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समिति ने बस चालकों पर दोष लगाने की निंदा की
Updated Sat, 21 Jul 2018 01:56 AM IST
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चालकों पर आरोप लगाकर पल्ला नहीं झाड़ सकती सरकार
- कहा, चंबा के निकट बस हादसा खराब सड़क होने के कारण हुआ
- संयुक्त रोटेशन व्यवस्था ने बस दुर्घटनाओं में चालकों पर आरोप लगाने की निंदा की
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश । संयुक्त रोटेशन व्यवस्था समिति ने बस दुर्घटनाओं में चालकों पर दोषारोपण की निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार व संबंधित अधिकारी दुर्घटनाओं के मामले में केवल बस चालकों पर आरोप लगाकर पल्ला नहीं झाड़ सकते। उन्होंने बताया कि बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने के कई अन्य कारण भी होते हैं। जिन पर सरकार को गौर करना चाहिए। शुक्रवार को रोटेशन कार्यालय में प्यार सिंह गुनसोला की अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई। वक्ताओं ने कहा कि जब कभी भी बसें दुर्घटनाग्रस्त होती हैं, तो सरकार व संबंधित अधिकारी इसके लिए केवल बस चालकों पर दोषारोपण कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। उनका कहना है कि चंबा के समीप हुई बस दुर्घटना सड़क खराब होने से हुई है। बताया कि उक्त स्थान पर बीते दो वर्षों से कार्य अधूरा पड़ा है।
आरोप है सरकार द्वारा चालकों के लिए बनाए गए नियम भी तर्कसंगत नहीं हैं। बसों में ओवरलोड कभी कबार ही होता है, अक्सर बसों में निर्धारित क्षमता से कम ही सवारियां होती हैं, जिससे वाहन स्वामियों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उनका कहना है कि राज्य सरकार को उत्तराखंड में परिवहन व्यवस्था को बनाने के लिए ठोस नियम कायदे बनाने चाहिए। बैठक में प्रीतम सिंह नेगी, कुंवर सिंह रावत, चंदन सिंह पंवार, भानु प्रकाश, मनोज ध्यानी, दाताराम रतूड़ी, सुरेश कुड़ियाल, बलवीर सिंह, यशपाल राणा, बलवंत सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे।
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- कहा, चंबा के निकट बस हादसा खराब सड़क होने के कारण हुआ
- संयुक्त रोटेशन व्यवस्था ने बस दुर्घटनाओं में चालकों पर आरोप लगाने की निंदा की
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश । संयुक्त रोटेशन व्यवस्था समिति ने बस दुर्घटनाओं में चालकों पर दोषारोपण की निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार व संबंधित अधिकारी दुर्घटनाओं के मामले में केवल बस चालकों पर आरोप लगाकर पल्ला नहीं झाड़ सकते। उन्होंने बताया कि बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने के कई अन्य कारण भी होते हैं। जिन पर सरकार को गौर करना चाहिए। शुक्रवार को रोटेशन कार्यालय में प्यार सिंह गुनसोला की अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई। वक्ताओं ने कहा कि जब कभी भी बसें दुर्घटनाग्रस्त होती हैं, तो सरकार व संबंधित अधिकारी इसके लिए केवल बस चालकों पर दोषारोपण कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। उनका कहना है कि चंबा के समीप हुई बस दुर्घटना सड़क खराब होने से हुई है। बताया कि उक्त स्थान पर बीते दो वर्षों से कार्य अधूरा पड़ा है।
आरोप है सरकार द्वारा चालकों के लिए बनाए गए नियम भी तर्कसंगत नहीं हैं। बसों में ओवरलोड कभी कबार ही होता है, अक्सर बसों में निर्धारित क्षमता से कम ही सवारियां होती हैं, जिससे वाहन स्वामियों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उनका कहना है कि राज्य सरकार को उत्तराखंड में परिवहन व्यवस्था को बनाने के लिए ठोस नियम कायदे बनाने चाहिए। बैठक में प्रीतम सिंह नेगी, कुंवर सिंह रावत, चंदन सिंह पंवार, भानु प्रकाश, मनोज ध्यानी, दाताराम रतूड़ी, सुरेश कुड़ियाल, बलवीर सिंह, यशपाल राणा, बलवंत सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे।
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