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पर्यावरण पूरक उद्योगों पर देना होगा जोर : डॉ. टावरी
Updated Mon, 02 Jul 2018 01:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
डोईवाला। पलायन जैसी विभीषिका से बचने के लिए पर्यावरण पूरक उद्योगों पर जोर दिया जाना चाहिए। युवाओं को स्वरोजगार में भविष्य तलाश कर राज्य की बेहतरी के लिए काम करना होगा।
ये बातें पूर्व केंद्रीय सचिव डॉ. कमल टावरी ने रविवार को स्वामी भास्करानंद शोध संस्थान, थानो में कहीं। वे यहां उत्तराखंड के विकास, बेरोजगारी और पलायन रोकने के विषय पर आयोजित परिचर्चा में संबोधित कर रहे थे। डॉ. कमल टावरी ने कहा कि राज्य सरकार यदि ध्यान केंद्रित करे तो राज्य में बुनियादी सुविधाओं को जुटाकर रोजगार सृजन की पहल हो सकती है। गुजराज के डॉ. बेलाजी खजूरिया ने कहा कि उत्तराखंड में आर्थिकी को मजबूत बनाने की व्यापक संभावनाएं हैं। शोध संस्थान के स्वामी भास्करानंद ने राज्य की अनुपम और रोजगारपरक आयुर्वेदिक औषधियों के सरंक्षण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जड़ी बूटियों से स्वरोजगार किया जा सकता है। परिचर्चा में शीला टावरी, बंसतगिरी बापू, सुभाष चंदोला, राघवेंद्र सिंह,तेजराम, डॉ. अजय आदि ने भी विचार रखे।
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डोईवाला। पलायन जैसी विभीषिका से बचने के लिए पर्यावरण पूरक उद्योगों पर जोर दिया जाना चाहिए। युवाओं को स्वरोजगार में भविष्य तलाश कर राज्य की बेहतरी के लिए काम करना होगा।
ये बातें पूर्व केंद्रीय सचिव डॉ. कमल टावरी ने रविवार को स्वामी भास्करानंद शोध संस्थान, थानो में कहीं। वे यहां उत्तराखंड के विकास, बेरोजगारी और पलायन रोकने के विषय पर आयोजित परिचर्चा में संबोधित कर रहे थे। डॉ. कमल टावरी ने कहा कि राज्य सरकार यदि ध्यान केंद्रित करे तो राज्य में बुनियादी सुविधाओं को जुटाकर रोजगार सृजन की पहल हो सकती है। गुजराज के डॉ. बेलाजी खजूरिया ने कहा कि उत्तराखंड में आर्थिकी को मजबूत बनाने की व्यापक संभावनाएं हैं। शोध संस्थान के स्वामी भास्करानंद ने राज्य की अनुपम और रोजगारपरक आयुर्वेदिक औषधियों के सरंक्षण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जड़ी बूटियों से स्वरोजगार किया जा सकता है। परिचर्चा में शीला टावरी, बंसतगिरी बापू, सुभाष चंदोला, राघवेंद्र सिंह,तेजराम, डॉ. अजय आदि ने भी विचार रखे।
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