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नव सृजित कविता संग्रह अलंकृता का विमोचन
Updated Tue, 29 May 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,श्यामपुर।
नव चेतना विद्यालय, नीमकरोली नगर में वरिष्ठ कवि डॉ. विक्रम अलंकार की कविता संग्रह ‘अलंकृता’ का विधिवत लोकार्पण किया गया। इस मौके पर मध्यप्रदेश के संत चिन्मयानंद ने कहा कि साहित्य समाज की दर्पण है। लेखक डॉ. विक्रम अलंकार ने कहा कि उनके रचनाकर्म का उद्देश्य रचना धर्मिता को प्रवाह देना है। इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में सुनील थपलियाल ने संघर्षों से पथ निकलेगा, अशोक क्रेजी ने नादान हूं पर सब जानता हूं, महेश चिटकारिया ने मैं शहर में वो कोना सजाता हूं, रामकृष्ण पोखरियाल ने कविता मन की गीता है, नरेंद्र रयाल ने मैंने मन में ठानी है, कविता तलवार बनानी है, रचना पेश की।
इस अवसर पर रचनाकार प्रेम सडाना ने सागर जिसमें दूर क्षितिज तक, शिव प्रसाद बहुगुणा ने कर्नाटक का योग नाटक सिखा गया, सत्येंद्र चौहान ने सर्ग दिदा पाणी-पाणी खल्ये दे, महिपाल त्यागी ने तुम नई धरती नया आकाश रच कर देख लो, आरसी पांडे ने देश भक्ति पर आधारित रचना प्रस्तुत की। इस अवसर पर रम्माबल्लभ भट्ट, पुष्पा ध्यानी, आरके दुबे, रमेश नैथानी आदि मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रतन सिंह पंवार तथा संचालन डॉ. सुनील थपयिाल ने किया।
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नव चेतना विद्यालय, नीमकरोली नगर में वरिष्ठ कवि डॉ. विक्रम अलंकार की कविता संग्रह ‘अलंकृता’ का विधिवत लोकार्पण किया गया। इस मौके पर मध्यप्रदेश के संत चिन्मयानंद ने कहा कि साहित्य समाज की दर्पण है। लेखक डॉ. विक्रम अलंकार ने कहा कि उनके रचनाकर्म का उद्देश्य रचना धर्मिता को प्रवाह देना है। इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में सुनील थपलियाल ने संघर्षों से पथ निकलेगा, अशोक क्रेजी ने नादान हूं पर सब जानता हूं, महेश चिटकारिया ने मैं शहर में वो कोना सजाता हूं, रामकृष्ण पोखरियाल ने कविता मन की गीता है, नरेंद्र रयाल ने मैंने मन में ठानी है, कविता तलवार बनानी है, रचना पेश की।
इस अवसर पर रचनाकार प्रेम सडाना ने सागर जिसमें दूर क्षितिज तक, शिव प्रसाद बहुगुणा ने कर्नाटक का योग नाटक सिखा गया, सत्येंद्र चौहान ने सर्ग दिदा पाणी-पाणी खल्ये दे, महिपाल त्यागी ने तुम नई धरती नया आकाश रच कर देख लो, आरसी पांडे ने देश भक्ति पर आधारित रचना प्रस्तुत की। इस अवसर पर रम्माबल्लभ भट्ट, पुष्पा ध्यानी, आरके दुबे, रमेश नैथानी आदि मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रतन सिंह पंवार तथा संचालन डॉ. सुनील थपयिाल ने किया।
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