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उच्च शिक्षा में अच्छे-बुरे के फर्क के लिए विवेक का करें विकास
Updated Sun, 08 Apr 2018 10:40 PM IST
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श्रीनगर। एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि के फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर (एफडीसी) की ओर से आयोजित उच्च शिक्षा में व्यवसायिक नैतिकता (प्रोफेशनल इथिक्स इन हायर एजूकेशन) राष्ट्रीय संगोष्ठी में नैतिकता, दबाव, विवेक, गुणवत्ता और नीति शास्त्र पर चर्चा की गई।
विवि के चौरास स्थित शैक्षणिक गतिविधि केंद्र में चल रही राष्ट्रीय संगोष्ठी रविवार को संपन्न हो गई। मुख्य वक्ता दिल्ली विवि के पूर्व एचओडी दर्शनशास्त्र प्रो. अशोक वोहरा ने कहा कि उच्च शिक्षा में मात्र सूचना संप्रेषण नहीं, बल्कि विवेक विकसित करने की जरूरत है। नीतिशास्त्र एवं नैतिक मूल्य केंद्र दिल्ली विवि के निदेशक प्रो. टीके मिश्रा ने बताया कि तकनीक के माध्यम से बनावटी बुद्धिमत्ता की जगह भावनात्मक एवं आत्मीय बुद्धिमत्ता के साथ ही शिक्षा में नैतिकता एवं गुणवत्ता दोनों का विकास हो सकता है। संगोष्ठी की अध्यक्षता यूसिक विभागाध्यक्ष प्रो. एनएस पंवार ने की। इस मौके पर एफडीसी की निदेशक प्रो. इंदू पांडे खंडूड़ी, प्रो. ओपी गुर्साइं, डा. विजय ज्योति, डा. नितिन सती, प्रो. विनीत घिल्डियाल, प्रो. एमसी सती और डा. कविता भट्ट ने विचार रखे।
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विवि के चौरास स्थित शैक्षणिक गतिविधि केंद्र में चल रही राष्ट्रीय संगोष्ठी रविवार को संपन्न हो गई। मुख्य वक्ता दिल्ली विवि के पूर्व एचओडी दर्शनशास्त्र प्रो. अशोक वोहरा ने कहा कि उच्च शिक्षा में मात्र सूचना संप्रेषण नहीं, बल्कि विवेक विकसित करने की जरूरत है। नीतिशास्त्र एवं नैतिक मूल्य केंद्र दिल्ली विवि के निदेशक प्रो. टीके मिश्रा ने बताया कि तकनीक के माध्यम से बनावटी बुद्धिमत्ता की जगह भावनात्मक एवं आत्मीय बुद्धिमत्ता के साथ ही शिक्षा में नैतिकता एवं गुणवत्ता दोनों का विकास हो सकता है। संगोष्ठी की अध्यक्षता यूसिक विभागाध्यक्ष प्रो. एनएस पंवार ने की। इस मौके पर एफडीसी की निदेशक प्रो. इंदू पांडे खंडूड़ी, प्रो. ओपी गुर्साइं, डा. विजय ज्योति, डा. नितिन सती, प्रो. विनीत घिल्डियाल, प्रो. एमसी सती और डा. कविता भट्ट ने विचार रखे।
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