक डा. बीके पुरोहित ने कहा कि उर्गम घाटी की जलवायु जड़ी-बूटी कृषिकरण के लिए मुफीद है। यहां के काश्तकारों को जड़ी-बूटी कृषिकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा। डा. राकेश भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र जैव-विविधता से भरे हैं। यहां जड़ी-बूटी पर शोध की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि काश्तकारों को तकनीकी मदद मिले तो वह जड़ी-बूटी उत्पादन से अच्छी आर्थिकी अर्जित कर सकते हैं। प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नेगी ने कहा कि उर्गम घाटी की मिट्टी सब्जी और पारंपरिक उत्पादों के लिए बेहतर है। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान को काश्तकारों को जड़ी-बूटी के उत्पादन के लिए प्रेरित करना चाहिए। इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख प्रकाश रावत, ग्राम प्रधान हरीश परमार, भगवती प्रसाद मिंगवाल, विशेश्वर नेगी, संजय गुनियाल, धीरज बिष्ट, रघुवीर नेगी और पूर्णी देवी आदि मौजूद थे।
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