{"_id":"5b2695ea4f1c1bf67a8b5a8b","slug":"152925540511-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मरीज के पेट से निकाली दोमुंही पित की थैली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मरीज के पेट से निकाली दोमुंही पित की थैली
Updated Sun, 17 Jun 2018 10:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर के सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. श्वेताभ प्रधान की टीम ने एक मरीज के पेट से बाइलॉब्ड गाल ब्लाडर (दो मुंह वाली पित्त की थैली) को सफलतापूर्वक निकाल लिया। मेडिकल साइंस के अनुसार यह पैदायशी एबनॉर्मलिटी (असामान्यता) है, जो 4000 में से एक इनसान में हो सकती है।
एक स्थानीय व्यक्ति को काफी दिनों से पेट में दर्द हो रहा था। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में उसके पित्त की थैली में पथरी निकली। उसको पित्त की थैली निकालने की सलाह दी गई। मेडिकल कालेज श्रीनगर के सर्जन डा. श्वेताभ प्रधान ने लेप्रोस्कोपी (दूरबीन) से पित्त की थैली निकालने का निर्णय लिया, लेकिन जब आपरेशन करते हुए कैमरे को पेट में डाला गया, तो मरीज के पेट में दोमुंही पित्त की थैली दिखाई दी। अल्ट्रासाउंड परीक्षण में यह नहीं दिखा था। लगभग एक घंटे के ऑपरेशन के बाद पित्त की थैली निकाल ली गई।
डा. प्रधान ने बताया कि दोमुंही पित्त की थैली बहुत कम मरीजों में होती है। दो मुंह होने के कारण इसको लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकालना मुश्किल होता है, लेकिन सर्जरी होने पर इसको सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। उन्होंने बताया कि मरीज स्वस्थ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एक स्थानीय व्यक्ति को काफी दिनों से पेट में दर्द हो रहा था। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में उसके पित्त की थैली में पथरी निकली। उसको पित्त की थैली निकालने की सलाह दी गई। मेडिकल कालेज श्रीनगर के सर्जन डा. श्वेताभ प्रधान ने लेप्रोस्कोपी (दूरबीन) से पित्त की थैली निकालने का निर्णय लिया, लेकिन जब आपरेशन करते हुए कैमरे को पेट में डाला गया, तो मरीज के पेट में दोमुंही पित्त की थैली दिखाई दी। अल्ट्रासाउंड परीक्षण में यह नहीं दिखा था। लगभग एक घंटे के ऑपरेशन के बाद पित्त की थैली निकाल ली गई।
विज्ञापन
डा. प्रधान ने बताया कि दोमुंही पित्त की थैली बहुत कम मरीजों में होती है। दो मुंह होने के कारण इसको लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकालना मुश्किल होता है, लेकिन सर्जरी होने पर इसको सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। उन्होंने बताया कि मरीज स्वस्थ है।
विज्ञापन