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बैरागढ़ गांव क्षेत्र में फिर मंडराने लगा बाढ़ का खतरा
Updated Wed, 06 Jun 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
आपदा प्रभावित यमकेश्वर के बैरागढ़ गांव की ओर पौड़ी जिला प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है, जिसके चलते यहां के ग्रामीणों को इस साल की बरसात में फिर से हेंवल नदी में बाढ़ से जानमाल के नुकसान की आशंका सताने लगी है। बीते शुक्रवार की शाम आई तेज बारिश के चलते वर्ष 2014 के आपदा प्रभावित यमकेश्वर प्रखंड के बैरागढ़ गांव में समीपवर्ती कुत्ताकाटली गदेरे, भक्ता गदेरे और ढूंगारगड़ा गदेरे से बारिश के पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा घुस गया।
ग्राम प्रधान अरुण जुगलाण ने बताया कि जिला प्रशासन, सिंचाई मंत्री, क्षेत्रीय विधायक और सिंचाई विभाग से गांव की सुरक्षा के लिए गदेरों और हेंवल नदी के किनारे तटबंध निर्माण की मांग उठाई जा चुकी है, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि बीती एक जून को जिला योजना की बैठक में भी इस मामले को उठाया जा चुका है, बावजूद इसके इस दिशा में पौड़ी प्रशासन और सरकार कोई कदम उठाने को तैयार नहीं है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में हेंवल में आई बाढ़ के कारण बैरागढ़ गांव आपदा प्रभावित गांव में शामिल हो चुका है। इसके बाद से लगातार हेंवल के तटों और कुत्ताकाटली, भक्ता व ढूंगारगड़ा गदेरे से मलबा हटाने और सुरक्षा दीवार की मांग उठाई जा रही है। लेकिन सरकार ने अब तक ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि उक्त गदेरों से मलबे को जल्द नहीं हटाया गया तो आने वाली बरसात में गांव को भारी नुकसान हो सकता है।
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आपदा प्रभावित यमकेश्वर के बैरागढ़ गांव की ओर पौड़ी जिला प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है, जिसके चलते यहां के ग्रामीणों को इस साल की बरसात में फिर से हेंवल नदी में बाढ़ से जानमाल के नुकसान की आशंका सताने लगी है। बीते शुक्रवार की शाम आई तेज बारिश के चलते वर्ष 2014 के आपदा प्रभावित यमकेश्वर प्रखंड के बैरागढ़ गांव में समीपवर्ती कुत्ताकाटली गदेरे, भक्ता गदेरे और ढूंगारगड़ा गदेरे से बारिश के पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा घुस गया।
ग्राम प्रधान अरुण जुगलाण ने बताया कि जिला प्रशासन, सिंचाई मंत्री, क्षेत्रीय विधायक और सिंचाई विभाग से गांव की सुरक्षा के लिए गदेरों और हेंवल नदी के किनारे तटबंध निर्माण की मांग उठाई जा चुकी है, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि बीती एक जून को जिला योजना की बैठक में भी इस मामले को उठाया जा चुका है, बावजूद इसके इस दिशा में पौड़ी प्रशासन और सरकार कोई कदम उठाने को तैयार नहीं है।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में हेंवल में आई बाढ़ के कारण बैरागढ़ गांव आपदा प्रभावित गांव में शामिल हो चुका है। इसके बाद से लगातार हेंवल के तटों और कुत्ताकाटली, भक्ता व ढूंगारगड़ा गदेरे से मलबा हटाने और सुरक्षा दीवार की मांग उठाई जा रही है। लेकिन सरकार ने अब तक ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि उक्त गदेरों से मलबे को जल्द नहीं हटाया गया तो आने वाली बरसात में गांव को भारी नुकसान हो सकता है।
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