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प्रकृति के वरदान पर नेशनल पार्क बना अभिशाप
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
तीर्थनगरी के जो जलप्रपात विश्व के प्रकृति प्रेमियों, सैलानियों को आकर्षित करता है, इनके विकास को लेकर राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन कतई गंभीर नहीं है। पार्क के बफर जोन में पड़ने वाले जलप्रपात पार्क प्रशासन की अनदेखी से विकसित नहीं हो पा रहे हैं। जबकि पटना वाटरफॉल, गरुड़चट्टी और कालीकुंड झरनों को विकसित कर हर साल लाखों का राजस्व अर्जित किया जा सकता है।
राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क की गौहरी रेंज के अंतर्गत पड़ने वाले बफर जोन में गरुड़चट्टी झरना, पटना और कालीकुंड वाटरफॉल हैं। जो अंतरराष्ट्रीय आवाजाही वाले लक्ष्मणझूला क्षेत्र से महज 15 किमी. के दायरे में हैं। इन क्षेत्रों में हर साल आध्यात्मिक उन्नयन, ध्यान, योग और गंगा दर्शन-स्नान के लिए तीर्थक्षेत्र स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला आने वाले लाखों पर्यटक-तीर्थाटक इन जलप्रपातों का लुत्फ उठाने भी पहुंचते हैं। खासकर विदेशी पर्यटकों को ऊंची पहाडिय़ों से गिरती झरने की फुहारें खासा आकर्षित करते हैं। गर्मी के दिनों में यहां विदेशी सैलानियों की खासी आमद रहती है, लेकिन इन वाटरफॉल के विकास के लिए राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क और पौड़ी पर्यटन विभाग के पास कोई योजना नहीं है।
पथरीली पगडंडियां से पहुंचते हैं वाटरफॉल
प्राकृतिक झरनों तक पहुंचने का सफर अत्यधिक कष्टकारी है। इनमें जाने वाले सैलानियों को खड़ी चढ़ाई और पथरीली राह नापनी पड़ती है। वाटर फॉल के आसपास न तो बैठने की सुविधा है और न ही भूख-प्यास मिटाने का इंतजाम। लिहाजा पर्यटकों को झरनों के समीप पत्थरों पर बैठकर सुस्ताना पड़ता है। उन्हें लक्ष्मणझूला या गरुड़चट्टी से खाने पीने की वस्तुएं खरीदकर ढोनी पड़ती हैं।
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पार्क तक नहीं पहुंचा टूरिज्म का डेवलपमेंट प्रोजेक्ट
करीब आठ साल पहले पर्यटन विभाग पौड़ी की ओर से इन प्राकृतिक झरनों के विकास की योजना का प्रस्ताव राजाजी नेशनल पार्क प्रशासन को भेजा गया था। इसके तहत रास्तों का निर्माण, स्पॉट के आसपास टूरिस्ट रेस्टशेड, बेंच आदि सुविधाएं जुटाई जानी थीं। तत्कालीन पर्यटन अधिकारी ने वाटरफॉल पर जुटने वाले सैलानियों की आमद और वहां के हालात देखकर विशेषतौर पर तीनों के लिए संयुक्त प्रोजेक्ट बनाया था। बहरहाल नेशनल पार्क प्रशासन के अफसरों की मानें तो उन्हें पर्यटन विभाग का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला। उन्होंने अपनी ओर से भी इस दिशा में कभी कोई पहल नहीं की।
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वैसे तो टाइगर रिजर्व में इस तरह की गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकती हैं। फिर भी पर्यटकों की आवाजाही के लिहाज से प्राकृतिक झरनों का किस तरह से डेवलपमेंट किया जा सकता है, इस पर विचार किया जाएगा।
-सनातन, निदेशक राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व, देहरादून
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पर्यटक स्थलों का मामला संज्ञान में नहीं है,लेकिन इस मामले को दिखवाया जाएगा। कोशिश रहेगी कि क्षेत्र में पर्यटक सुविधाएं जुटाई जाएं। इस प्रस्ताव को वन विभाग के ईको टूरिज्म कमेटी में रखा जाएगा।
अतुल भंडारी, जिला पर्यटन अधिकारी पौड़ी गढ़वाल
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तीर्थनगरी के जो जलप्रपात विश्व के प्रकृति प्रेमियों, सैलानियों को आकर्षित करता है, इनके विकास को लेकर राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन कतई गंभीर नहीं है। पार्क के बफर जोन में पड़ने वाले जलप्रपात पार्क प्रशासन की अनदेखी से विकसित नहीं हो पा रहे हैं। जबकि पटना वाटरफॉल, गरुड़चट्टी और कालीकुंड झरनों को विकसित कर हर साल लाखों का राजस्व अर्जित किया जा सकता है।
राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क की गौहरी रेंज के अंतर्गत पड़ने वाले बफर जोन में गरुड़चट्टी झरना, पटना और कालीकुंड वाटरफॉल हैं। जो अंतरराष्ट्रीय आवाजाही वाले लक्ष्मणझूला क्षेत्र से महज 15 किमी. के दायरे में हैं। इन क्षेत्रों में हर साल आध्यात्मिक उन्नयन, ध्यान, योग और गंगा दर्शन-स्नान के लिए तीर्थक्षेत्र स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला आने वाले लाखों पर्यटक-तीर्थाटक इन जलप्रपातों का लुत्फ उठाने भी पहुंचते हैं। खासकर विदेशी पर्यटकों को ऊंची पहाडिय़ों से गिरती झरने की फुहारें खासा आकर्षित करते हैं। गर्मी के दिनों में यहां विदेशी सैलानियों की खासी आमद रहती है, लेकिन इन वाटरफॉल के विकास के लिए राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क और पौड़ी पर्यटन विभाग के पास कोई योजना नहीं है।
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पथरीली पगडंडियां से पहुंचते हैं वाटरफॉल
प्राकृतिक झरनों तक पहुंचने का सफर अत्यधिक कष्टकारी है। इनमें जाने वाले सैलानियों को खड़ी चढ़ाई और पथरीली राह नापनी पड़ती है। वाटर फॉल के आसपास न तो बैठने की सुविधा है और न ही भूख-प्यास मिटाने का इंतजाम। लिहाजा पर्यटकों को झरनों के समीप पत्थरों पर बैठकर सुस्ताना पड़ता है। उन्हें लक्ष्मणझूला या गरुड़चट्टी से खाने पीने की वस्तुएं खरीदकर ढोनी पड़ती हैं।
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पार्क तक नहीं पहुंचा टूरिज्म का डेवलपमेंट प्रोजेक्ट
करीब आठ साल पहले पर्यटन विभाग पौड़ी की ओर से इन प्राकृतिक झरनों के विकास की योजना का प्रस्ताव राजाजी नेशनल पार्क प्रशासन को भेजा गया था। इसके तहत रास्तों का निर्माण, स्पॉट के आसपास टूरिस्ट रेस्टशेड, बेंच आदि सुविधाएं जुटाई जानी थीं। तत्कालीन पर्यटन अधिकारी ने वाटरफॉल पर जुटने वाले सैलानियों की आमद और वहां के हालात देखकर विशेषतौर पर तीनों के लिए संयुक्त प्रोजेक्ट बनाया था। बहरहाल नेशनल पार्क प्रशासन के अफसरों की मानें तो उन्हें पर्यटन विभाग का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला। उन्होंने अपनी ओर से भी इस दिशा में कभी कोई पहल नहीं की।
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वैसे तो टाइगर रिजर्व में इस तरह की गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकती हैं। फिर भी पर्यटकों की आवाजाही के लिहाज से प्राकृतिक झरनों का किस तरह से डेवलपमेंट किया जा सकता है, इस पर विचार किया जाएगा।
-सनातन, निदेशक राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व, देहरादून
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पर्यटक स्थलों का मामला संज्ञान में नहीं है,लेकिन इस मामले को दिखवाया जाएगा। कोशिश रहेगी कि क्षेत्र में पर्यटक सुविधाएं जुटाई जाएं। इस प्रस्ताव को वन विभाग के ईको टूरिज्म कमेटी में रखा जाएगा।
अतुल भंडारी, जिला पर्यटन अधिकारी पौड़ी गढ़वाल