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डीसीजीआई ने दी ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को हरी झंडी
Updated Sun, 03 Jun 2018 10:36 PM IST
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श्रीनगर। बेस अस्पताल में स्थित ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट (रक्त अवयवों को पृथक करने की इकाई) के संचालन की अनुमति मिल गई है। डीसीजीआई (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) से हरी झंडी मिलने के बाद उत्तराखंड के औषधि नियंत्रक (ड्रग कंट्रोलर) ने बेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर यूनिट संचालित करने को कहा है। यूनिट के संचालन के से अब एक यूनिट रक्त चार अलग-अलग जरूरतमंदों के काम आएगा। इससे रक्त बेकार नहीं जाएगा।
बेस अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट यूनिट संचालन करने की कार्रवाई लगभग चार साल से चल रही है, लेकिन सुस्त सरकारी प्रक्रिया
की वजह से अभी तक यूनिट चालू नहीं हो पाई थी। अक्तूबर 2016 में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) व राज्य ड्रग कंट्रोलर की संयुक्त टीम ने यूनिट का निरीक्षण किया। इसके बाद लंबे समय तक मामला ठप रहा। इसी वर्ष मार्च माह में केंद्र ने कुछ आपत्तियां लगाते हुए पत्र भेजा। बेस अस्पताल की ओर से आपत्तियों का निराकरण होने के बाद विगत 5 अप्रैल को जिला ड्रग इंस्पेक्टर ने यूनिट का निरीक्षण किया। इसके बाद अनुमति मिलने की उम्मीद बंध गई थी। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि ब्लड बैंक के लाइसेंस पर ही यूनिट संचालन की अनुमति मिल गई है। मशीनों की भी जांच हो गई है। जल्द यूनिट काम करना शुरू कर देगी। इसके अलावा यूनिट की स्थापना न होना भी पीजी कोर्सेज के शुरू होने में बाधा बना हुआ था।
यह होगा फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट मेें रक्त के प्लेटलेट्स, लाल रक्त कणिकाएं, प्लाज्मा आदि रक्त अवयव अलग हो जाएंगे। इसका फायदा यह है, कि किसी मरीज के रक्त में जिस अवयव की कमी होगी, उसी अवयव को ही चढ़ाया जाएगा। यानि कि एक यूनिट खून का उपयोग अलग-अलग मरीजों में होगा। इसका सबसे अधिक फायदा डेंगू और जले हुए रोगियों के उपचार में होगा।
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बेस अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट यूनिट संचालन करने की कार्रवाई लगभग चार साल से चल रही है, लेकिन सुस्त सरकारी प्रक्रिया
की वजह से अभी तक यूनिट चालू नहीं हो पाई थी। अक्तूबर 2016 में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) व राज्य ड्रग कंट्रोलर की संयुक्त टीम ने यूनिट का निरीक्षण किया। इसके बाद लंबे समय तक मामला ठप रहा। इसी वर्ष मार्च माह में केंद्र ने कुछ आपत्तियां लगाते हुए पत्र भेजा। बेस अस्पताल की ओर से आपत्तियों का निराकरण होने के बाद विगत 5 अप्रैल को जिला ड्रग इंस्पेक्टर ने यूनिट का निरीक्षण किया। इसके बाद अनुमति मिलने की उम्मीद बंध गई थी। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि ब्लड बैंक के लाइसेंस पर ही यूनिट संचालन की अनुमति मिल गई है। मशीनों की भी जांच हो गई है। जल्द यूनिट काम करना शुरू कर देगी। इसके अलावा यूनिट की स्थापना न होना भी पीजी कोर्सेज के शुरू होने में बाधा बना हुआ था।
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यह होगा फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट मेें रक्त के प्लेटलेट्स, लाल रक्त कणिकाएं, प्लाज्मा आदि रक्त अवयव अलग हो जाएंगे। इसका फायदा यह है, कि किसी मरीज के रक्त में जिस अवयव की कमी होगी, उसी अवयव को ही चढ़ाया जाएगा। यानि कि एक यूनिट खून का उपयोग अलग-अलग मरीजों में होगा। इसका सबसे अधिक फायदा डेंगू और जले हुए रोगियों के उपचार में होगा।
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