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दो से तीन किमी पैदल चलकर प्यास बुझा रहे हैं थराली के लोग
Updated Tue, 12 Jun 2018 10:52 PM IST
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थराली। दशकों पुरानी पेयजल लाइनों के स्रोत सूखने से तहसील के 12 से अधिक गांवों की 5100 की आबादी पेयजल किल्लत झेल रही है। ऐसे में ग्रामीण दो से तीन किमी पैदल चलकर गदेरों के पानी से प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
हरिनगर लेटाल के प्रधान दान सिंह कर्म्याल, पारथा के भोला राम, पूर्व क्षेत्र पंचायत सुरमा देवी और जयराम का कहना है कि थराली के कुराड़, पारथा, हरिनगर लेटाल, सगवाड़ा, ढूंगाखोली और तुंगेश्वर के साथ-साथ नारायणबगड़ ब्लाक के मैटा-तल्ला और जीआईसी आलकोट, आंगतोली और सेनार में पेयजल की किल्लत बनी है। कुराड़ के लोग पांगर गदेरे से पानी ढो रहे हैं, जबकि सगवाड़ा के लोग 2 किमी पैदल चलकर बरमाड़ी गदेरे से पानी पीठ पर ढोकर ला रहे हैं। कुराड़ के भास्कर पांडे ने बताया कि कुराड़ की 1600, पारथा की 1300, हरिनगर लेटाल की 900, सगवाड़ा की 600, ढुंगाखोली की 500 और रिंगालघेर की 200 से अधिक आबादी है, लेकिन यहां पेयजल लाइनें पुरानी और जर्जर हैं। उन्होंने कहा कि स्रोत पर पहले पानी कम था लेकिन अब स्रोत ही सूख चुका है। ऐसे में यहां नए स्रोतों से नई पेयजल लाइन बनाने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से जल्द पेयजल योजना के निर्माण की मांग की। जल निगम के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र मिश्रा का कहना है कि जिन गांवों में पेयजल किल्लत है उनके लिए नई स्कीमों की डीपीआर शासन में भेजी गई है। स्वीकृत मिलने पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
हरिनगर लेटाल के प्रधान दान सिंह कर्म्याल, पारथा के भोला राम, पूर्व क्षेत्र पंचायत सुरमा देवी और जयराम का कहना है कि थराली के कुराड़, पारथा, हरिनगर लेटाल, सगवाड़ा, ढूंगाखोली और तुंगेश्वर के साथ-साथ नारायणबगड़ ब्लाक के मैटा-तल्ला और जीआईसी आलकोट, आंगतोली और सेनार में पेयजल की किल्लत बनी है। कुराड़ के लोग पांगर गदेरे से पानी ढो रहे हैं, जबकि सगवाड़ा के लोग 2 किमी पैदल चलकर बरमाड़ी गदेरे से पानी पीठ पर ढोकर ला रहे हैं। कुराड़ के भास्कर पांडे ने बताया कि कुराड़ की 1600, पारथा की 1300, हरिनगर लेटाल की 900, सगवाड़ा की 600, ढुंगाखोली की 500 और रिंगालघेर की 200 से अधिक आबादी है, लेकिन यहां पेयजल लाइनें पुरानी और जर्जर हैं। उन्होंने कहा कि स्रोत पर पहले पानी कम था लेकिन अब स्रोत ही सूख चुका है। ऐसे में यहां नए स्रोतों से नई पेयजल लाइन बनाने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से जल्द पेयजल योजना के निर्माण की मांग की। जल निगम के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र मिश्रा का कहना है कि जिन गांवों में पेयजल किल्लत है उनके लिए नई स्कीमों की डीपीआर शासन में भेजी गई है। स्वीकृत मिलने पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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