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सफल व समृद्ध शिक्षा की रीढ है संवाद कौशल
Updated Wed, 25 Jul 2018 10:48 PM IST
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श्रीनगर। पं. मदन मोहन मालवीय नेशनल मिशन ऑन टीचर्स एंड टीचिंग योजना के तहत गढ़वाल विवि के फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने कहा कि संवाद कौशल सफल व सुदृढ़ शिक्षा की रीढ़ है।
बुधवार को चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में संप्रेषण कौशल, भावनात्मक बुद्धिमता एवं वैज्ञानिक प्रवृत्ति विषय पर सात दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला में माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रवक्ता प्रतिभाग कर रहे हैं। मुख्य अतिथि डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता निर्मल चंद डंडरियाल ने कहा कि संवाद कौशल शिक्षा की रीढ़ है। इसके बिना सफल और समृद्ध शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। फैकल्टी डेवलपमेंट की निदेशक प्रो. इंदू पांडे खंडूड़ी ने कहा संवाद कौशल वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए अपरिहार्य है। प्रो. पांडे ने कहा कि भावनात्मक असंतुलन को से जूझ रहे किशोर तथा युवा छात्रों की समस्याओं को समझने व सुलझाने के लिए भावनात्मक बुद्धि के विभिन्न पहलुओं को समझना एवं उनका उपयोग करना जरुरी है। प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि संवाद भारतीय सभ्यता में प्राचीन काल से ही एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। कार्यशाला में प्रो. गीता पंत जोशी, प्रो. मोनिका गुप्ता, प्रो. मंजू पांडे, डा. आरएस नेगी आदि मौजूद थे।
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बुधवार को चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में संप्रेषण कौशल, भावनात्मक बुद्धिमता एवं वैज्ञानिक प्रवृत्ति विषय पर सात दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला में माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रवक्ता प्रतिभाग कर रहे हैं। मुख्य अतिथि डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता निर्मल चंद डंडरियाल ने कहा कि संवाद कौशल शिक्षा की रीढ़ है। इसके बिना सफल और समृद्ध शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। फैकल्टी डेवलपमेंट की निदेशक प्रो. इंदू पांडे खंडूड़ी ने कहा संवाद कौशल वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए अपरिहार्य है। प्रो. पांडे ने कहा कि भावनात्मक असंतुलन को से जूझ रहे किशोर तथा युवा छात्रों की समस्याओं को समझने व सुलझाने के लिए भावनात्मक बुद्धि के विभिन्न पहलुओं को समझना एवं उनका उपयोग करना जरुरी है। प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि संवाद भारतीय सभ्यता में प्राचीन काल से ही एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। कार्यशाला में प्रो. गीता पंत जोशी, प्रो. मोनिका गुप्ता, प्रो. मंजू पांडे, डा. आरएस नेगी आदि मौजूद थे।
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