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साढ़े पांच किमी पैदल, दिखा दिया सड़क से जुड़ा हुआ
Updated Tue, 24 Apr 2018 10:40 PM IST
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गैरसैंण। अट्ठारह साल पूर्व पीएमजीसवाई के सर्वे में अधिकारियों की ओर से की गई गलती का खामियाजा ब्लाक के कोलानी और नौगांव के ग्रामीण आज भी भुगत रहे हैं। स्थिति यह है कि दोनों गांव सड़क मार्ग से करीब साढ़े पांच किमी की पैदल दूरी पर हैं, लेकिन पीएमजीएसवाई के ऑनलाइन सड़क नेटवर्क में इन गांवों को सड़क से जुड़ा हुआ दिखाया गया है। ऐसे में गांवों के लिए हर बार की जा रहा सड़क का सर्वे ऑनलाइन प्रक्रिया में पास नहीं हो पा रही है।
कोलानी के प्रधान दामोदर प्रसाद जोशी ने बताया कि कोलानी और नौगांव में करीब एक हजार की आबादी रहती है। ग्रामीण माईथान से करीब साढ़े पांच किमी पैदल चलकर कोलानी गांव तक पहुंचते हैं। बीमार के साथ ही सामान ढुुलान में ग्रामीणों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण लंबे समय से यहां सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पीएमजीएसवाई ने वर्ष 2016-17 में मार्ग निर्माण के लिए 5 किमी का सर्वे कर रिपोर्ट शासन को भेजी, लेकिन केंद्र सरकार पीएमजीएसवाई के ऑनलाइन पोर्टल में माईथान से कोलानी तक सड़क निर्माण को इंटरनेट में दर्ज करने की बात कहकर प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। ग्रामीण हेमा देवी, गीता देवी, केशर सिंह आदि का कहना है कि विभागीय लापरवाही से दोनों गांवों की 1 हजार से अधिक की आबादी के लिए सड़क एक सपना बनकर रह गई है।
कोट
गलती किस स्तर पर हुई इसका संज्ञान नहीं है। पीएमजीएसवाई के ऑनलाइन पोर्टल में दोनों गांव सड़क से जुड़े हुए आ रहे हैं। मामले में संशोधन का प्रस्ताव भेजा गया है। संशोधन होने पर किए गए सर्वे के अनुसार सड़क की डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी। - प्रदीप नौटियाल अवर अभियंता पीएमजीएसवाई कर्णप्रयाग।
कोलानी के प्रधान दामोदर प्रसाद जोशी ने बताया कि कोलानी और नौगांव में करीब एक हजार की आबादी रहती है। ग्रामीण माईथान से करीब साढ़े पांच किमी पैदल चलकर कोलानी गांव तक पहुंचते हैं। बीमार के साथ ही सामान ढुुलान में ग्रामीणों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण लंबे समय से यहां सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पीएमजीएसवाई ने वर्ष 2016-17 में मार्ग निर्माण के लिए 5 किमी का सर्वे कर रिपोर्ट शासन को भेजी, लेकिन केंद्र सरकार पीएमजीएसवाई के ऑनलाइन पोर्टल में माईथान से कोलानी तक सड़क निर्माण को इंटरनेट में दर्ज करने की बात कहकर प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। ग्रामीण हेमा देवी, गीता देवी, केशर सिंह आदि का कहना है कि विभागीय लापरवाही से दोनों गांवों की 1 हजार से अधिक की आबादी के लिए सड़क एक सपना बनकर रह गई है।
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गलती किस स्तर पर हुई इसका संज्ञान नहीं है। पीएमजीएसवाई के ऑनलाइन पोर्टल में दोनों गांव सड़क से जुड़े हुए आ रहे हैं। मामले में संशोधन का प्रस्ताव भेजा गया है। संशोधन होने पर किए गए सर्वे के अनुसार सड़क की डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी। - प्रदीप नौटियाल अवर अभियंता पीएमजीएसवाई कर्णप्रयाग।
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