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परमार्थ में रशियन जोडे की भारतीय रीति रिवाज से शादी
Updated Sun, 13 May 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,मुनिकीरेती ।
परमार्थ निकेतन आश्रम गंगा तट पर वैदिक विधि विधान के साथ रूस के सोची शहर से आए रशियन जोड़ा हिंदू रीति रिवाज के साथ विवाह बंधन में बंध गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने वर रुस्लान और वधु वेलोवाइवा को सुख, शांति व समृद्ध जीवन का आशीर्वाद दिया और रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया। बताया गया कि इस दौरान वर-वधु को एक ही माला पहनाकर दो शरीर एक प्राण की तरह जीने का संदेश दिया गया।
आश्रम की ओर से बताया गया कि विवाह के लिए परमार्थ गंगातट पर इस जोड़े को भारतीय संस्कृति और संस्कारों की महिमा खींच लाई। भौतिकता से दूर आध्यात्मिक वातावरण में वेदमंत्रों के साथ रुस्लान और वेलोवाइवा ने सात फेरे लेकर रूस की संस्कृति के साथ भारत की संस्कृति को भी आत्मसात किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में परमार्थ गुरुकुल के आचार्यों व ऋषिकुमारों ने विवाह संपन्न कराया।
इस दौरान स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि विवाह में केवल दो दिलों का नहीं बल्कि दो परिवारों का मेल भी होता है। उन्होंने कहा कि मां गंगा के तट पर दुनिया के दो देशों की संस्कृतियों का मिलन एक ऐतिहासिक अवसर है। जब लोग गोवा के तट को छोड़कर गंगा के तट पर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन की शुरुआत गंगा तट से शुरू हो, तो जीवन भी गंगा सागर बन जाता है।
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परमार्थ निकेतन आश्रम गंगा तट पर वैदिक विधि विधान के साथ रूस के सोची शहर से आए रशियन जोड़ा हिंदू रीति रिवाज के साथ विवाह बंधन में बंध गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने वर रुस्लान और वधु वेलोवाइवा को सुख, शांति व समृद्ध जीवन का आशीर्वाद दिया और रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया। बताया गया कि इस दौरान वर-वधु को एक ही माला पहनाकर दो शरीर एक प्राण की तरह जीने का संदेश दिया गया।
आश्रम की ओर से बताया गया कि विवाह के लिए परमार्थ गंगातट पर इस जोड़े को भारतीय संस्कृति और संस्कारों की महिमा खींच लाई। भौतिकता से दूर आध्यात्मिक वातावरण में वेदमंत्रों के साथ रुस्लान और वेलोवाइवा ने सात फेरे लेकर रूस की संस्कृति के साथ भारत की संस्कृति को भी आत्मसात किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में परमार्थ गुरुकुल के आचार्यों व ऋषिकुमारों ने विवाह संपन्न कराया।
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इस दौरान स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि विवाह में केवल दो दिलों का नहीं बल्कि दो परिवारों का मेल भी होता है। उन्होंने कहा कि मां गंगा के तट पर दुनिया के दो देशों की संस्कृतियों का मिलन एक ऐतिहासिक अवसर है। जब लोग गोवा के तट को छोड़कर गंगा के तट पर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन की शुरुआत गंगा तट से शुरू हो, तो जीवन भी गंगा सागर बन जाता है।
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