{"_id":"5af756644f1c1bde408b4d23","slug":"152615894511-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मूल स्थान मेंद्रथ लौटी बाशिक महाराज की पालकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मूल स्थान मेंद्रथ लौटी बाशिक महाराज की पालकी
Updated Sun, 13 May 2018 02:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला/त्यूनी।
200 साल बाद केदारपुरी(केदारनाथ) रवाना हुई बाशिक महाराज की पालकी शनिवार को अपने मूल स्थान मेंद्रथ लौट आई। इस दौरान पूरा गांव देव उद्घोष से गूंज उठा। ढोल-दमाऊ की थाप पर देव पालकी का चावल और फूलों से स्वागत किया गया।
देवता के स्वागत के लिए हनोल स्थित महासू देवता, ठडियार स्थित पबासी देवता और रायगी स्थित शेड़कुड़िया देवता के डोरिया भी शामिल हुए। इस मौके तीन दिवसीय जप पाठ का आयोजन किया गया। भंडारी ब्रह्मानंद डोभाल ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले जप पाठ के बाद सोमवार की शाम चार बजे देव पालकी मंदिर के गृभ गृह में प्रवेश करेगी। इस मौके पर भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।
मालूम हो कि 22 अप्रैल को बाशिक देवता की पालकी मेंद्रथ स्थित मंदिर से केदारनाथ के लिए रवाना हुई थी। सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ करीब 300 किमी की पैदल यात्रा तय कर देव पालकी 11 दिन बाद दो मई की शाम को केेदारनाथ पहुंची थी। जहां शाम के समय देव पालकी ने आराध्य के दर्शन किए थे। 12 मई को देव पालकी वापस अपने मूल स्थान मेंद्रथ पहुंच गई। इस मौके पर बजीर दीवान सिंह राणा, पुजारी अभी दत्त डोभाल, आत्माराम जोशी, जगमोहन राणा, नारायण सिंह पंवार, देवमाली भवान सिंह, रिंकू पंवार, रमेश डोभाल, रामलाल सेमवाल, कबीर दास, लायक राम, ऋषभ, प्रदीप कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
200 साल बाद केदारपुरी(केदारनाथ) रवाना हुई बाशिक महाराज की पालकी शनिवार को अपने मूल स्थान मेंद्रथ लौट आई। इस दौरान पूरा गांव देव उद्घोष से गूंज उठा। ढोल-दमाऊ की थाप पर देव पालकी का चावल और फूलों से स्वागत किया गया।
देवता के स्वागत के लिए हनोल स्थित महासू देवता, ठडियार स्थित पबासी देवता और रायगी स्थित शेड़कुड़िया देवता के डोरिया भी शामिल हुए। इस मौके तीन दिवसीय जप पाठ का आयोजन किया गया। भंडारी ब्रह्मानंद डोभाल ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले जप पाठ के बाद सोमवार की शाम चार बजे देव पालकी मंदिर के गृभ गृह में प्रवेश करेगी। इस मौके पर भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।
विज्ञापन
मालूम हो कि 22 अप्रैल को बाशिक देवता की पालकी मेंद्रथ स्थित मंदिर से केदारनाथ के लिए रवाना हुई थी। सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ करीब 300 किमी की पैदल यात्रा तय कर देव पालकी 11 दिन बाद दो मई की शाम को केेदारनाथ पहुंची थी। जहां शाम के समय देव पालकी ने आराध्य के दर्शन किए थे। 12 मई को देव पालकी वापस अपने मूल स्थान मेंद्रथ पहुंच गई। इस मौके पर बजीर दीवान सिंह राणा, पुजारी अभी दत्त डोभाल, आत्माराम जोशी, जगमोहन राणा, नारायण सिंह पंवार, देवमाली भवान सिंह, रिंकू पंवार, रमेश डोभाल, रामलाल सेमवाल, कबीर दास, लायक राम, ऋषभ, प्रदीप कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन