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दावानल: आज के साथ-साथ भविष्य को नुकसान
Updated Fri, 25 May 2018 10:52 PM IST
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संदीप थपलियाल
श्रीनगर। जंगलों की आग वर्तमान पर बुरा असर तो डाल ही रही है, भविष्य में इसका और नुकसान झेल पड़ सकता है। आग से मनुष्य के लिए उपयोगी जीव-जंतुओं का जीवन संकट में है। यदि हर साल ऐसे ही जंगल आग की चपेट में आते गए, तो जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी। इसका सीधा असर वनस्पतियों की उपज पर पड़ेगा, क्योंकि परागण और बीज सुशप्तावस्था तोड़ने व बीजों के प्रसार में इन्हीं जीव-जंतुओं की अहम भूमिका है।
केंद्रीय गढ़वाल विवि श्रीनगर के जंतु विज्ञान विभाग ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। जंतु विज्ञानियों का कहना है कि जंगलों की आग से ऐसी वनस्पतियां व जीव कम हो रहे हैं, जो सिर्फ हिमालय में पाए जाते हैं। आग के कारण उनका जीवन चक्र टूट रहा है। पहाड़ में जंगल की आग की विभीषिका मैदान की अपेक्षा भीषण होती है, क्योंकि पहाड़ में आग गोल घेरे में लगती है, जिसमें जीव-जंतु फंस जाते हैं। यदि कोई बच भी जाए, तो अपंग हो जाते हैं।
विवि के जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एसएन बहुगुणा बताते हैं कि मैदानी क्षेत्रों में आग लगने पर जानवरों के सुरक्षित निकलने के कई मार्ग होते हैं, लेकिन पहाड़ में ऐसा नहीं हो पाता है। उन्होंने बताया कि वनस्पतियों की उपज बढ़ाने में पक्षी अहम भूमिका निभाते हैं। कई वनस्पतियां (अंजीर, बरगद, हिसर व बेडू) तभी उगती हैं, जब उनके बीज पक्षी मल के साथ बाहर निकालते हैं। इन दिनों पक्षियों के अंडे देने व बच्चे निकलने का समय है। बड़े पक्षी जमीन में घास में घोसला बनाते हैं, जबकि छोटे पक्षी पेड़ों में। आग इन सबको आगोश में ले लेती है। इस आग में बड़े पक्षी, उनके बच्चे और अंडे नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि बड़े पक्षी ज्यादा दूर तक उड़ नहीं पाते हैं।
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प्रो. बहुुगुणा ने बताया कि उपयोगी सरीसृप आग में मारे जाते हैं। जैसे सांप को मारने वाला गोह या चूहों का शिकार करने वाले सांप। यह जीव न तो उड़ सकते हैं और न ही भाग सकते हैं। ऐसे ही दीमक को चट करने वाले पेगोंलिन भी है। जंतु विज्ञानियों का कहना है कि यदि समय रहते जंगलों की आग पर काबू नहीं पाया गया तो तो वनस्पतियों व जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां देखनी मुश्किल हो जाएंगी। इसका नुकसान सीधे मानव जाति को होगा।
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श्रीनगर। जंगलों की आग वर्तमान पर बुरा असर तो डाल ही रही है, भविष्य में इसका और नुकसान झेल पड़ सकता है। आग से मनुष्य के लिए उपयोगी जीव-जंतुओं का जीवन संकट में है। यदि हर साल ऐसे ही जंगल आग की चपेट में आते गए, तो जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी। इसका सीधा असर वनस्पतियों की उपज पर पड़ेगा, क्योंकि परागण और बीज सुशप्तावस्था तोड़ने व बीजों के प्रसार में इन्हीं जीव-जंतुओं की अहम भूमिका है।
केंद्रीय गढ़वाल विवि श्रीनगर के जंतु विज्ञान विभाग ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। जंतु विज्ञानियों का कहना है कि जंगलों की आग से ऐसी वनस्पतियां व जीव कम हो रहे हैं, जो सिर्फ हिमालय में पाए जाते हैं। आग के कारण उनका जीवन चक्र टूट रहा है। पहाड़ में जंगल की आग की विभीषिका मैदान की अपेक्षा भीषण होती है, क्योंकि पहाड़ में आग गोल घेरे में लगती है, जिसमें जीव-जंतु फंस जाते हैं। यदि कोई बच भी जाए, तो अपंग हो जाते हैं।
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विवि के जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एसएन बहुगुणा बताते हैं कि मैदानी क्षेत्रों में आग लगने पर जानवरों के सुरक्षित निकलने के कई मार्ग होते हैं, लेकिन पहाड़ में ऐसा नहीं हो पाता है। उन्होंने बताया कि वनस्पतियों की उपज बढ़ाने में पक्षी अहम भूमिका निभाते हैं। कई वनस्पतियां (अंजीर, बरगद, हिसर व बेडू) तभी उगती हैं, जब उनके बीज पक्षी मल के साथ बाहर निकालते हैं। इन दिनों पक्षियों के अंडे देने व बच्चे निकलने का समय है। बड़े पक्षी जमीन में घास में घोसला बनाते हैं, जबकि छोटे पक्षी पेड़ों में। आग इन सबको आगोश में ले लेती है। इस आग में बड़े पक्षी, उनके बच्चे और अंडे नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि बड़े पक्षी ज्यादा दूर तक उड़ नहीं पाते हैं।
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प्रो. बहुुगुणा ने बताया कि उपयोगी सरीसृप आग में मारे जाते हैं। जैसे सांप को मारने वाला गोह या चूहों का शिकार करने वाले सांप। यह जीव न तो उड़ सकते हैं और न ही भाग सकते हैं। ऐसे ही दीमक को चट करने वाले पेगोंलिन भी है। जंतु विज्ञानियों का कहना है कि यदि समय रहते जंगलों की आग पर काबू नहीं पाया गया तो तो वनस्पतियों व जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां देखनी मुश्किल हो जाएंगी। इसका नुकसान सीधे मानव जाति को होगा।