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मैदानी क्षेत्रों की प्राइवेट नौकरी छोड़कर स्वरोजगार की ओर मुड़ रहे युवा
Updated Mon, 07 May 2018 10:48 PM IST
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प्रमोद सेमवाल
गोपेश्वर। मैदानी क्षेत्रों में नौकरी के लिए पसीना बहाने वाले पहाड़ के युवा अब स्वरोजगार की राह पर चल पड़े हैं। इस बार कई युवाओं ने चारधाम यात्रा पड़ावों पर होटल, ढाबे स्थापित कर पहाड़ से हो रहे पलायन को आइना दिखाने का काम किया है।
वर्ष 2010 से 2016 तक मंडल घाटी के ग्वाड़ गांव निवासी नवीन सिंह ने दुबई में मार्केटिंग का कार्य किया, लेकिन फिर मैदानी क्षेत्रों की दौड़ लगाने के बजाय गांव में ही स्वरोजगार की योजना बनाई। वर्ष 2017 में उन्होंने चमोली-ऊखीमठ सड़क किनारे होटल स्थापित किया। उनका यह कारोबार सफल रहा है। आज नवीन चारधाम यात्रा से प्रतिदिन करीब दस हजार रुपये कमा रहे हैं। क्षेत्र के चार युवाओं को भी उन्होंने होटल में रोजगार दिया है। पीपलकोटी, पाखी, गडोरा, भीमतला, पांडुकेश्वर, मारवाड़ी, गोविंदघाट में भी स्थानीय युवा मैदानी क्षेत्रों की प्राइवेट नौकरी त्यागकर चारधाम यात्रा रूट पर अपना रोजगार शुरू कर रहे हैं।
नवीन कहते हैं कि मैदानी क्षेत्रों में नौकरी के लिए भटकने से अच्छा चारधाम यात्रा रूट पर स्वरोजगार कर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। पीपलकोटी के मनोज सिंह ने भी चार साल दिल्ली में प्राइवेट नौकरी की। इस बार उन्होंने बदरीनाथ हाईवे पर ढाबा संचालित करने की योजना बनाई। योजना सफल रही और वह यात्रा से ही अपने घर-परिवार की आजीविका को चला रहे हैं। जोशीमठ के पुष्कर सिंह और गोविंदघाट के मोहन सिंह भी मैदानी क्षेत्रों की प्राइवेट नौकरी छोड़कर इस बार बदरीनाथ यात्रा रूट पर ढाबा चला रहे हैं।
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कोट----------------
युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए समय-समय पर प्रोत्साहित किया जाता है। लॉज, होटल, ढाबा संचालित करने के लिए युवाओं को वीर चंद्रसिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना से लाभान्वित किया जाता है। वर्ष 2002 से मौजूदा समय तक 520 युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा दी जा चुकी है।
-एसएस यादव, जिला पर्यटन अधिकारी, चमोली
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गोपेश्वर। मैदानी क्षेत्रों में नौकरी के लिए पसीना बहाने वाले पहाड़ के युवा अब स्वरोजगार की राह पर चल पड़े हैं। इस बार कई युवाओं ने चारधाम यात्रा पड़ावों पर होटल, ढाबे स्थापित कर पहाड़ से हो रहे पलायन को आइना दिखाने का काम किया है।
वर्ष 2010 से 2016 तक मंडल घाटी के ग्वाड़ गांव निवासी नवीन सिंह ने दुबई में मार्केटिंग का कार्य किया, लेकिन फिर मैदानी क्षेत्रों की दौड़ लगाने के बजाय गांव में ही स्वरोजगार की योजना बनाई। वर्ष 2017 में उन्होंने चमोली-ऊखीमठ सड़क किनारे होटल स्थापित किया। उनका यह कारोबार सफल रहा है। आज नवीन चारधाम यात्रा से प्रतिदिन करीब दस हजार रुपये कमा रहे हैं। क्षेत्र के चार युवाओं को भी उन्होंने होटल में रोजगार दिया है। पीपलकोटी, पाखी, गडोरा, भीमतला, पांडुकेश्वर, मारवाड़ी, गोविंदघाट में भी स्थानीय युवा मैदानी क्षेत्रों की प्राइवेट नौकरी त्यागकर चारधाम यात्रा रूट पर अपना रोजगार शुरू कर रहे हैं।
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नवीन कहते हैं कि मैदानी क्षेत्रों में नौकरी के लिए भटकने से अच्छा चारधाम यात्रा रूट पर स्वरोजगार कर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। पीपलकोटी के मनोज सिंह ने भी चार साल दिल्ली में प्राइवेट नौकरी की। इस बार उन्होंने बदरीनाथ हाईवे पर ढाबा संचालित करने की योजना बनाई। योजना सफल रही और वह यात्रा से ही अपने घर-परिवार की आजीविका को चला रहे हैं। जोशीमठ के पुष्कर सिंह और गोविंदघाट के मोहन सिंह भी मैदानी क्षेत्रों की प्राइवेट नौकरी छोड़कर इस बार बदरीनाथ यात्रा रूट पर ढाबा चला रहे हैं।
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युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए समय-समय पर प्रोत्साहित किया जाता है। लॉज, होटल, ढाबा संचालित करने के लिए युवाओं को वीर चंद्रसिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना से लाभान्वित किया जाता है। वर्ष 2002 से मौजूदा समय तक 520 युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा दी जा चुकी है।
-एसएस यादव, जिला पर्यटन अधिकारी, चमोली