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जर्जर पेयजल योजना बनी इंजीनियरिंग कालेज व ग्रामीणों के लिए समस्या
Updated Sat, 23 Jun 2018 10:23 PM IST
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श्रीनगर। इंजीनियरिंग कालेज घुड़दौड़ी के लिए बनी पेयजल योजना जर्जर होने से आए दिन कालेज सहित इससे जुड़े क्षेत्र के 58 गांवों के लोगों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है। कॉलेज प्रबंधन सहित ग्रामीण योजना की पुनर्गठन की मांग कर रहे है।
इंजीनियरिंग कालेज घुड़दौड़ी के लिए वर्ष 1996 में बनी पेयजल योजना वर्ष 2011 तक के लिए डिजायन की गई थी, जिससे पेयजल समस्या से जूझ रहे 58 गांवों के ग्रामीणों को भी योजना से जोड़ा गया था, लेकिन योजना की पाइप लाइन जर्जर होने से आए दिन पेयजल आपूर्ति में समस्या बनी है। इंजीनियरिंग कालेज के प्रभारी कुलसचिव मनोज कुमार पांडा ने बताया कि कई बार पेयजल योजना के पाईप फट जाने से पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है। ऐसे में रिजर्व टैंक से परिसर की आपूर्ति में कटौती करनी पड़ती है। इसके बाद भी अगर योजना से आपूर्ति सुचारु नहीं हुई तो टैंकरों से आपूर्ति करवाई जाती है। वहीं इस दौरान योजना से जुड़े घुड़दौड़ी, अरकंड़ी, भैसवाड़ा, मजाकोट, देहरलचौरी आदि गांवों के ग्रामीणों को भी पेयजल समस्या से जूझना पड़ता है। कुलसचिव पांडा ने बताया कि वर्ष 2011 में योजना का पुनर्गठन किया जाना था, लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी बजट के अभाव में पुनर्गठन नहीं हो पाया है। बताया कि 16 जून को देहरादून में आयोजित प्रशासकीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री के सम्मुख मामले को रखा गया है, जिसमें मुख्यमंत्री की ओर से योजना के पुनर्गठन के लिए सकारात्मक आश्वासन दिया गया है।
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इंजीनियरिंग कालेज घुड़दौड़ी के लिए वर्ष 1996 में बनी पेयजल योजना वर्ष 2011 तक के लिए डिजायन की गई थी, जिससे पेयजल समस्या से जूझ रहे 58 गांवों के ग्रामीणों को भी योजना से जोड़ा गया था, लेकिन योजना की पाइप लाइन जर्जर होने से आए दिन पेयजल आपूर्ति में समस्या बनी है। इंजीनियरिंग कालेज के प्रभारी कुलसचिव मनोज कुमार पांडा ने बताया कि कई बार पेयजल योजना के पाईप फट जाने से पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है। ऐसे में रिजर्व टैंक से परिसर की आपूर्ति में कटौती करनी पड़ती है। इसके बाद भी अगर योजना से आपूर्ति सुचारु नहीं हुई तो टैंकरों से आपूर्ति करवाई जाती है। वहीं इस दौरान योजना से जुड़े घुड़दौड़ी, अरकंड़ी, भैसवाड़ा, मजाकोट, देहरलचौरी आदि गांवों के ग्रामीणों को भी पेयजल समस्या से जूझना पड़ता है। कुलसचिव पांडा ने बताया कि वर्ष 2011 में योजना का पुनर्गठन किया जाना था, लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी बजट के अभाव में पुनर्गठन नहीं हो पाया है। बताया कि 16 जून को देहरादून में आयोजित प्रशासकीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री के सम्मुख मामले को रखा गया है, जिसमें मुख्यमंत्री की ओर से योजना के पुनर्गठन के लिए सकारात्मक आश्वासन दिया गया है।
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