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स्वयं के उद्धार को मनुष्य का मुंह ताक रही गंगा
Updated Sun, 22 Apr 2018 02:28 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
मुनिकीरेती। प्रख्यात कथावाचक संत मोरारी बापू ने परमार्थ निकेतन पहुंचकर आश्रम की सांध्यकालीन गंगा आरती में शिरकत की। इस दौरान समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागृत करने के लिए संत समाज से एक मंच पर आकर कार्य करने का आह्वान किया गया। शनिवार को परमार्थ निकेतन पहुंचे संत मोरारी बापू ने आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि से भेंट की। इस मौके पर आश्रम के आचार्यों और गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने वैदिक मंत्रोच्चारणों के बीच उनका स्वागत किया। स्वामी चिदानंद मुनि ने उनसे आध्यात्म, सामाजिक समरसता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण आदि विषयों पर चर्चा की।
कहा कि वर्षों से मानव समाज का उद्धार कर रही मोक्षदायिनी वर्तमान में स्वयं के उद्धार के लिए मनुष्य का मुंह ताक रही है। उन्होंने कहा कि समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागृत करने के लिए संत समाज को एक मंच पर आकर कार्य करना होगा। विश्व की तमाम सभ्यताओं और संस्कृति का विकास किसी न किसी नदी के तट पर हुआ है। नदियां हमेशा से ही राष्ट्र की अर्थ व्यवस्था का आधार स्तंभ रही हैं। मानव सभ्यता के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इन नदियों को अवैज्ञानिक विकास से भयानक दुष्परिणाम भी भुगतना पड़ा है। वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण के कारण अनेक नदियों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। गंगा भी इससे अछूती नहीं है। इस दौरान संत मोरारी बापू ने परमार्थ निकेतन द्वारा गंगा स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
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मुनिकीरेती। प्रख्यात कथावाचक संत मोरारी बापू ने परमार्थ निकेतन पहुंचकर आश्रम की सांध्यकालीन गंगा आरती में शिरकत की। इस दौरान समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागृत करने के लिए संत समाज से एक मंच पर आकर कार्य करने का आह्वान किया गया। शनिवार को परमार्थ निकेतन पहुंचे संत मोरारी बापू ने आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि से भेंट की। इस मौके पर आश्रम के आचार्यों और गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने वैदिक मंत्रोच्चारणों के बीच उनका स्वागत किया। स्वामी चिदानंद मुनि ने उनसे आध्यात्म, सामाजिक समरसता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण आदि विषयों पर चर्चा की।
कहा कि वर्षों से मानव समाज का उद्धार कर रही मोक्षदायिनी वर्तमान में स्वयं के उद्धार के लिए मनुष्य का मुंह ताक रही है। उन्होंने कहा कि समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागृत करने के लिए संत समाज को एक मंच पर आकर कार्य करना होगा। विश्व की तमाम सभ्यताओं और संस्कृति का विकास किसी न किसी नदी के तट पर हुआ है। नदियां हमेशा से ही राष्ट्र की अर्थ व्यवस्था का आधार स्तंभ रही हैं। मानव सभ्यता के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इन नदियों को अवैज्ञानिक विकास से भयानक दुष्परिणाम भी भुगतना पड़ा है। वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण के कारण अनेक नदियों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। गंगा भी इससे अछूती नहीं है। इस दौरान संत मोरारी बापू ने परमार्थ निकेतन द्वारा गंगा स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
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