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तुंगनाथ क्षेत्र में बढ़ेगा राज्य पक्षी मोनाल का कुनबा
Updated Sat, 30 Jun 2018 10:44 PM IST
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गोपेश्वर। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की योजना रंग लाई तो तुंगनाथ क्षेत्र में राज्य पक्षी मोनाल का कुनबा बढ़ेगा। वन्य जीव प्रभाग ने तुंगनाथ क्षेत्र में मोनाल प्रजनन केंद्र खोलने की योजना बनाई है। वन विशेषज्ञों ने भी मोनाल के प्रजनन के लिए इस क्षेत्र को मुफीद बताया है।
वर्ष 2010 की गणना में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत 156 मोनाल पाए गए थे। यह समुद्र तल से दो हजार से साढ़े तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर विचरण करने वाला पक्षी है। वन महकमे ने तुंगनाथ क्षेत्र में मोनाल प्रजनन केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके लिए तुंगनाथ क्षेत्र में गढ़वाल केंद्रीय विवि के रिसर्च सेंटर के पास जगह चिह्नित की गई है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि मई माह में वन्य जीव प्रतिपालक को तुंगनाथ क्षेत्र में मोनाल प्रजनन केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही मोनाल प्रजनन केंद्र की स्थापना कर दी जाएगी।
मोनाल का वैज्ञानिक नाम लोफोफोरस इंपेजेनस है। यह नेपाल का राष्ट्रीय और उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश का राज्य पक्षी है। यह हिमालय क्षेत्र में पाया जाता है। इसे नीलमोर के नाम से भी जाना जाता है। चमोली में ऊखीमठ, गोपेश्वर, पोखरी और गैरसैंण क्षेत्र के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मोनाल का वासस्थल है।
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...और वीरान पड़ा कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र
तुंगनाथ क्षेत्र के कांचुलाखर्क में कस्तूरा मृग संरक्षण को लेकर वर्ष 1982 में आठ करोड़ की लागत से कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया था। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशन में शुरुआती दौर में इस केंद्र में 34 कस्तूरा मृगों का झुंड रखा गया, लेकिन वर्ष 1986 से यहां कस्तूरा मृगों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया। देखते ही देखते तीन दशक में 61 कस्तूरा मृग मौत के मुंह में समा गए। वर्ष 2014 में वन विशेषज्ञों ने जांच में कांचुलाखर्क के कठोर जलवायु परिवर्तन को कस्तूरा मृग के लिए खतरनाक बताया। वर्ष 2010 से कांचुलाखर्क का कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र वीरान पड़ा हुआ है। वन विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने तुंगनाथ क्षेत्र में मोनाल प्रजनन केंद्र खोलने की योजना बनाई है।
वर्ष 2010 की गणना में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत 156 मोनाल पाए गए थे। यह समुद्र तल से दो हजार से साढ़े तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर विचरण करने वाला पक्षी है। वन महकमे ने तुंगनाथ क्षेत्र में मोनाल प्रजनन केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके लिए तुंगनाथ क्षेत्र में गढ़वाल केंद्रीय विवि के रिसर्च सेंटर के पास जगह चिह्नित की गई है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि मई माह में वन्य जीव प्रतिपालक को तुंगनाथ क्षेत्र में मोनाल प्रजनन केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही मोनाल प्रजनन केंद्र की स्थापना कर दी जाएगी।
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मोनाल का वैज्ञानिक नाम लोफोफोरस इंपेजेनस है। यह नेपाल का राष्ट्रीय और उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश का राज्य पक्षी है। यह हिमालय क्षेत्र में पाया जाता है। इसे नीलमोर के नाम से भी जाना जाता है। चमोली में ऊखीमठ, गोपेश्वर, पोखरी और गैरसैंण क्षेत्र के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मोनाल का वासस्थल है।
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...और वीरान पड़ा कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र
तुंगनाथ क्षेत्र के कांचुलाखर्क में कस्तूरा मृग संरक्षण को लेकर वर्ष 1982 में आठ करोड़ की लागत से कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया था। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशन में शुरुआती दौर में इस केंद्र में 34 कस्तूरा मृगों का झुंड रखा गया, लेकिन वर्ष 1986 से यहां कस्तूरा मृगों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया। देखते ही देखते तीन दशक में 61 कस्तूरा मृग मौत के मुंह में समा गए। वर्ष 2014 में वन विशेषज्ञों ने जांच में कांचुलाखर्क के कठोर जलवायु परिवर्तन को कस्तूरा मृग के लिए खतरनाक बताया। वर्ष 2010 से कांचुलाखर्क का कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र वीरान पड़ा हुआ है। वन विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने तुंगनाथ क्षेत्र में मोनाल प्रजनन केंद्र खोलने की योजना बनाई है।