{"_id":"5b37dd0a4f1c1bc57b8b50f1","slug":"15303877224-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गो से ही भारत का समग्र विकास संभव - टावरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गो से ही भारत का समग्र विकास संभव - टावरी
Updated Sun, 01 Jul 2018 01:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
मुनिकीरेती। उत्तराखंड में पहाड़ से पलायन गो पालन के माध्यम से रोका जा सकता है। धर्म और भावनाओं से तो गाय को जोड़ लिया गया है, लेकिन उसके संरक्षण के प्रति लोग गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। लिहाजा राज्य में गो पालन पर जोर देने की आवश्यकता है।
ये बातें पूर्व आईएएस डॉ. कमल टावरी ने शनिवार को स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि गाय से ही भारत का समग्र विकास संभव है। गो पालन से उत्तराखंड में पलायन रोकने में भी काफी मदद मिल सकती है। सरकार पहाड़ से पलायन की असल वजह समझ ही नहीं पा रही है। इसके अलावा राज्य के लोगों के पास पशुधन का सही उपयोग करने का तंत्र नहीं है। गाय पर आधारित विकास से ही पर्वतीय गांवों से पलायन रोका जा सकता है। उन्होंने इस बाबत परमार्थ निकेतन और अन्य संस्थाओं के सहयोग से योजना बनाने की जानकारी भी दी। इस मौके पर डॉ. राजेश खजूरिया, डॉ. शीला टावरी, लोकेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
मुनिकीरेती। उत्तराखंड में पहाड़ से पलायन गो पालन के माध्यम से रोका जा सकता है। धर्म और भावनाओं से तो गाय को जोड़ लिया गया है, लेकिन उसके संरक्षण के प्रति लोग गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। लिहाजा राज्य में गो पालन पर जोर देने की आवश्यकता है।
ये बातें पूर्व आईएएस डॉ. कमल टावरी ने शनिवार को स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि गाय से ही भारत का समग्र विकास संभव है। गो पालन से उत्तराखंड में पलायन रोकने में भी काफी मदद मिल सकती है। सरकार पहाड़ से पलायन की असल वजह समझ ही नहीं पा रही है। इसके अलावा राज्य के लोगों के पास पशुधन का सही उपयोग करने का तंत्र नहीं है। गाय पर आधारित विकास से ही पर्वतीय गांवों से पलायन रोका जा सकता है। उन्होंने इस बाबत परमार्थ निकेतन और अन्य संस्थाओं के सहयोग से योजना बनाने की जानकारी भी दी। इस मौके पर डॉ. राजेश खजूरिया, डॉ. शीला टावरी, लोकेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन