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13 साल में भी नहीं बन सका यमुना पर पुल
Updated Tue, 10 Apr 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने के लिए भीमावाला नाव घाट पर यमुना नदी पर प्रस्तावित पुल निर्माण की योजना ठंडे बस्ते में दम तोड़ रही है। कांग्रेस के शासनकाल में इस पुल के निर्माण पर दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी थी। उसके बाद सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया गया था, लेकिन तब केंद्र से धन न मिलने के कारण पुल निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। सत्ता परिवर्तन होते ही इस पुल निर्माण के सपने को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
वर्तमान में केंद्र, हिमाचल और उत्तराखंड तीनों ही जगहों पर भाजपा की सरकार है। बावजूद इसके पुल के निर्माण में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। पुल बनने से दोनों प्रदेश सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से एक दूसरे के करीब आ सकेंगे। पुल का निर्माण कार्य भीमावाला और हिमाचल प्रदेश के सिंगपुरा के बीच में होना है। सिंगपुरा और आसपास के 30 से अधिक गांवों का मुख्य बाजार विकासनगर ही है। काश्तकारों को फसलें बेचने के लिए विकासनगर ही आना पड़ता है। इसके साथ ही दोनों राज्यों के कई लोगों की रिश्तेदारी भी है।
वर्तमान में लोगों को आवाजाही के लिए नदी पर बने लकड़ी के वैकल्पिक पुल का इस्तेमाल करना पड़ता है लेकिन बरसात में पुल के बह जाने से लोगों की आवाजाही मुश्किलों भरी हो जाती है। उन्हें विकासनगर आने के लिए 34 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है जबकि, दोनों राज्यों के बीच में पुल निर्माण होने से यह दूरी घटकर महज तीन किमी की रह जाएगी।
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630 मीटर लंबा पुल बनना है
कांग्रेस शासनकाल में 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने नदी पर दोनों राज्यों के बीच में पुल निर्माण की घोषणा की थी। जिसके बाद इस पुल निर्माण को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के शासनकाल में दोनों राज्यों के बीच में पुल निर्माण के लिए सर्वे भी पूरा कर लिया गया, लेकिन केंद्र से बजट न मिलने के कारण इस पुल का निर्माण शुरू नहीं हो सका। दोनों राज्यों के बीच में 630 मीटर लंबा पुल निर्माण होना है।
पूर्व में महज जनता को गुमराह करने के लिए चुनाव के दौरान पुल का सर्वे कार्य किया गया, लेकिन वर्तमान में प्रदेश सरकार पुल निर्माण के लिए गंभीर है। इसके लिए एनएच को प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही पुल निर्माण का काम शुरू किया जाएगा।
- मुन्ना सिंह चौहान, विधायक, विकासनगर
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विकासनगर।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने के लिए भीमावाला नाव घाट पर यमुना नदी पर प्रस्तावित पुल निर्माण की योजना ठंडे बस्ते में दम तोड़ रही है। कांग्रेस के शासनकाल में इस पुल के निर्माण पर दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी थी। उसके बाद सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया गया था, लेकिन तब केंद्र से धन न मिलने के कारण पुल निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। सत्ता परिवर्तन होते ही इस पुल निर्माण के सपने को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
वर्तमान में केंद्र, हिमाचल और उत्तराखंड तीनों ही जगहों पर भाजपा की सरकार है। बावजूद इसके पुल के निर्माण में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। पुल बनने से दोनों प्रदेश सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से एक दूसरे के करीब आ सकेंगे। पुल का निर्माण कार्य भीमावाला और हिमाचल प्रदेश के सिंगपुरा के बीच में होना है। सिंगपुरा और आसपास के 30 से अधिक गांवों का मुख्य बाजार विकासनगर ही है। काश्तकारों को फसलें बेचने के लिए विकासनगर ही आना पड़ता है। इसके साथ ही दोनों राज्यों के कई लोगों की रिश्तेदारी भी है।
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वर्तमान में लोगों को आवाजाही के लिए नदी पर बने लकड़ी के वैकल्पिक पुल का इस्तेमाल करना पड़ता है लेकिन बरसात में पुल के बह जाने से लोगों की आवाजाही मुश्किलों भरी हो जाती है। उन्हें विकासनगर आने के लिए 34 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है जबकि, दोनों राज्यों के बीच में पुल निर्माण होने से यह दूरी घटकर महज तीन किमी की रह जाएगी।
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630 मीटर लंबा पुल बनना है
कांग्रेस शासनकाल में 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने नदी पर दोनों राज्यों के बीच में पुल निर्माण की घोषणा की थी। जिसके बाद इस पुल निर्माण को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के शासनकाल में दोनों राज्यों के बीच में पुल निर्माण के लिए सर्वे भी पूरा कर लिया गया, लेकिन केंद्र से बजट न मिलने के कारण इस पुल का निर्माण शुरू नहीं हो सका। दोनों राज्यों के बीच में 630 मीटर लंबा पुल निर्माण होना है।
पूर्व में महज जनता को गुमराह करने के लिए चुनाव के दौरान पुल का सर्वे कार्य किया गया, लेकिन वर्तमान में प्रदेश सरकार पुल निर्माण के लिए गंभीर है। इसके लिए एनएच को प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही पुल निर्माण का काम शुरू किया जाएगा।
- मुन्ना सिंह चौहान, विधायक, विकासनगर